भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट उत्पादन शुरू, मंत्री जी. किशन रेड्डी की घोषणा, चीन पर निर्भरता कम

कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार को बड़ी घोषणा की है कि भारत में इसी साल से रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (Rare Earth Permanent Magnet) का घरेलू उत्पादन शुरू हो जाएगा। यह कदम चीन पर भारत की भारी निर्भरता को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ मैग्नेट्स के 90% से अधिक उत्पादन और आपूर्ति चीन के नियंत्रण में है।

भारत इसी साल रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन शुरू करेगा, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर में चीन पर निर्भरता कम होगी। सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये की योजना से 6,000 MTPA क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है, जबकि बजट 2026 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की गई है।

भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन की शुरुआत: चीन पर निर्भरता कम करने की बड़ी पहल

भारत अब क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने FICCI और मिनिस्ट्री ऑफ माइंस के एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि इस साल के अंत तक प्राइवेट सेक्टर के साथ साझेदारी में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

यह मैग्नेट्स नेodymium-iron-boron (NdFeB) आधारित होते हैं, जो दुनिया के सबसे मजबूत परमानेंट मैग्नेट हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के मोटर्स, विंड टरबाइन, हार्ड डिस्क ड्राइव, मेडिकल इमेजिंग डिवाइसेज, एयरोस्पेस और डिफेंस इक्विपमेंट में बड़े पैमाने पर होता है। भारत में इनकी मांग 2030 तक दोगुनी होने का अनुमान है, लेकिन फिलहाल लगभग पूरी आपूर्ति आयात पर निर्भर है।

नवंबर 2025 में कैबिनेट ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की इंटीग्रेटेड क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर फाइनल मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन शामिल है।

योजना में 6,450 करोड़ रुपये सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव्स और 750 करोड़ रुपये कैपिटल सब्सिडी के रूप में दिए जाएंगे। यह भारत की पहली ऐसी प्रमुख योजना है जो क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी।

केंद्र सरकार ने खनन मंत्रालय और एक राज्य-स्वामित्व वाली संस्था के साथ मिलकर मैग्नेट निर्माण की जरूरी तकनीक विकसित कर ली है। चार अलग-अलग राज्यों में क्रिटिकल मिनरल्स के प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की योजना चल रही है।

बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चार खनिज-समृद्ध राज्यों— ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु —में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की। ये कॉरिडोर खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को एकीकृत करेंगे।

इन कॉरिडोर से न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि रिसाइक्लिंग और इंटरनेशनल कोऑपरेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत के पास दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रेयर अर्थ रिजर्व हैं— US Geological Survey के अनुसार करीब 6.9 मिलियन टन —लेकिन निजी निवेश और एक्सट्रैक्शन की कमी के कारण उपयोग सीमित रहा है।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, क्लीन एनर्जी और डिफेंस सेक्टर को मजबूत बनाएगी। रेयर अर्थ मैग्नेट्स की कमी से EV उत्पादन और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए घरेलू उत्पादन से सप्लाई चेन सुरक्षित होगी और लागत भी कम होगी।

सरकार ने एक्सप्लोरेशन ब्लॉक्स की नीलामी और रिसाइक्लिंग फैसिलिटी को मंजूरी देकर इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। प्राइवेट इंडस्ट्री के साथ साझेदारी से उत्पादन तेजी से स्केल-अप होगा।

यह कदम भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के वैश्विक मूल्य श्रृंखला में ऊपर उठाने वाला साबित होगा, जहां चीन का दबदबा टूटने की शुरुआत हो रही है।

Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।

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