EPF और EPS पेंशनभोगी न्यूनतम पेंशन बढ़ोतरी की मांग करते हुए प्रदर्शन करते हुए

EPF पेंशन बढ़ेगी? ₹1000 से गुजारा मुश्किल, समिति ने की तुरंत बढ़ोतरी की सिफारिश; पेंशन कितनी करने की मांग

“कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत न्यूनतम पेंशन अभी भी मात्र ₹1000 मासिक है, जबकि महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के कारण पेंशनभोगियों के लिए गुजारा बेहद मुश्किल हो गया है। विभिन्न ट्रेड यूनियनों, पेंशनर समितियों और सांसदों की ओर से लगातार मांग उठ रही है कि इसे तुरंत बढ़ाया जाए। हालिया चर्चाओं में ₹7500 तक न्यूनतम पेंशन की मांग सबसे प्रमुख है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में ₹5000 से ₹10000 तक की संभावना जताई गई है। सरकार ने फंड की स्थिरता का हवाला देते हुए अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन बजट 2026 और EPFO बोर्ड की बैठकों में यह मुद्दा गर्म है।”

EPF पेंशन बढ़ेगी? न्यूनतम ₹1000 पर संघर्ष जारी, समिति की सिफारिश और मांगें

EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1000 मासिक पर फंसी हुई है, जो 2014 से अपरिवर्तित है। इस दौरान महंगाई दर कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे लाखों पेंशनभोगी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में असमर्थ हो गए हैं। विभिन्न हितधारकों की ओर से प्राप्त प्रतिनिधित्वों के आधार पर श्रम मंत्रालय ने इस मुद्दे पर विचार किया है, लेकिन फंड की एक्ट्यूरियल वैल्यूएशन में घाटे का हवाला देकर बढ़ोतरी को टाला जा रहा है।

ट्रेड यूनियनों और EPS-95 नेशनल एजिटेशन कमिटी जैसी संस्थाओं ने हाल में तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन कर मांग तेज की है कि न्यूनतम पेंशन को कम से कम ₹7500 किया जाए। यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान ₹1000 से कई पेंशनभोगी दवाइयां, किराया और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं चला पा रहे। कमिटी और संगठनों का तर्क है कि EPFO फंड में जमा राशि और वार्षिक आय पर्याप्त है—फंड वैल्यूएशन के अनुसार ₹7.8 लाख करोड़ से अधिक का कोष है, जबकि वार्षिक ब्याज आय ₹52,000 करोड़ के आसपास है, लेकिन वितरण मात्र ₹21,000 करोड़ के करीब है।

कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाए, तो पेंशन योगदान में 66% तक की वृद्धि हो सकती है, जिससे फंड मजबूत होगा और न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की गुंजाइश बनेगी। बजट 2026 से पहले इसकी चर्चा तेज है, जहां कुछ रिपोर्ट्स में न्यूनतम पेंशन ₹5000 या ₹10000 तक बढ़ाने की संभावना जताई गई है।

मुख्य मांगें और प्रस्तावित राशियां

वर्तमान न्यूनतम पेंशन: ₹1000 प्रति माह (2014 से स्थिर)

प्रमुख मांग (ट्रेड यूनियन और पेंशनर कमिटी): ₹7500 प्रति माह + डियरनेस अलाउंस

अन्य संभावित स्तर: ₹2500 (पुरानी EPFO बोर्ड चर्चा), ₹3570 (कुछ कैलकुलेशन आधारित), ₹5000-₹10000 (बजट 2026 उम्मीदें)

उच्च पेंशन विकल्प: EPS-2026 में हटाया गया, अब प्रो-राटा कैलकुलेशन पर फोकस

EPS-95 कैसे काम करती है

EPS-95 एक डिफाइंड कंट्रीब्यूशन-डिफाइंड बेनिफिट स्कीम है। नियोक्ता वेतन का 8.33% पेंशन फंड में डालते हैं (₹15,000 वेतन सीमा तक), जबकि केंद्र सरकार 1.16% का बजटीय समर्थन देती है। न्यूनतम पेंशन सरकार के अतिरिक्त बजटीय समर्थन से सुनिश्चित की जाती है।

फंड की स्थिति और चुनौतियां

कुल पेंशनभोगी: लगभग 70 लाख से अधिक

फंड साइज: ₹7.8 लाख करोड़+

वार्षिक आय (ब्याज): ₹52,000 करोड़

वार्षिक वितरण (पेंशन): ₹21,000 करोड़

एक्ट्यूरियल घाटा: 2019 से रिपोर्टेड, भविष्य के दायित्वों के कारण

सरकार का तर्क है कि फंड की लंबी अवधि की स्थिरता सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि जनसांख्यिकीय बदलाव से भविष्य में पेंशन दायित्व बढ़ेंगे। हालांकि, पेंशनभोगी संगठन इसे बहाना मानते हैं और तत्काल बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

EPS-2026 के नए नियमों का प्रभाव

नया EPS-2026 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला है, जिसमें उच्च पेंशन विकल्प हटा दिया गया है और प्रो-राटा कैलकुलेशन को वैधानिक आधार मिला है। इससे कुछ रिटायरिंग सदस्यों को चिंता है, लेकिन न्यूनतम पेंशन अभी भी ₹1000 पर बरकरार है।

आगे क्या?

श्रम मंत्रालय और EPFO बोर्ड की अगली बैठकों में यह मुद्दा प्रमुख रहेगा। यदि वेतन सीमा बढ़ती है या बजट में प्रावधान होता है, तो न्यूनतम पेंशन में वृद्धि संभव है। पेंशनभोगियों को सलाह है कि वे EPFO पोर्टल पर नियमित अपडेट चेक करें और यूनियनों से जुड़े रहें।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी, सरकारी बयानों और विशेषज्ञ विश्लेषण पर आधारित है। यह कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है और निवेश या पेंशन संबंधी निर्णय लेने से पहले EPFO या संबंधित अधिकारी से परामर्श लें।

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