केंद्र सरकार ने 10 फरवरी 2026 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो 20 फरवरी 2026 से लागू हो गए हैं। ये नियम सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) यानी डीपफेक और AI-जनित सामग्री पर सख्त नियंत्रण लाते हैं। मुख्य प्रावधानों में 3 घंटे में अवैध कंटेंट हटाना, संवेदनशील डीपफेक (जैसे नॉन-कंसेंशुअल इंटीमेट इमेजरी) पर 2 घंटे की समयसीमा, अनिवार्य लेबलिंग, यूजर वेरिफिकेशन और प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रोएक्टिव तकनीकी उपाय शामिल हैं। इससे डीपफेक से होने वाली धोखाधड़ी, बदनामी, मिसइंफॉर्मेशन और निजता उल्लंघन पर प्रभावी रोक लगेगी।
भारत में डीपफेक और AI-जनित भ्रामक सामग्री के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Amendment Rules, 2026 को 10 फरवरी 2026 को अधिसूचित किया गया और यह 20 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गया है।
ये संशोधन मुख्य रूप से सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) को लक्षित करते हैं, जिसमें डीपफेक वीडियो, AI से बदली गई ऑडियो-विजुअल सामग्री शामिल है जो असली व्यक्ति या घटना जैसी दिखती है। नियमों में SGI की स्पष्ट परिभाषा दी गई है, जिसमें कंप्यूटेशनल तरीके से बनाई या बदली गई ऐसी सामग्री आती है जो वास्तविक लगे, लेकिन कुछ अच्छे उपयोग जैसे बेसिक एडिटिंग, एक्सेसिबिलिटी फीचर्स या शोध को बाहर रखा गया है।
डीपफेक हटाने की नई समयसीमाएं पहले अवैध सामग्री हटाने के लिए 24-36 घंटे का समय था, अब इसे काफी कम कर दिया गया है।
सामान्य अवैध सामग्री (कोर्ट ऑर्डर या सरकारी नोटिस पर): 3 घंटे के भीतर हटानी या एक्सेस डिसेबल करना अनिवार्य।
संवेदनशील मामलों में जैसे नॉन-कंसेंशुअल इंटीमेट इमेजरी, डीपफेक इंपर्सोनेशन या अश्लीलता: 2 घंटे के भीतर कार्रवाई जरूरी।
यह बदलाव पीड़ितों की त्वरित सुरक्षा सुनिश्चित करता है, क्योंकि डीपफेक तेजी से वायरल होकर अपूरणीय नुकसान पहुंचा सकते हैं।
SGI पर अनिवार्य लेबलिंग और मेटाडेटा परमिशिबल SGI (जो कानूनी है) के लिए प्लेटफॉर्म्स को मजबूत लेबलिंग लागू करनी होगी:
प्रमुख विजुअल डिस्क्लोजर (जैसे वॉटरमार्क या लेबल)।
ऑडियो वार्निंग जहां संभव हो।
मेटाडेटा या आइडेंटिफायर जो प्रूवेनेंस दिखाए।
सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (SSMIs) जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब आदि के लिए अतिरिक्त दायित्व:
SGI पोस्ट करने से पहले यूजर से डिक्लेरेशन लेना।
तकनीकी वेरिफिकेशन करना।
प्रकाशन से पहले प्रमुख लेबलिंग सुनिश्चित करना।
यूजर जागरूकता और प्लेटफॉर्म वार्निंग इंटरमीडियरीज को हर तीन महीने में यूजर्स को एडवाइजरी दिखानी होगी कि अवैध SGI (डीपफेक सहित) बनाने या शेयर करने पर Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 , POCSO Act, 2012, Representation of the People Act, 1951 आदि के तहत सजा हो सकती है।
SGI बनाने वाले टूल्स प्रदान करने वाले प्लेटफॉर्म्स को अतिरिक्त वार्निंग दिखानी होगी, जैसे “डीपफेक, इंपर्सोनेशन या नॉन-कंसेंशुअल इंटीमेट इमेजरी न बनाएं, यह दंडनीय अपराध है।”
प्रोएक्टिव उपाय और सुरक्षित हार्बर प्लेटफॉर्म्स को अवैध SGI रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय (ऑटोमेटेड टूल्स) अपनाने होंगे। नियमों का पालन करते हुए SGI हटाने पर सेक्शन 79 के तहत सुरक्षित हार्बर प्रभावित नहीं होगा।
प्रभाव और चुनौतियां ये नियम डीपफेक से जुड़े जोखिमों जैसे मिसइंफॉर्मेशन, पहचान धोखाधड़ी, नॉन-कंसेंशुअल इंटीमेट इमेजरी, बच्चे शोषण सामग्री, बदनामी और चुनावी हेराफेरी पर मजबूत कंट्रोल लाते हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी समयसीमाएं फ्री स्पीच पर असर डाल सकती हैं और AI डिटेक्शन टूल्स की सटीकता पर सवाल उठते हैं, खासकर मल्टीलिंगुअल संदर्भ में।
फिर भी, यह भारत को AI-जनित सामग्री रेगुलेशन में आगे रखता है, जहां प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ी है और यूजर्स की सुरक्षा मजबूत हुई है।
Disclaimer: यह खबर और विश्लेषण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। कानूनी सलाह के लिए संबंधित प्रावधानों या विशेषज्ञ से परामर्श लें।


