“कारों में पुश बटन स्टार्ट-स्टॉप फीचर अब आम हो चुका है, लेकिन शहरों की ट्रैफिक में फ्यूल बचत के साथ बैटरी-स्टार्टर पर अतिरिक्त लोड और की-फॉब चोरी के खतरे जैसे नुकसान भी जुड़े हैं। कई भारतीय ड्राइवर्स इसे बंद रखना पसंद करते हैं, जबकि हाईवे पर इसका फायदा कम होता है।”
कार के पुश बटन स्टार्ट-स्टॉप फीचर का असली सच
आजकल भारत में बिकने वाली ज्यादातर नई कारों में पुश बटन स्टार्ट-स्टॉप फीचर स्टैंडर्ड या ऑप्शनल के रूप में दिया जा रहा है। यह फीचर दो हिस्सों में काम करता है – एक तरफ की-लेस एंट्री के साथ पुश बटन से इंजन स्टार्ट/स्टॉप करना, और दूसरी तरफ ऑटोमैटिक इडल स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम जो ट्रैफिक सिग्नल पर इंजन खुद बंद और स्टार्ट कर देता है।
फायदे
कन्वीनियंस और आसानी चाबी जेब या पर्स में रखकर ही कार अनलॉक, लॉक, स्टार्ट और स्टॉप की जा सकती है। ब्रेक पेडल दबाकर पुश बटन दबाने से इंजन चालू हो जाता है, जिससे सुबह-शाम की जल्दबाजी में समय बचता है।
फ्यूल एफिशिएंसी में सुधार शहरों की स्टॉप-एंड-गो ट्रैफिक में ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम 7-15% तक फ्यूल बचा सकता है। भारतीय शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में जहां लंबे सिग्नल और जाम आम हैं, यह फायदा खासतौर पर दिखता है। कुछ टेस्ट में अर्बन साइकिल पर 10-26% तक फ्यूल सेविंग देखी गई है।
कम उत्सर्जन और पर्यावरण लाभ इंजन इडलिंग पर बंद रहने से CO2 और अन्य प्रदूषक कम निकलते हैं। भारत में BS6 नॉर्म्स और ग्रीन इनिशिएटिव्स के साथ यह फीचर कार की रीसेल वैल्यू भी बढ़ाता है।
सुरक्षा में अतिरिक्त लेयर इंजन तभी स्टार्ट होता है जब ब्रेक दबा हो और की-फॉब पास में हो। इससे अनजाने में कार स्टार्ट होने का खतरा कम होता है। साथ ही, ऑटो स्टॉप मोड में दरवाजे अनलॉक नहीं होते, जो चोरी या बच्चों की सुरक्षा के लिए अच्छा है।
मॉडर्न लुक और वैल्यू पुश बटन फीचर कार को प्रीमियम फील देता है। मारुति, हुंडई, टाटा, किया जैसी कंपनियां इसे मिड-रेंज कारों में भी दे रही हैं।
नुकसान और असली चुनौतियां
बैटरी और स्टार्टर पर अतिरिक्त वियर ऑटो स्टार्ट-स्टॉप से बार-बार स्टार्ट होने से स्टार्टर मोटर और बैटरी पर लोड बढ़ता है। सामान्य बैटरी जल्दी खराब हो सकती है। कई भारतीय ओनर्स ने 2-3 साल में बैटरी बदलनी पड़ी है। आधुनिक सिस्टम में हैवी-ड्यूटी स्टार्टर और AGM बैटरी इस्तेमाल होती है, लेकिन मेंटेनेंस महंगा पड़ता है।
की-फॉब से जुड़े खतरे की-फॉब की बैटरी कमजोर होने पर कार स्टार्ट नहीं होती। फॉब खो जाने पर कार लॉक हो सकती है और नया फॉब महंगा (10,000-30,000 रुपये तक) पड़ता है। रिले अटैक से चोर की-फॉब सिग्नल कैप्चर कर कार चला सकते हैं, जो भारत में बढ़ती कार चोरी का एक बड़ा कारण बन रहा है।
एसी और कम्फर्ट पर असर इंजन बंद होने पर एसी कंप्रेसर बंद हो जाता है, जिससे केबिन गर्म हो सकता है। गर्मियों में भारतीय शहरों में यह बहुत परेशान करता है। कुछ कारों में सिस्टम ऑटो रीस्टार्ट करता है, लेकिन फिर भी असुविधा रहती है।
ड्राइविंग एक्सपीरियंस में कमी बार-बार इंजन बंद-चालू होने से वाइब्रेशन और डिले महसूस होता है। हाईवे पर जहां इडलिंग नहीं होती, फ्यूल सेविंग न के बराबर रहती है। कई ड्राइवर्स इसे हमेशा ऑफ रखते हैं क्योंकि यह अनावश्यक लगता है।
मेंटेनेंस और रिपेयर कॉस्ट पुश बटन सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट ज्यादा होते हैं। फेलियर पर रिपेयर महंगा पड़ता है। स्टार्टर या ISG (इंटीग्रेटेड स्टार्टर जेनरेटर) खराब होने पर हजारों रुपये का खर्च आ सकता है।
तुलनात्मक टेबल: फायदे vs नुकसान
| पहलू | फायदे | नुकसान |
|---|---|---|
| फ्यूल सेविंग | शहर में 7-15% तक | हाईवे पर न्यूनतम या शून्य |
| कन्वीनियंस | की-लेस ऑपरेशन, आसान स्टार्ट | की-फॉब बैटरी/खोने का रिस्क |
| पर्यावरण | कम उत्सर्जन | – |
| बैटरी/स्टार्टर | – | तेज वियर, महंगा रिप्लेसमेंट |
| कम्फर्ट | – | एसी बंद, वाइब्रेशन |
| सुरक्षा | अनजाने स्टार्ट कम, चोरी रोकथाम | रिले अटैक से चोरी का खतरा |
| कॉस्ट | रीसेल वैल्यू बढ़ सकती है | फॉब/बैटरी रिप्लेसमेंट महंगा |
भारत में जहां ट्रैफिक ज्यादातर शहरों में है, पुश बटन स्टार्ट-स्टॉप फीचर फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन अगर आप ज्यादातर हाईवे ड्राइव करते हैं या मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं देना चाहते, तो इसे ऑफ रखना बेहतर विकल्प है। कार खरीदते समय इस फीचर को टेस्ट जरूर करें और अपनी ड्राइविंग स्टाइल के हिसाब से फैसला लें।


