“अमेरिका-ईरान संघर्ष के तेज होने से NSE और BSE में भारी बिकवाली देखी गई, सेंसेक्स 1,122 अंक टूटकर 79,116 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 24,500 के नीचे फिसल गया। वहीं क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से एनर्जी और तेल खोज कंपनियों के शेयरों में उछाल आया, ONGC और ऑयल इंडिया जैसे स्टॉक्स 2% तक चढ़े। वैश्विक अनिश्चितता और FII की भारी बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।”
शेयर बाजार में अमेरिका-ईरान तनाव का भारी असर
अमेरिका-ईरान युद्ध के तेज होने से भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। BSE सेंसेक्स 1,122.66 अंक यानी 1.40% की गिरावट के साथ 79,116.19 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह 1,795.65 अंक तक नीचे चला गया था। NSE निफ्टी 385.20 अंक यानी 1.55% टूटकर 24,480.50 पर सेटल हुआ। दोनों सूचकांकों ने पिछले कुछ सत्रों में 2.5% से अधिक की गिरावट दिखाई है।
इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 16.32 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। बाजार पूंजीकरण में दो ट्रेडिंग सत्रों में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज हुई। FII ने पिछले दो दिनों में 12,048 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिसने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला। रुपये में भी रिकॉर्ड गिरावट आई और क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से इंपोर्ट बिल पर चिंता बढ़ गई।
एनर्जी सेक्टर में तेजी, अन्य सेक्टरों में बिकवाली
जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया जबकि US क्रूड 81 डॉलर के ऊपर ट्रेड कर रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ग्लोबल सप्लाई में 20% तक की कमी का खतरा है। भारत जैसे बड़े इंपोर्टर देशों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
इस वजह से एनर्जी सेक्टर में तेजी देखी गई। upstream ऑयल कंपनियां फायदा उठा रही हैं। ONGC और ऑयल इंडिया के शेयर 2% तक चढ़े। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े प्लेयर्स में भी कुछ रिकवरी दिखी। वहीं OMC जैसे इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL पर मार्जिन प्रेशर बढ़ा क्योंकि रिटेल फ्यूल प्राइस में तुरंत बढ़ोतरी नहीं हुई।
अन्य सेक्टरों में भारी बिकवाली रही। IT, FMCG, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। निफ्टी IT में मामूली बढ़त रही लेकिन बाकी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। डिफेंस सेक्टर में कुछ स्थिरता दिखी लेकिन कुल मिलाकर बाजार में रिस्क-ऑफ मूड हावी रहा।
कुंजी स्तर और आगे का रुख
निफ्टी 24,500 के स्तर पर संघर्ष कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो 24,300 तक गिरावट संभव है। सेंसेक्स के लिए 78,500 सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ निफ्टी 24,750-24,800 और सेंसेक्स 80,000 के स्तर पर रेजिस्टेंस है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका-ईरान संघर्ष लंबा खिंचता है तो क्रूड 100 डॉलर तक जा सकता है, जिससे इन्फ्लेशन बढ़ेगा और RBI की मॉनेटरी पॉलिसी पर असर पड़ेगा। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ईरान की ओर से न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने की बात आई है, जिससे बाजार में थोड़ी राहत मिली और गुरुवार को रिकवरी देखी गई जहां सेंसेक्स 900 अंक चढ़कर 80,015 पर बंद हुआ।
सेक्टर-वाइज प्रभाव
एनर्जी और ऑयल एक्सप्लोरेशन : तेजी जारी, upstream कंपनियां फायदे में।
OMC और रिफाइनरी : मार्जिन दबाव, प्राइस हाइक की जरूरत।
एविएशन और पेंट्स : फ्यूल कॉस्ट बढ़ने से नुकसान।
डिफेंस : स्थिर से सकारात्मक, सरकारी ऑर्डर पर फोकस।
बैंकिंग और फाइनेंशियल : FII बिकवाली से दबाव।
IT और एक्सपोर्ट : ग्लोबल स्लोडाउन के डर से गिरावट।
निवेशकों को सलाह है कि शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी ज्यादा रहेगी। लॉन्ग टर्म में एनर्जी और डिफेंस सेक्टर में ऑपर्च्युनिटी दिख रही है लेकिन क्रूड प्राइस और जियोपॉलिटिकल अपडेट्स पर नजर रखें।


