Alt Text for featured image : सरकार की एनएलएम योजना के तहत गधा पालन पर 50 लाख रुपये सब्सिडी, गधे और किसान ग्रामीण क्षेत्र में

गधे पालने पर सरकार दे रही है 50 लाख तक की सब्सिडी: घटती आबादी बचाने और कमाई का नया रास्ता!

केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना के तहत अब गधा पालन पर 50 लाख रुपये तक की कैपिटल सब्सिडी मिल रही है। देश में गधों की संख्या तेजी से घट रही है, जिसे रोकने और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। एक यूनिट में कम से कम 50 मादा और 5 नर गधे रखने पर 50% सब्सिडी (अधिकतम 50 लाख) उपलब्ध है, जो स्वदेशी नस्लों पर लागू होती है। इससे किसान और उद्यमी गधा दूध, प्रजनन और अन्य उत्पादों से अच्छी कमाई कर सकते हैं।

गधे पालन पर 50 लाख तक सब्सिडी: पूरी योजना और फायदा कैसे उठाएं

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) के एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट कंपोनेंट के तहत केंद्र सरकार गधा, घोड़ा और ऊंट पालन को बढ़ावा दे रही है। यह योजना विशेष रूप से गधों की घटती संख्या पर फोकस करती है। हाल के वर्षों में भारत में गधों की आबादी में भारी गिरावट आई है—2012 से 2019 के बीच लगभग 60% की कमी दर्ज की गई, जिससे 3 लाख से घटकर करीब 1.23 लाख रह गई। इस गिरावट की मुख्य वजह पारंपरिक उपयोग में कमी, मशीनीकरण और चमड़े-खाल के लिए अवैध शिकार है। सरकार अब स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के लिए प्रोत्साहन दे रही है।

योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

सब्सिडी का ढांचा : कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का 50% कैपिटल सब्सिडी, अधिकतम 50 लाख रुपये तक।

उदाहरण : यदि आपका प्रोजेक्ट 1 करोड़ रुपये का है, तो सरकार 50 लाख रुपये की मदद देगी। बाकी राशि बैंक लोन या व्यक्तिगत निवेश से पूरी की जा सकती है।

पात्र संस्थाएं : व्यक्ति, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG), किसान सहकारी संगठन (FCO) और धारा 8 कंपनियां।

न्यूनतम यूनिट आवश्यकता : गधा ब्रीडिंग फार्म के लिए कम से कम 50 मादा गधे और 5 नर गधे जरूरी।

लागू नस्लें : केवल स्वदेशी (इंडिजिनस) नस्लों पर सब्सिडी मिलेगी, विदेशी नस्लों पर नहीं।

उद्देश्य : प्रजनन फार्म स्थापित करना, नस्ल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार सृजन और पशुधन उत्पादकता बढ़ाना।

गधा पालन से कमाई के प्रमुख स्रोत

गधा पालन अब सिर्फ पारंपरिक काम नहीं रहा। इसमें कई आधुनिक बिजनेस अवसर हैं:

गधा दूध (Donkey Milk) : बाजार में बहुत महंगा बिकता है। इसमें उच्च पोषक तत्व होते हैं, जो स्किनकेयर, कॉस्मेटिक्स, शिशु पोषण और स्वास्थ्य उत्पादों में इस्तेमाल होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है, जहां लीटर 5,000-10,000 रुपये तक मिल सकता है।

प्रजनन और बिक्री : अच्छी नस्ल के गधों को प्रजनन के लिए बेचना। ग्रामीण क्षेत्रों में ईंट भट्टों, छोटे परिवहन और कृषि कार्यों के लिए मांग बनी हुई है।

अन्य उत्पाद : खाल, बाल और गोबर से जैविक खाद या अन्य वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स।

रोजगार सृजन : फार्म चलाने से स्थानीय स्तर पर कई लोगों को काम मिल सकता है।

आवेदन कैसे करें

योजना पूरी तरह डिजिटल है। उद्यमी मित्र पोर्टल (udyamimitra.in) या एनएलएम की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक लोन स्वीकृति और अन्य दस्तावेज जमा करने होते हैं।

सब्सिडी दो किस्तों में मिलती है—पहली लोन स्वीकृति पर और दूसरी प्रोजेक्ट शुरू होने पर।

राज्य स्तर पर पशुपालन विभाग से संपर्क कर गाइडेंस लें।

सावधानियां और टिप्स

केवल स्वदेशी नस्लों का चयन करें, जैसे स्थानीय भारतीय गधे।

फार्म स्थापित करने से पहले बाजार सर्वे करें—दूध की डिमांड वाले क्षेत्रों (शहरी कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री) पर फोकस करें।

पशु चिकित्सा और फीड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि गधे कम बीमार पड़ते हैं लेकिन अच्छी देखभाल जरूरी है।

प्रोजेक्ट लागत में शेड, फीड, पानी और प्रजनन सुविधाएं शामिल करें।

यह योजना ग्रामीण भारत में नए उद्यमियों के लिए सुनहरा अवसर है, जहां कम निवेश में लंबे समय तक स्थिर आय संभव है।

Disclaimer : यह खबर विभिन्न सरकारी दिशानिर्देशों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। योजना के नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए आधिकारिक पोर्टल पर जांच जरूरी है।

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