प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा 2026 के दौरान देशभर के छात्र-छात्राओं को असमिया गमछा ओढ़ाकर स्वागत किया और इसे अपनी सबसे पसंदीदा गमछा बताया। यह गमछा अहोम राजा स्यू-का-फा के काल से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है, जिसमें लाल अंचु वाली गमछा सिर पर पहनी जाती थी। असम की महिलाओं द्वारा घर-घर बुना जाने वाला यह वस्त्र सम्मान, साहस और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक पहचान दर्शाता है, जिसे 2019 में जीआई टैग भी मिल चुका है।
परीक्षा पे चर्चा में असमिया गमछा की वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण में छात्रों को असम के पारंपरिक गमछे से स्वागत किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि असमिया गमछा उनकी पसंदीदा है और यह पूर्वोत्तर भारत की नारी शक्ति का जीवंत प्रतीक है। असम की महिलाएं घरेलू स्तर पर इसे बुनती हैं, जिससे यह सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बन चुका है।
अहोम राजाओं की परंपरा: लाल अंचु का महत्व असमिया गमछा (जिसे गमोसा भी कहते हैं) की शुरुआत अहोम वंश से जुड़ी है। प्रथम अहोम राजा स्यू-का-फा (1228-1268 ई.) के शासन में लाल अंचु वाली गमछा को सिर पर पहनने की प्रथा स्थापित हुई। यह लाल रंग मोरिंडा एंगस्टिफोलिया पौधे से प्राप्त होता है और रक्त, साहस तथा वीरता का प्रतीक माना जाता है। अहोम योद्धा मुगलों और मानी आक्रमणों के खिलाफ लड़ते समय इसे सिर पर या कमर पर बांधते थे। राजा स्वयं इसे शिरोभूषण के रूप में धारण करते थे, जो सम्मान और शक्ति का संकेत था।
गमछा के प्रकार और सांस्कृतिक उपयोग असमिया गमछा बहुपयोगी है। 2019 में मिले जीआई टैग में नौ प्रकार शामिल हैं:
| प्रकार | विशेषता | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| उका गमोसा | सादा, सफेद | रोजमर्रा तौलिया, किसानों द्वारा |
| फुलम गमोसा | फूलदार नक्षी | उत्सव, अतिथि स्वागत |
| बिहुवान | बिहू विशेष | बिहू में अतिथियों को भेंट |
| तमुल गमोसा | पान-सुपारी रखने वाला | धार्मिक अनुष्ठान, पूजा |
| आनाकोटा | विवाह-जन्मदिन विशेष | उपहार स्वरूप |
| पनी गमोसा | मोटा, पानी सोखने वाला | खेतों में काम करने वालों द्वारा |
ये सभी प्रकार हाथ से बुने जाते हैं और तीन तरफ लाल बॉर्डर व चौथी तरफ नक्षीदार डिजाइन होते हैं।
महिलाओं का सशक्तिकरण और आर्थिक योगदान असम के गांवों में महिलाएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी गमछा बुनती आ रही हैं। एक गमछा बुनने में कई घंटे लगते हैं। यह कुटीर उद्योग पूर्वोत्तर की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है। पीएम मोदी ने इसी वजह से इसे नारी शक्ति का प्रतीक बताया। बिहू, नामघर, सत्र और विवाह जैसे हर अवसर पर गमछा अनिवार्य है।
पीएम मोदी का पुराना लगाव यह पहली बार नहीं जब पीएम मोदी ने असमिया गमछा को राष्ट्रीय मंच पर जगह दी। कोविड टीकाकरण के दौरान, गणतंत्र दिवस पर और कई राज्यों के दौरे में उन्होंने इसे पहना। हर बार यह असम की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देता है।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक गमछा सिर्फ कपड़ा नहीं, असम की पहचान है। यह अतिथि सत्कार, गुरु सम्मान और वीरता का माध्यम रहा। अहोम राजाओं से शुरू हुई यह परंपरा आज भी जीवित है और पीएम मोदी के माध्यम से पूरे देश को जोड़ रही है।
Disclaimer यह समाचार रिपोर्ट है। इसमें दी गई जानकारी ऐतिहासिक तथ्यों और वर्तमान घटनाओं पर आधारित है। कोई सलाह या निवेश संबंधी सुझाव नहीं है।


