मोरबी में बंद पड़ी सिरेमिक टाइल फैक्ट्री और गैस संकट से प्रभावित इंडस्ट्री

मिडिल ईस्ट तनाव से हिली भारत की टाइल इंडस्ट्री! 600 यूनिट्स बंद होने का खतरा, 4 लाख नौकरियां दांव पर

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण प्रोपेन और नेचुरल गैस की सप्लाई ठप होने से गुजरात के मोरबी में सिरेमिक टाइल इंडस्ट्री संकट में है। 600 से अधिक यूनिट्स और 4 लाख से ज्यादा लोगों की नौकरियां खतरे में हैं। इंडस्ट्री रोजाना 25 लाख क्यूबिक मीटर नेचुरल गैस और 55 लाख क्यूबिक मीटर प्रोपेन का इस्तेमाल करती है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की वजह से गल्फ से शिपमेंट रुक गए हैं। कई यूनिट्स पहले से ही बंद हो चुकी हैं या उत्पादन घटा रही हैं, जिससे मासिक 1000 करोड़ रुपये का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

गुजरात के मोरबी को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक टाइल उत्पादन केंद्र माना जाता है, जहां भारत की 80-90% सिरेमिक टाइल्स बनती हैं। यहां की इंडस्ट्री पूरी तरह गैस-फायर किल्न पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावित किया है, जहां से गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के जहाज गुजरते हैं। ईरान के नियंत्रण वाले इलाके में जहाजों को रोका जा रहा है, जिससे प्रोपेन और नेचुरल गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है।

मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अरवाड़िया के अनुसार, इंडस्ट्री में 600 से ज्यादा यूनिट्स हैं, जिनमें से 500 से अधिक प्रोपेन पर चलती हैं और 150-200 नेचुरल गैस का इस्तेमाल करती हैं। रोजाना खपत करीब 55 लाख क्यूबिक मीटर प्रोपेन और 25 लाख क्यूबिक मीटर नेचुरल गैस की है। गल्फ देशों से आने वाली सप्लाई रुकने से कई यूनिट्स में स्टॉक सिर्फ 2-3 दिनों का बचा है। प्रोपेन आधारित यूनिट्स बुधवार रात या गुरुवार से बंद होना शुरू हो सकती हैं।

गुजरात गैस कंपनी ने इंडस्ट्रियल सप्लाई पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है और नेचुरल गैस की आपूर्ति में 10-30% तक कटौती कर दी है। कुछ रिपोर्ट्स में 50% तक कटौती का जिक्र है। इससे इंडस्ट्री का मासिक उत्पादन 1000 करोड़ रुपये तक प्रभावित हो सकता है। एक्सपोर्ट भी बुरी तरह प्रभावित है। मोरबी से सालाना 16,000-18,000 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट होता है, जिसमें से GCC और गल्फ देशों को 20-25% हिस्सा जाता है। वर्तमान में 400-500 करोड़ रुपये के शिपमेंट अटके हुए हैं।

प्रभावित क्षेत्र और आंकड़े

पैरामीटरविवरण
कुल यूनिट्स600+
रोजाना नेचुरल गैस खपत25 लाख क्यूबिक मीटर
रोजाना प्रोपेन खपत55 लाख क्यूबिक मीटर
प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार4 लाख से अधिक
प्रभावित एक्सपोर्ट वैल्यू400-500 करोड़ रुपये (वर्तमान)
मासिक उत्पादन जोखिम1000 करोड़ रुपये
भारत में सिरेमिक उत्पादन हिस्सा80-90% (मोरबी)

कई फैक्टरियां पहले से ही उत्पादन 50-70% तक घटा चुकी हैं या शेयरिंग मोड में टैंकर इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चल सकता। यदि संघर्ष हफ्ते भर और चला तो पूरी इंडस्ट्री बंद हो सकती है। इससे निर्माण क्षेत्र, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और एक्सपोर्ट कमिटमेंट्स पर सीधा असर पड़ेगा।

ट्रांसपोर्टर, ट्रेडर्स, पैकेजिंग यूनिट्स और अन्य सहायक व्यवसाय भी प्रभावित होंगे। मजदूरों की संख्या 2-3 लाख प्रत्यक्ष बताई जा रही है, जबकि कुल 4 लाख तक पहुंचती है। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि किल्न को लगातार हाई टेम्परेचर पर चलाना जरूरी है, रुकने से इक्विपमेंट खराब हो सकता है और प्रोडक्ट क्वालिटी प्रभावित होगी।

सरकार और इंडस्ट्री दोनों स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन फिलहाल कोई वैकल्पिक सप्लाई सोर्स तुरंत उपलब्ध नहीं दिख रहा। यह संकट भारत की एनर्जी डिपेंडेंसी और ग्लोबल सप्लाई चेन की कमजोरी को उजागर करता है। मोरबी की इंडस्ट्री न सिर्फ लोकल इकोनॉमी का आधार है, बल्कि देश के निर्माण सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: यह खबर विभिन्न रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री सोर्सेज पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल सकती है।

Scroll to Top