“2025 में भारत ने मोबाइल फोन उत्पादन में 30 करोड़ यूनिट्स का आंकड़ा छुआ, जिसमें से हर चार में से एक यूनिट निर्यात हुई। स्मार्टफोन निर्यात 30 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा, जबकि Apple अकेले 55 मिलियन iPhone भारत में असेंबल कर वैश्विक उत्पादन का 25% हिस्सा संभाल रहा है। यह ‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजना की सफलता है, जिसने चीन पर निर्भरता कम कर भारत को वैश्विक स्मार्टफोन हब बना दिया है।”
चीन को टक्कर! मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड
भारत ने 2025 में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। कैलेंडर वर्ष 2025 में स्मार्टफोन निर्यात 30 अरब डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच गया, जो देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 47 अरब डॉलर का प्रमुख हिस्सा है।
उत्पादन के आंकड़े और भी प्रभावशाली हैं। 2025 में लगभग 30 करोड़ मोबाइल फोन यूनिट्स का उत्पादन हुआ, जिसमें से एक चौथाई यानी करीब 7.5 करोड़ यूनिट्स का निर्यात किया गया। यह उपलब्धि तब हासिल हुई जब 2014-15 में उत्पादन महज 0.18 लाख करोड़ रुपये था और निर्यात नगण्य। आज उत्पादन 5.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि निर्यात 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर है।
Apple की भारत में बढ़ती ताकत Apple ने 2025 में भारत में करीब 55 मिलियन iPhone असेंबल किए, जो पिछले साल के 36 मिलियन से 53% अधिक है। इससे भारत अब वैश्विक iPhone उत्पादन का 25% हिस्सा संभाल रहा है। इनमें से 76% यूनिट्स निर्यात हुईं, जिनकी वैल्यू करीब 34 अरब डॉलर रही। Apple के iPhone निर्यात अकेले 23 अरब डॉलर के आसपास रहे, जो कुल स्मार्टफोन निर्यात का 75% है। PLI योजना के तहत iPhone निर्यात 50 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है।
यह बदलाव China+1 रणनीति का नतीजा है, जहां कंपनियां चीन पर निर्भरता कम कर रही हैं। Q2 2025 में भारत अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में चीन को पीछे छोड़कर पहले नंबर पर पहुंच गया। अमेरिका को भारत से स्मार्टफोन आयात का हिस्सा 44% हो गया, जबकि चीन का 25% रह गया। भारत से निर्यात वॉल्यूम में 240% की छलांग लगी।
मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का विस्तार मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की संख्या 2014-15 में सिर्फ 2 से बढ़कर आज 300 के करीब पहुंच गई है। देश में बिकने वाले 99.2% मोबाइल फोन अब ‘मेड इन इंडिया’ हैं। PLI योजना ने निवेश को बढ़ावा दिया, जिससे कंपोनेंट लोकलाइजेशन में तेजी आई। Tata जैसी भारतीय कंपनियां Apple की असेंबली में 50% तक हिस्सेदारी की ओर बढ़ रही हैं।
आगे की राह ICEA के अनुसार, FY26 के अंत तक मोबाइल फोन उत्पादन 75 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें निर्यात 30 अरब डॉलर से अधिक होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत के टॉप-3 निर्यात उत्पादों में शामिल है। सेमीकंडक्टर संयंत्रों के शुरू होने से 2026 में और तेज वृद्धि संभव है।
यह रिकॉर्ड न सिर्फ आर्थिक मजबूती दिखाता है बल्कि रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा भंडार में योगदान भी बढ़ाता है। भारत अब वैश्विक स्मार्टफोन फैक्ट्री के रूप में उभर रहा है, जहां प्रीमियम डिवाइसेज का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।


