भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA समझौते की बातचीत जनवरी 2026 में पूरी हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को 5 साल के लिए Most Favoured Nation (MFN) दर्जा देने पर सहमति जताई। यह समझौता 99.5% भारतीय निर्यात को ड्यूटी-फ्री एक्सेस देगा, जबकि EU के निर्यात पर 96.6% टैरिफ कम होंगे। समझौते से भारतीय टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे सेक्टरों को तुरंत फायदा मिलेगा, EU एक्सपोर्ट दोगुना होने की उम्मीद है, और दोनों पक्षों को WTO नियमों के तहत स्थिरता मिलेगी।
भारत-EU FTA: यूरोप में बजेगा भारत का डंका! मिला खास दर्जा, 5 साल के लिए हुए ये बड़े समझौते; मिलेगा बंपर फायदा
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत 27 जनवरी 2026 को पूरी हुई, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। इस समझौते के प्रोविजनल टेक्स्ट में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को 5 साल के लिए Most Favoured Nation (MFN) स्टेटस देने पर सहमति दिखाई है। यह प्रावधान FTA लागू होने की तारीख से शुरू होगा, जिससे कोई भी पक्ष किसी तीसरे देश को बेहतर टैरिफ टर्म्स नहीं दे सकेगा।
यह MFN कमिटमेंट WTO नियमों को मजबूत करता है और नए इंपोर्ट-एक्सपोर्ट रेस्ट्रिक्शन्स पर रोक लगाता है। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं में स्थिरता आएगी, खासकर वैश्विक ट्रेड टेंशन्स के बीच। समझौते में डिजिटल ट्रेड, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, सर्विसेज और कस्टम्स प्रोसीजर्स पर भी गहरा सहयोग शामिल है।
भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा फायदा यह है कि EU बाजार में 99.5% ट्रेड वैल्यू पर ड्यूटी-फ्री या रिड्यूस्ड एक्सेस मिलेगा। 70.4% टैरिफ लाइन्स (90.7% भारतीय एक्सपोर्ट वैल्यू) पर तुरंत ड्यूटी खत्म होगी। इससे टेक्सटाइल, लेदर एंड फुटवियर, टी, कॉफी, स्पाइसेस, स्पोर्ट्स गुड्स, टॉयज, जेम्स एंड ज्वेलरी, और कुछ मरीन प्रोडक्ट्स जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों को तुरंत कॉम्पिटिटिव एडवांटेज मिलेगा। ये सेक्टर वर्तमान में EU में 4% से 26% ड्यूटी का सामना करते हैं और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण हैं।
20.3% टैरिफ लाइन्स (2.9% एक्सपोर्ट वैल्यू) पर 3-5 साल में जीरो ड्यूटी आएगी, जबकि 6.1% पर टैरिफ रिडक्शन या TRQs (टैरिफ रेट कोटास) मिलेंगे। कुल मिलाकर 93% भारतीय एक्सपोर्ट EU में ड्यूटी-फ्री एंटर करेंगे।
EU की तरफ से भारत को 96.6% ट्रेड वैल्यू पर टैरिफ एलिमिनेट या रिड्यूस होंगे। इससे EU के ऑटोमोबाइल्स, वाइंस, स्पिरिट्स, ऑलिव ऑयल, नॉन-अल्कोहलिक बीयर और फ्रूट जूस जैसे प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे। EU कंपनियों को सालाना 4 बिलियन यूरो (लगभग 4.7 बिलियन डॉलर) ड्यूटी बचत होगी और 2032 तक EU के भारत एक्सपोर्ट दोगुने होने की संभावना है।
समझौते में सेंसिटिव सेक्टर्स जैसे डेयरी, राइस, शुगर और बीफ को बाहर रखा गया है, जिससे भारत की घरेलू जरूरतों की सुरक्षा बनी रहेगी। साथ ही फूड सेफ्टी, प्लांट हेल्थ स्टैंडर्ड्स WTO-अलाइंड रहेंगे, कस्टम्स प्रोसीजर्स सरल होंगे और डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन के लिए मॉडल मीडिएशन प्रोसीजर्स शामिल हैं।
यह FTA 20 चैप्टर्स वाला कॉम्प्रिहेंसिव डील है, जो सिर्फ गुड्स नहीं बल्कि सर्विसेज (फाइनेंशियल, टेलीकॉम, प्रोफेशनल), मोबिलिटी और डिजिटल ट्रेड को कवर करता है। भारत को कमिटेड सर्विसेज सेक्टर्स में 5 साल का MFN ट्रीटमेंट मिलेगा, जिसकी रिव्यू होगी।
| प्रमुख लाभ क्षेत्र | भारतीय निर्यात फायदा | EU निर्यात फायदा | समयसीमा |
|---|---|---|---|
| टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर | तुरंत जीरो ड्यूटी (90.7% वैल्यू) | – | एंट्री इनटू फोर्स |
| जेम्स एंड ज्वेलरी, टॉयज | तुरंत जीरो ड्यूटी | – | एंट्री इनटू फोर्स |
| ऑटोमोबाइल्स, वाइंस | – | फेज्ड रिडक्शन (96.6% वैल्यू) | 5-10 साल तक |
| कुल ट्रेड वैल्यू एक्सेस | 99.5% ड्यूटी-फ्री/रिड्यूस्ड | 96.6% ड्यूटी-फ्री/रिड्यूस्ड | ज्यादातर तुरंत या 7 साल |
| MFN स्टेटस | दोनों पक्षों को 5 साल | दोनों पक्षों को 5 साल | FTA लागू होने से |
यह समझौता भारत की ग्लोबल ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो UK, ओमान, न्यूजीलैंड जैसे हालिया FTAs के साथ जुड़ता है। इससे भारत @2047 विजन को मजबूती मिलेगी, जहां 2 बिलियन लोगों का फ्री ट्रेड जोन बनेगा।
प्रोविजनल टेक्स्ट जारी होने के बाद लीगल रिव्यू और रैटिफिकेशन प्रोसेस चलेगा, जिसके बाद समझौता अगले साल प्रभावी हो सकता है।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट आधारित है और सूचनात्मक उद्देश्य से है।


