रात में कार चलाते समय हेडलाइट्स और रोड मार्किंग पर फोकस करते ड्राइवर की इमेज, सेफ्टी टिप्स दिखाती

रात में कार चलाते समय इन 10 जरूरी टिप्स को फॉलो करें, हादसे होंगे हमेशा के लिए दूर

“रात के अंधेरे में ड्राइविंग भारतीय सड़कों पर सबसे जोखिम भरा समय माना जाता है, जहां विजिबिलिटी कम होने, चकाचौंध और थकान के कारण हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात में स्पीड 20-30% कम रखें, हेडलाइट्स का सही इस्तेमाल करें, आगे दूर तक फोकस रखें और हर 2 घंटे में ब्रेक लें—ये छोटे कदम आपकी और परिवार की जान बचा सकते हैं।”

रात के अंधेरे में कार चलाने का सही तरीका क्या है, किन बातों का रखें ख्याल और हादसों को हमेशा के लिए रखें दूर

भारत में रात के समय सड़क हादसे दिन की तुलना में अधिक घातक साबित होते हैं, क्योंकि अंधेरा होने से खतरे की पहचान देर से होती है और रिएक्शन टाइम बढ़ जाता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल सड़क दुर्घटनाओं में रात का समय महत्वपूर्ण हिस्सा रखता है, खासकर हाईवे पर जहां लंबी दूरी तय की जाती है।

1. वाहन की तैयारी सबसे पहले ट्रिप से पहले कार की सभी लाइट्स—हेडलाइट, टेललाइट, इंडिकेटर और फॉग लाइट—की जांच जरूर करें। गंदगी या धुंध से ढकी लाइट्स विजिबिलिटी को 50% तक कम कर सकती हैं। विंडस्क्रीन, साइड मिरर और रियरव्यू मिरर को अच्छी तरह साफ रखें। यदि LED या हाई-इंटेंसिटी बल्ब लगे हैं तो सुनिश्चित करें कि वे सही एलाइनमेंट में हों, वरना oncoming ट्रैफिक को ब्लाइंड कर सकते हैं।

2. हेडलाइट्स का सही इस्तेमाल सूर्यास्त से 30 मिनट पहले और सूर्योदय के 30 मिनट बाद तक हेडलाइट्स ऑन रखें। शहर में या oncoming वाहन आने पर लो बीम का इस्तेमाल करें। हाई बीम केवल तब यूज करें जब सामने कोई वाहन न हो। oncoming गाड़ी के हाई बीम से चकाचौंध होने पर आंखें नीचे दाएं तरफ (रोड मार्किंग पर) फोकस करें, सीधे लाइट में न देखें—यह 3-5 सेकंड में आंखों की एडजस्टमेंट में मदद करता है।

3. स्पीड कंट्रोल और फॉलोइंग डिस्टेंस रात में स्पीड दिन की तुलना में कम से कम 20-30% कम रखें। भारतीय हाईवे पर जहां दिन में 100 किमी/घंटा संभव हो, रात में 70-80 किमी/घंटा से ज्यादा न जाएं। फॉलोइंग डिस्टेंस को दोगुना रखें—4-सेकंड रूल का पालन करें। अंधेरे में ब्रेकिंग डिस्टेंस बढ़ जाता है, इसलिए ब्रेक जल्दी और स्मूद लगाएं।

4. थकान और नींद से बचाव रात की ड्राइविंग में सबसे बड़ा खतरा माइक्रो स्लीप है। ट्रिप से पहले कम से कम 7-8 घंटे की पूरी नींद लें। हर 2 घंटे या 150-200 किमी के बाद 10-15 मिनट का ब्रेक लें। हल्का नाश्ता जैसे चाय-कॉफी या च्यूइंग गम चबाएं—यह अलर्ट रखता है। यदि आंखें भारी लगें, गाड़ी साइड में सुरक्षित रोककर झपकी लें।

5. चकाचौंध और ग्लेयर से निपटना भारतीय सड़कों पर हाई-बीम और अनरेगुलेटेड LED लाइट्स की समस्या आम है। oncoming ट्रैफिक से बचने के लिए रोड के बाईं तरफ (मार्किंग या किनारे) देखें। यदि ग्लेयर ज्यादा हो तो स्पीड कम करें और यदि जरूरी हो तो गाड़ी रोकें। पोलराइज्ड सनग्लास रात में मदद नहीं करते, बल्कि विजिबिलिटी और कम कर सकते हैं—इन्हें अवॉइड करें।

6. रोड मार्किंग और साइन बोर्ड पर फोकस अंधेरे में रोड के केंद्र या किनारे की व्हाइट/येलो मार्किंग पर ध्यान दें। ये गाइड की तरह काम करती हैं। रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड दूर से दिखते हैं, इन्हें जल्दी पहचानें। हाईवे पर जानवरों (गाय, कुत्ता) का अचानक आना आम है—स्पीड कम रखकर ऐसे जोखिम कम करें।

7. एंटी-ग्लेयर और अन्य सावधानियां डैशबोर्ड लाइट डिम रखें ताकि आंखें बाहर के अंधेरे में एडजस्ट रहें। रियरव्यू मिरर को नाइट मोड में सेट करें। यदि फॉग हो तो फॉग लाइट्स ऑन करें लेकिन हाई बीम अवॉइड करें। बारिश में वाइपर स्पीड बढ़ाएं और हाइड्रोप्लानिंग से बचने के लिए स्पीड 50 किमी/घंटा से कम रखें।

8. इमरजेंसी किट और तैयारी रात की ड्राइव में हमेशा टॉर्च, रिफ्लेक्टिव जैकेट, ट्राएंगल, फर्स्ट एड किट और स्पेयर टायर रखें। यदि ब्रेकडाउन हो तो हेजर्ड लाइट ऑन कर ट्राएंगल 10 मीटर पीछे लगाएं। मोबाइल चार्ज रखें और इमरजेंसी नंबर (112) सेव करें।

9. शहर vs हाईवे में अंतर शहर में स्ट्रीट लाइट्स के बावजूद पेडेस्ट्रियन और दोपहिया वाहन अचानक आ सकते हैं—स्पीड 40-50 किमी/घंटा से ज्यादा न रखें। हाईवे पर ट्रक-बस के पीछे रहने से बचें, क्योंकि उनके हाई बीम और बड़े ब्लाइंड स्पॉट खतरा बढ़ाते हैं।

10. विशेष परिस्थितियां पहाड़ी इलाकों में रात में ड्राइविंग से बचें, यदि जरूरी हो तो लोकल एडवाइजरी चेक करें। कोहरे में लो बीम और फॉग लाइट यूज करें, स्पीड 30-40 किमी/घंटा रखें।

इन टिप्स को अपनाकर आप रात की ड्राइविंग को सुरक्षित और तनावमुक्त बना सकते हैं। याद रखें—सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है, एक छोटी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जागरूकता और सुरक्षा टिप्स के लिए है। हर ड्राइवर को अपनी स्थिति के अनुसार सावधानी बरतनी चाहिए।

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