“मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष से वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा, जिसके असर से भारतीय शेयर बाजार बुधवार को लगातार चौथे सत्र में लुढ़का। सेंसेक्स 1,122 अंक टूटकर 79,116 पर और निफ्टी 385 अंक गिरकर 24,480 पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों की संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की भारी क्षति हुई। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल ने महंगाई की आशंका बढ़ाई और FII ने भारी बिकवाली की।”
मिडिल ईस्ट संकट से शेयर बाजार में भारी गिरावट
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव ने भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। बुधवार को बाजार में चौथे लगातार सत्र में गिरावट देखी गई, जिसमें प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने 11 महीने और 6 महीने के निचले स्तर छुए।
सेंसेक्स दिन के दौरान 1,795 अंक तक गिरकर 78,443 के स्तर पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 560 अंक लुढ़ककर 24,305 तक टूटा। अंत में सेंसेक्स 1,122.66 अंक या 1.40% की गिरावट के साथ 79,116.19 पर और निफ्टी 385.20 अंक या 1.55% नीचे 24,480.50 पर बंद हुआ। इस भारी बिकवाली से बाजार पूंजीकरण में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, जिससे निवेशकों में दहशत का माहौल है।
इस गिरावट का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के जवाब में क्षेत्रीय संघर्ष तेज हुआ है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा संभालता है। भारत 85-90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 3% से अधिक बढ़कर $83.91 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI भी $74 के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में तेल कीमतें 10% से अधिक चढ़ चुकी हैं। इससे भारत में आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाता घाटा फैलेगा और रुपये पर दबाव बढ़ेगा। रुपये ने बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर को छुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारी बिकवाली की। सोमवार को ही FII ने ₹3,295 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹8,593 करोड़ की खरीदारी कर सपोर्ट दिया। लेकिन वैश्विक रिस्क-ऑफ मूड में FII का रुख नकारात्मक बना हुआ है।
सेक्टोर प्रभाव और प्रभावित क्षेत्र
तेल और गैस से जुड़े सेक्टर : ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, पेंट, टायर, एविएशन और केमिकल सेक्टर में मार्जिन पर दबाव बढ़ा। इनपुट कॉस्ट बढ़ने से ये कंपनियां प्रभावित हुईं।
अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियां : ONGC और Oil India जैसी कंपनियां बेहतर रियलाइजेशन से फायदा उठा सकती हैं।
डिफेंस सेक्टर : HAL और BEL जैसी कंपनियों में सकारात्मक सेंटिमेंट देखा गया, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव से डिफेंस खर्च बढ़ने की उम्मीद है।
अन्य सेक्टर : रियल्टी, मीडिया और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट रही। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 2-3% तक टूटे।
आर्थिक प्रभाव और विशेषज्ञों की राय
Fitch की BMI रिपोर्ट के अनुसार, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हुआ तो भारत की GDP ग्रोथ में 0.5% तक की कटौती हो सकती है। FY2026/27 के लिए 7% ग्रोथ का अनुमान बरकरार है, लेकिन निवेश सेंटिमेंट पर असर पड़ेगा। EU और US के साथ ट्रेड डील के फायदे भी ऑफसेट हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अल्पकालिक है। पिछले संकटों जैसे कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा संघर्ष में भी बाजार 6 महीने बाद सामान्य हो गया। निवेशकों को पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए और मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स में घरेलू कंजम्पशन, बैंकिंग, ऑटो और कैपिटल गुड्स सेक्टर में अवसर तलाशने चाहिए।
निवेशकों के लिए सलाह
शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी बनी रहेगी, क्रूड प्राइस और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर नजर रखें।
लॉन्ग टर्म में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, इसलिए SIP जारी रखें।
डिफेंस, अपस्ट्रीम ऑयल और डोमेस्टिक फोकस्ड सेक्टर में सतर्कता से निवेश बढ़ाएं।
Disclaimer: यह समाचार और विश्लेषण उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश से पहले अपनी जांच और विशेषज्ञ सलाह लें।


