“गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के दिवाला प्रक्रिया में 22 कंपनियों ने ईओआई जमा की हैं, जिनमें जिंदल पावर, वेदांता लिमिटेड और हैवेल्स इंडिया प्रमुख हैं। कंपनी पर स्वीकृत दावे ₹4,240 करोड़ के हैं। जेपीएसएस के अधिग्रहण के बाद यह दूसरा बड़ा पावर-इंफ्रा एसेट है जो निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। बोली प्रक्रिया से कंपनी के केबल, कंडक्टर और पावर ट्रांसमिशन कारोबार में नए मालिक के साथ विस्तार की उम्मीद है।”
जेपी एसोसिएट्स के बाद बिकने जा रहा ‘गुप्ता पावर’ का कारोबारी साम्राज्य, जिंदल-वेदांता समेत 22 समूह ने लगाई बोली
गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Gupta Power Infrastructure Limited) का कारोबारी साम्राज्य अब दिवाला प्रक्रिया के तहत नए मालिक की तलाश में है। कंपनी पर कुल स्वीकृत दावे ₹4,240 करोड़ तक पहुंच चुके हैं, जिसके चलते NCLT के तहत कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) चल रही है। इस प्रक्रिया में कुल 22 कंपनियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जमा की हैं, जिसमें बड़े-बड़े औद्योगिक घराने शामिल हैं।
प्रमुख बोलीदाताओं में जिंदल पावर लिमिटेड, वेदांता लिमिटेड और हैवेल्स इंडिया लिमिटेड का नाम सबसे आगे है। इनके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रांसरेल लाइटिंग लिमिटेड जैसी अन्य कंपनियां भी इस दौड़ में हैं। यह बोलीदाताओं की संख्या दर्शाती है कि स्ट्रेस्ड एसेट्स में निवेशकों की रुचि कितनी तेजी से बढ़ रही है, खासकर पावर ट्रांसमिशन और कंडक्टर सेगमेंट में जहां भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार तेज है।
गुप्ता पावर मुख्य रूप से पावर केबल्स, कंडक्टर्स, एक्सेसरीज और टर्नकी प्रोजेक्ट्स में सक्रिय है। कंपनी के पास ओडिशा में बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं और यह विभिन्न स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज को सप्लाई करती है। कंपनी का कारोबार पावर सेक्टर की बढ़ती मांग से जुड़ा है, जहां 5G, रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन और स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट्स के चलते ट्रांसमिशन इंफ्रा की जरूरत बढ़ रही है। हालांकि, कर्ज के बोझ और प्रोजेक्ट डिले के कारण कंपनी दिवालिया हो गई।
यह घटनाक्रम जेपीएसएस (Jaiprakash Associates) के अधिग्रहण के ठीक बाद आया है, जहां वेदांता, अडानी, जिंदल पावर जैसे ग्रुप्स पहले ही सक्रिय थे। जेपीएसएस के पावर एसेट्स पर भी वेदांता और जिंदल पावर की मजबूत पकड़ रही है। ऐसे में गुप्ता पावर का अधिग्रहण इन ग्रुप्स के लिए पोर्टफोलियो विस्तार का मौका बन सकता है।
बोली प्रक्रिया की प्रमुख बातें
कुल बोलीदाता : 22 (कॉर्पोरेट ग्रुप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स और अन्य निवेशक)
प्रमुख नाम : जिंदल पावर, वेदांता लिमिटेड, हैवेल्स इंडिया, अल्ट्राटेक सीमेंट आदि
स्वीकृत दावे : ₹4,240 करोड़
प्रक्रिया : EOI जमा होने के बाद ड्यू डिलिजेंस और रिजॉल्यूशन प्लान सबमिशन का चरण
संभावित प्रभाव : विजेता कंपनी को तुरंत केबल-कंडक्टर मार्केट में मजबूत पोजिशन मिलेगी
कंपनी की स्थिति और बाजार संदर्भ
गुप्ता पावर का अधिग्रहण भारत के पावर सेक्टर में कंसोलिडेशन की नई लहर का संकेत है। जहां एक तरफ बड़े ग्रुप्स स्ट्रेस्ड एसेट्स को रिवाइव करने में रुचि दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं जैसे रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से ट्रांसमिशन डिमांड बढ़ रही है।
इस अधिग्रहण से विजेता कंपनी को मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी, एक्सिस्टिंग क्लाइंट बेस और सप्लाई चेन में फायदा होगा। खासकर वेदांता और जिंदल पावर जैसे ग्रुप्स, जो पहले से पावर जेनरेशन और ट्रांसमिशन में सक्रिय हैं, के लिए यह सिनर्जी क्रिएट कर सकता है। हैवेल्स जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल ब्रांड के लिए यह वर्टिकल इंटीग्रेशन का अवसर हो सकता है।
प्रक्रिया के अगले चरण में कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) रिजॉल्यूशन प्लान्स की समीक्षा करेगी और हायर वैल्यू-बेटर रिकवरी वाले प्लान को प्राथमिकता देगी। यदि कोई प्लान पास नहीं होता है तो एसेट लिक्विडेशन का रास्ता भी खुल सकता है।


