“आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 तक चलेगी। वर्तमान रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहने की संभावना मजबूत है। दिसंबर 2025 में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद अब विशेषज्ञ मुद्रास्फीति नियंत्रण और मजबूत विकास दर को देखते हुए आगे कटौती की उम्मीद कम कर रहे हैं। बैठक में लिक्विडिटी मैनेजमेंट और रुपए की स्थिरता पर फोकस रह सकता है।”
आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी: रेपो रेट स्थिर रहने की प्रबल संभावना
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बुधवार 4 फरवरी 2026 से अपनी तीन दिवसीय बैठक शुरू करेगी, जो 6 फरवरी को समाप्त होगी। इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा नीतिगत दरों पर अंतिम फैसला सुनाएंगे। दिसंबर 2025 में रेपो रेट को 25 आधार अंकों की कटौती के बाद 5.25% पर लाया गया था, जो 2025 में कुल 125 आधार अंकों की कटौती का हिस्सा था। अब अधिकांश अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ इस बैठक में कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान लगा रहे हैं।
वर्तमान नीतिगत दरें
ये दरें दिसंबर 2025 की बैठक में तय हुईं और तब से कोई बदलाव नहीं आया है।
रेपो रेट कटौती क्यों नहीं? मुख्य कारण
| दर का नाम | वर्तमान स्तर (%) | पिछला बदलाव |
|---|---|---|
| रेपो रेट | 5.25 | दिसंबर 2025 में -25 bps |
| स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) | 5.00 | दिसंबर 2025 में समायोजित |
| मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) / बैंक रेट | 5.50 | दिसंबर 2025 में समायोजित |
| नीतिगत रुख | न्यूट्रल | दिसंबर 2025 से जारी |
मुद्रास्फीति 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है, जो आरबीआई के लिए आरामदायक स्थिति है। CPI आधारित मुद्रास्फीति हाल के महीनों में नियंत्रण में है और खाद्य व ईंधन मूल्यों में स्थिरता दिख रही है।
आर्थिक विकास दर मजबूत बनी हुई है। सरकारी खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है, जबकि निजी निवेश में सुधार की प्रतीक्षा है।
2025 में चार बार कटौती (फरवरी, अप्रैल, जून और दिसंबर) के बाद कुल 125 bps की कमी हो चुकी है। अब ट्रांसमिशन इफेक्ट को देखने का समय है, यानी बैंक लेंडिंग रेट्स में और कमी आने का इंतजार।
रुपए पर दबाव और वैश्विक अनिश्चितताएं (जैसे अमेरिकी फेड की नीति) को देखते हुए स्थिरता जरूरी है। लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर ज्यादा जोर रह सकता है।
यूनियन बजट 2026 में फिस्कल कंसॉलिडेशन और टैक्स राहत के उपायों से पहले ही ग्रोथ को सपोर्ट मिल चुका है। आरबीआई अब अतिरिक्त उत्तेजना देने की बजाय इंतजार की रणनीति अपना सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय और पोल रिजल्ट्स
रॉयटर्स के हालिया पोल में 70 अर्थशास्त्रियों में से 59 ने रेपो रेट अपरिवर्तित रहने का अनुमान लगाया। केवल 10 ने 25 bps कटौती की उम्मीद जताई और एक ने 50 bps की। गुडरिटर्न्स के सर्वे में भी 20 में से अधिकांश विशेषज्ञों ने होल्ड की भविष्यवाणी की। PwC और CRISIL जैसे थिंक टैंक्स ने भी कहा है कि अब “बुलेट वेस्ट” करने की जरूरत नहीं, क्योंकि ग्रोथ मजबूत है और मुद्रास्फीति नियंत्रित है।
आम आदमी पर क्या असर?
होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिलने की संभावना। पिछले कटौती का असर धीरे-धीरे बैंकों के MCLR में दिख रहा है, लेकिन नई कटौती न होने से आगे सुधार सीमित रहेगा।
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज दरें भी स्थिर रह सकती हैं। निवेशकों को लंबी अवधि के लिए उच्च ब्याज वाले विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
शेयर बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन बॉन्ड यील्ड्स में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आने की उम्मीद।
अगले कदम क्या?
आरबीआई अब लिक्विडिटी इंजेक्शन, बॉन्ड खरीद और ओपन मार्केट ऑपरेशंस के जरिए अर्थव्यवस्था को बैलेंस करने पर फोकस कर सकता है। मार्च-अप्रैल 2026 की बैठक में नई आंकड़ों के आधार पर रुख तय होगा। फिलहाल न्यूट्रल स्टांस जारी रहने से नीतिगत स्थिरता का संदेश जाएगा।
Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। यह निवेश, वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं है। बाजार जोखिमों के अधीन है।


