यूरोपीय संघ का भारत के निर्यात पर टैक्स छूट खत्म करने का फैसला, निर्यातक और FIEO भड़के

EU का बड़ा झटका! भारत के 87% निर्यात पर टैक्स छूट खत्म, निर्यातक भड़के – FIEO ने सरकार से की फैसला वापस लेने की मांग

“यूरोपीय संघ ने 1 जनवरी 2026 से भारत के लिए GSP के तहत टैरिफ प्रेफरेंस निलंबित कर दिए हैं, जिससे टेक्सटाइल, स्टील, केमिकल्स सहित 87% निर्यातित वस्तुओं पर अब पूर्ण MFN ड्यूटी लागू हो गई है। FIEO ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे न पड़ें। निर्यातकों का कहना है कि यह फैसला FTA वार्ताओं के बीच निर्यात वृद्धि को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।”

EU ने GSP टैक्स छूट वापस ली, निर्यातकों में आक्रोश

यूरोपीय संघ (EU) ने भारत के निर्यातकों को बड़ा झटका देते हुए जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के तहत मिलने वाली टैरिफ छूट को 1 जनवरी 2026 से निलंबित कर दिया है। इस फैसले से भारत के कुल निर्यात का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिसमें टेक्सटाइल, अपैरल, स्टील, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और अन्य इंडस्ट्रियल गुड्स शामिल हैं। अब इन उत्पादों पर EU में पूर्ण Most Favoured Nation (MFN) ड्यूटी लगेगी, जो पहले से 4-12 प्रतिशत तक अधिक है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने इस फैसले को निर्यातकों के लिए “आघात” करार देते हुए केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और EU के साथ कूटनीतिक स्तर पर इस निर्णय को वापस लेने या संशोधित करने की मांग की है। FIEO के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि यह कदम भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ताओं के निर्णायक चरण में आया है, जो निर्यातकों की लागत बढ़ाकर वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगा।

प्रभावित सेक्टर और अनुमानित नुकसान

टेक्सटाइल और अपैरल : EU भारत का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। GSP छूट खत्म होने से अपैरल पर औसतन 12% अतिरिक्त ड्यूटी लगेगी, जिससे निर्यात मूल्य में 8-10% की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे ऑर्डर कैंसिलेशन और मार्जिन दबाव बढ़ेगा।

स्टील और मेटल्स : स्टील उत्पादों पर 7-9% MFN ड्यूटी लागू होगी। भारत से EU में स्टील निर्यात पिछले साल करीब 2.5 बिलियन डॉलर का था, जो अब प्रभावित होगा।

केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स : कई केमिकल्स पर 6.5% तक ड्यूटी बढ़ेगी, जबकि कुछ स्पेशियलिटी केमिकल्स पहले जीरो ड्यूटी पर जा रहे थे।

कुल प्रभाव : विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल EU में भारतीय निर्यात पर 1-1.5 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त टैरिफ बोझ पड़ सकता है। इससे कुल निर्यात वृद्धि दर 2-3 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है।

FIEO ने अनुमान लगाया है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो 2026-27 में EU बाजार में भारतीय शेयर 5-7 प्रतिशत तक गिर सकता है, क्योंकि वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देश अभी भी GSP लाभ ले रहे हैं।

FIEO की प्रमुख मांगें

FIEO ने सरकार से निम्नलिखित तत्काल कदम उठाने की अपील की है:

EU के साथ उच्च स्तरीय वार्ता कर GSP निलंबन को वापस लेने या कम से कम प्रमुख निर्यात सेक्टरों (टेक्सटाइल, स्टील, केमिकल्स) के लिए छूट बहाल करने का प्रयास।

FTA वार्ताओं में GSP बहाली को प्राथमिकता बनाना, क्योंकि FTA से पहले यह छूट निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण ब्रिज है।

घरेलू स्तर पर निर्यात प्रोत्साहन पैकेज: RoDTEP स्कीम के तहत रिफंड दरें बढ़ाना, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करना और ब्रांडिंग-मार्केटिंग के लिए अतिरिक्त फंड।

वैकल्पिक बाजारों (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व) में एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को तेज करना।

बजट 2026-27 में निर्यात-उन्मुख इंडस्ट्रीज के लिए टैक्स इंसेंटिव्स जैसे R&D पर 200-250% वेटेड डिडक्शन बहाल करना और ओवरसीज मार्केटिंग खर्च पर 200% छूट।

निर्यातकों की चिंताएं और वर्तमान स्थिति

निर्यातक संगठनों का कहना है कि वैश्विक संरक्षणवाद के दौर में EU का यह कदम भारतीय निर्यात रणनीति को पटरी से उतार सकता है। पिछले साल भारत का EU में निर्यात करीब 100 बिलियन डॉलर से अधिक था, जिसमें GSP के कारण प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल रही थी। अब लागत बढ़ने से छोटे-मध्यम निर्यातक (MSMEs) सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उनके पास मूल्य वृद्धि का बोझ उठाने की क्षमता कम है।

FIEO ने जोर दिया कि सरकार को तुरंत EU कमिश्न के साथ बातचीत तेज करनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो WTO में चुनौती देनी चाहिए। साथ ही, निर्यातकों को आश्वस्त किया कि घरेलू नीतियां मजबूत करके इस झटके को अवसर में बदला जा सकता है।

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