“केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दे दी है, जिसमें कुल ₹10,000 करोड़ का कोष होगा। यह फंड मुख्य रूप से डीप टेक, तकनीक-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण और प्रारंभिक विकास चरण के स्टार्टअप्स को लक्षित करेगा, जिससे घरेलू वेंचर कैपिटल मजबूत होगा और भारत वैश्विक इनोवेशन हब बनेगा।”
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0: ₹10,000 करोड़ का नया कोष, डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बूस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (Startup India FoF 2.0) की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है। इस योजना के तहत कुल ₹10,000 करोड़ का कोष आवंटित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए वेंचर कैपिटल जुटाना है। यह फैसला स्टार्टअप इंडिया पहल के पहले चरण की सफलता के बाद लिया गया है, जहां पहले फंड ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
FoF 2.0 विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस करेगा जहां जोखिम अधिक है लेकिन दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता होती है। इसमें डीप टेक (जैसे AI, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, स्पेस टेक), तकनीक-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण और प्रारंभिक विकास चरण (early-growth stage) के स्टार्टअप्स शामिल हैं। योजना का लक्ष्य घरेलू लंबी अवधि की पूंजी जुटाकर वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूत करना और नवाचार-आधारित उद्यमिता को देशव्यापी स्तर पर बढ़ावा देना है।
पहले चरण (FFS 1.0) की सफलता से प्रेरित होकर यह नया फंड अधिक लक्षित दृष्टिकोण अपनाएगा। FFS 1.0 में ₹10,000 करोड़ का पूरा कोष 145 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में कमिट किया गया था, जिसके माध्यम से 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ। इन निवेशों ने कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक, फिनटेक, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में पहली बार फाउंडर्स को सपोर्ट किया और निजी पूंजी को आकर्षित किया।
FoF 2.0 की प्रमुख विशेषताएं:
डीप टेक और इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग पर प्राथमिकता : ऐसे क्षेत्र जहां पेशेंट कैपिटल की जरूरत होती है, जैसे उन्नत सामग्री, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी।
प्रारंभिक विकास चरण के फाउंडर्स को सहारा : फंडिंग की कमी से होने वाली शुरुआती असफलताओं को कम करना, खासकर नए और इनोवेटिव आइडियाज के लिए।
देशव्यापी पहुंच : मेट्रो शहरों से बाहर भी निवेश को प्रोत्साहन, ताकि टियर-2 और टियर-3 शहरों में इनोवेशन फले-फूले।
उच्च-जोखिम पूंजी गैप भरना : सेल्फ-रिलायंस और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधिक पूंजी निर्देशित करना।
छोटे फंड्स को मजबूती : घरेलू वेंचर कैपिटल बेस को मजबूत करने के लिए छोटे AIFs को सपोर्ट।
यह योजना ‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन से जुड़ी हुई है। इससे उच्च-गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा होंगी, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी और भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी टेक्नोलॉजी, उत्पाद और समाधान विकसित कर सकेगा। 2016 में स्टार्टअप इंडिया लॉन्च होने के बाद से DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है, और 2025 में सबसे ज्यादा सालाना रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए।
FoF 2.0 स्टार्टअप इकोसिस्टम के अगले चरण को तेज करने में अहम भूमिका निभाएगा, जहां फोकस मात्र संख्या पर नहीं बल्कि गुणवत्ता, गहराई और स्थानीय प्रभाव पर होगा। यह कदम घरेलू निवेशकों को प्रोत्साहित करेगा और वैश्विक स्तर पर भारत की इनोवेशन क्षमता को मजबूत बनाएगा।


