“गौतम अडाणी के नेतृत्व में अदाणी ग्रुप ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में औपचारिक प्रवेश किया है। अदाणी पावर ने नई सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की स्थापना की, जो न्यूक्लियर पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस करेगी। SHANTI बिल के बाद प्राइवेट सेक्टर के लिए खुले रास्ते पर अदाणी यूपी में 8 स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) के जरिए 1600 MW क्षमता विकसित करने की तैयारी में है, जो भारत की क्लीन एनर्जी महत्वाकांक्षा को मजबूत करेगा।”
परमाणु ऊर्जा में अदाणी का नया अध्याय
अदाणी पावर लिमिटेड ने हाल ही में अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड (AAEL) नाम की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है। यह कंपनी परमाणु या एटॉमिक एनर्जी से प्राप्त बिजली के उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण के लिए जिम्मेदार होगी। कंपनी ने इसकी शुरुआत मात्र 5 लाख रुपये के अधिकृत पूंजी के साथ की है, लेकिन यह कदम भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में प्राइवेट प्लेयर्स की एंट्री का ऐतिहासिक अवसर दर्शाता है।
दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को प्राइवेट निवेश के लिए खोल दिया है। इससे पहले यह सेक्टर मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में था, लेकिन अब प्राइवेट कंपनियां न्यूक्लियर पावर प्लांट्स स्थापित कर सकती हैं, जो देश की बढ़ती बिजली मांग और नेट-जीरो लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा। भारत का मौजूदा न्यूक्लियर कैपेसिटी करीब 8 GW है, जबकि सरकार 2047 तक इसे 100 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।
अदाणी ग्रुप इस बदलाव का फायदा उठाने के लिए सबसे आगे है। सूत्रों के अनुसार, अदाणी उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चर्चा कर रहा है। प्लान है कि राज्य में 8 स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) लगाए जाएं, प्रत्येक की क्षमता 200 MW होगी। इससे कुल 1,600 MW की न्यूक्लियर क्षमता बनेगी। ये रिएक्टर अभी स्थानों का चयन नहीं हुआ है, लेकिन यह प्रोजेक्ट अदाणी को भारत के न्यूक्लियर डेवलपमेंट में प्रमुख प्लेयर बना सकता है।
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) क्यों महत्वपूर्ण?
SMRs पारंपरिक बड़े न्यूक्लियर प्लांट्स से अलग हैं। इनकी मुख्य विशेषताएं:
छोटा आकार : 200-300 MW प्रति यूनिट, आसानी से फैक्ट्री में बनाकर साइट पर इंस्टॉल किए जा सकते हैं।
तेज निर्माण : बड़े प्लांट्स की तुलना में कम समय और कम लागत।
सुरक्षा : उन्नत डिजाइन से बेहतर सुरक्षा फीचर्स, जैसे पैसिव कूलिंग सिस्टम।
फ्लेक्सिबिलिटी : ग्रिड डिमांड के अनुसार स्केल-अप या स्केल-डाउन संभव, AI डेटा सेंटर्स, EV चार्जिंग और इंडस्ट्री की 24/7 क्लीन बेसलोड जरूरतों के लिए आदर्श।
पर्यावरण फायदे : जीरो कार्बन एमिशन, कोयले पर निर्भरता कम करने में सहायक।
अदाणी पावर की रणनीति में SMRs महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कंपनी थर्मल कैपेसिटी को धीरे-धीरे न्यूक्लियर से रिप्लेस करने की योजना पर काम कर रही है। PPA (पावर परचेज एग्रीमेंट्स) खत्म होने पर पुराने थर्मल प्लांट्स बंद किए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय पार्टनरशिप से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी संभव है।
भारत के लिए क्या मतलब?
परमाणु ऊर्जा में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से:
बिजली उत्पादन में तेज वृद्धि संभव, खासकर रिन्यूएबल एनर्जी की इंटरमिटेंसी को बैलेंस करने के लिए।
कार्बन उत्सर्जन में कमी, नेट-जीरो 2070 लक्ष्य की ओर मजबूत कदम।
रोजगार सृजन, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा।
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत, आयातित फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटेगी।
अदाणी का यह कदम ग्रुप की क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगा, जहां पहले से सोलर, विंड और ग्रीन हाइड्रोजन में बड़े निवेश हैं।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट वर्तमान घटनाक्रम और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।


