गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर सुनील गलगोटिया ने 1930 के दशक से चली आ रही फैमिली बुक स्टोर की विरासत को आगे बढ़ाया। पिता की मौत और पारिवारिक विवाद के बाद सब कुछ छोड़कर 1980 में पब्लिशिंग शुरू की, 2000 में सिर्फ 40 स्टूडेंट्स से इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत की और 2011 में यूनिवर्सिटी स्थापित की। आज यह ग्रुप उत्तर प्रदेश के प्रमुख निजी शिक्षा संस्थानों में शुमार है, जिसमें हजारों छात्र पढ़ते हैं और अनुमानित मूल्यांकन ₹3000 करोड़ के आसपास पहुंच चुका है।
सुनील गलगोटिया गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक, चेयरमैन और चांसलर हैं। वे गलगोटिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रमुख हैं, जिसमें गलगोटिया यूनिवर्सिटी, गलगोटिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और अन्य संस्थान शामिल हैं। उनका बेटा ध्रुव गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सीईओ हैं और ग्रुप की दैनिक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुनील गलगोटिया का जन्म दिल्ली में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ, जहां उनकी फैमिली 1930 के दशक से किताबों के कारोबार में थी। परिवार की दुकान E.D. Galgotia and Sons कनॉट प्लेस में स्थित थी, जो उस समय दिल्ली की सबसे प्रसिद्ध बुकस्टोरों में गिनी जाती थी। लोग कहते थे कि अगर कोई किताब गलगोटिया में नहीं मिली तो कहीं नहीं मिलेगी। किताबों से घिरे माहौल में सुनील को पढ़ाई और ज्ञान के प्रति गहरा लगाव हो गया। उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई पूरी की।
पिता की अचानक मौत के बाद परिवार में संपत्ति विवाद शुरू हो गया। सुनील को घर और पारिवारिक बुकस्टोर दोनों से दूर होना पड़ा। मात्र 500 रुपये जेब में लेकर उन्होंने नई शुरुआत की। 1980 में उन्होंने Galgotias Publications शुरू किया, जो किताबों के प्रकाशन और वितरण में सफल रहा। यह कदम उनकी शिक्षा यात्रा की नींव बना।
2000 में सुनील ने अपना असली सपना पूरा किया। उन्होंने Galgotias Institute of Management & Technology (GIMT) की स्थापना की, जहां सिर्फ 40 छात्रों से पढ़ाई शुरू हुई। उसी साल Galgotias College of Engineering and Technology भी शुरू किया गया। इन संस्थानों ने इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और अन्य तकनीकी कोर्सेस पर फोकस किया। 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार ने Galgotias University को यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। यह यमुना एक्सप्रेसवे पर ग्रेटर नोएडा में 52 एकड़ में फैला है।
यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ, फार्मेसी, नर्सिंग, एजुकेशन, लिबरल आर्ट्स, एआई, डेटा साइंस जैसे सैकड़ों कोर्सेस चलते हैं। NAAC से A+ ग्रेड, NBA से कई प्रोग्राम्स की मान्यता और UGC , AICTE , BCI , PCI जैसी संस्थाओं से अप्रूवल प्राप्त है। हाल के वर्षों में यूनिवर्सिटी ने AI, रोबोटिक्स और इंडस्ट्री पार्टनरशिप पर भारी निवेश किया है। 2026 में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में इसने अपने AI इकोसिस्टम पर 350 करोड़ से ज्यादा का निवेश दिखाया, जिसमें NVIDIA सुपरकंप्यूटिंग और सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस शामिल हैं।
ग्रुप की सफलता का आधार इंडस्ट्री इंटीग्रेशन, प्लेसमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर है। छात्रों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और ग्लोबल एक्सपोजर मिलता है। प्लेसमेंट में बड़ी कंपनियां आती हैं और औसत पैकेज अच्छा रहता है। हाल के ट्रेंड्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी का अनुमानित टर्नओवर और मूल्यांकन ₹3000 करोड़ के स्तर पर पहुंच चुका है, जो इसे उत्तर भारत के प्रमुख निजी शिक्षा ग्रुप्स में शामिल करता है।
सुनील गलगोटिया की यात्रा संघर्ष, दृढ़ता और शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल है। एक छोटी बुकस्टोर से शुरू होकर उन्होंने हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्किल डेवलपमेंट का रास्ता खोला। ध्रुव गलगोटिया के नेतृत्व में यूनिवर्सिटी अब AI, इनोवेशन और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर फोकस कर रही है।
टेबल: गलगोटिया ग्रुप की प्रमुख उपलब्धियां
स्थापना: 2000 (कॉलेज), 2011 (यूनिवर्सिटी)
कैंपस क्षेत्र: 52 एकड़
छात्र संख्या: हजारों (UG, PG, PhD)
मान्यता: NAAC A+, NBA, UGC, AICTE आदि
प्रमुख निवेश: AI पर 350+ करोड़ (2026 अपडेट)
## अनुमानित मूल्यांकन: ₹3000 करोड़ स्तर


