केंद्रीय बजट 2026-27 की प्रस्तुति में वित्त मंत्री

रिफॉर्म और रिस्क सॉल्यूशंस के साथ विकसित भारत की राह मजबूत बनाने वाला बजट

“केंद्रीय बजट 2026-27 में विकसित भारत के विजन को मजबूत करने के लिए 350 से अधिक सुधारों पर फोकस किया गया है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सेक्टर में रिस्क मैनेजमेंट को बढ़ावा मिला है। जीडीपी ग्रोथ 6.8-7.2% अनुमानित है, फिस्कल डेफिसिट 4.3% रखा गया, कैपेक्स 12.2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है, और बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में नए स्कीम्स लॉन्च किए गए हैं, जो रोजगार, उत्पादकता और इनक्लूसिव ग्रोथ को सपोर्ट करेंगे।”

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों और रिस्क मैनेजमेंट सॉल्यूशंस पर मजबूत जोर दिया है। आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, रियल जीडीपी ग्रोथ FY26 में 7.4% रही और FY27 के लिए 6.8-7.2% प्रोजेक्टेड है, जो प्राइवेट कंजम्प्शन, पब्लिक कैपेक्स और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट साइकल पर आधारित है। बजट में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.3% पर रखा गया है, जो FY26 के 4.4% से कम है, और डेट-टू-जीडीपी रेशियो को 55.6% तक लाने का लक्ष्य है, जो FY31 तक 50% ±1% पर पहुंचेगा।

सरकार ने ‘एक्शन ओवर एम्बिवलेंस, रिफॉर्म ओवर रेटोरिक, पीपल ओवर पॉपुलिज्म’ के फिलॉसफी पर आधारित बजट पेश किया, जिसमें कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। रेवेन्यू एक्सपेंडीचर में 6.6% ग्रोथ का प्रावधान है, जबकि कैपिटल एक्सपेंडीचर 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया, जो जीडीपी का 3.1% है। ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू में 8% ग्रोथ बजटेड है, जिसमें डायरेक्ट टैक्स 11.4% और इनडायरेक्ट टैक्स 3% बढ़ेंगे।

मुख्य सुधार क्षेत्र और उनके प्रभाव

बजट में 350 से अधिक स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स रोल आउट किए गए हैं, जिसमें जीएसटी सिंप्लीफिकेशन, लेबर कोड्स नोटिफिकेशन और क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स की रेशनलाइजेशन शामिल है। ये सुधार एम्प्लॉयमेंट जनरेशन, एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी और हाउसहोल्ड पर्चेजिंग पावर को बूस्ट करेंगे। फाइनेंशियल सेक्टर में रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए हाई-लेवल कमिटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत गठित की जाएगी, जो सेक्टर की रिव्यू करेगी और ग्रोथ के साथ अलाइन करेगी।

रिस्क सॉल्यूशंस के तहत, कटिंग-एज टेक्नोलॉजीज जैसे AI को फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में यूज किया जाएगा, जो गवर्नेंस, प्रोडक्टिविटी और रिस्क मैनेजमेंट को एन्हांस करेगा। नेशनल टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन सपोर्ट थ्रू AI मिशन, नेशनल क्वांटम मिशन और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फंड जैसे प्रोग्राम्स लॉन्च किए गए हैं। इसके अलावा, डेटा सेंटर इन्वेस्टमेंट के लिए टैक्स हॉलिडे और IFSC यूनिट्स के लिए एक्सटेंडेड इंसेंटिव्स दिए गए हैं।

सेक्टर-वाइज इनिशिएटिव्स और इन्वेस्टमेंट्स

बजट में सात स्ट्रैटेजिक और फ्रंटियर सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग को स्केल अप करने पर फोकस है:

बायोफार्मा : बायोफार्मा SHAKTI स्कीम के तहत अगले पांच सालों में 10,000 करोड़ रुपये का आउटले।

इलेक्ट्रॉनिक्स : इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0।

टेक्सटाइल्स : इंटीग्रेटेड प्रोग्राम फॉर टेक्सटाइल्स।

केमिकल्स : तीन डेडिकेटेड केमिकल पार्क्स, जो डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ाएंगे।

अन्य : रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के लिए स्कीम, स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग इनिशिएटिव और हाई-टेक टूल रूम्स इन CPSEs।

इनके अलावा, 200 लिगेसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को रिवाइव करने की स्कीम लॉन्च की गई है, जो लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों जैसे एयरोस्पेस, डिफेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, फिशरीज और फुटवेयर को सपोर्ट करेगी।

रिस्क मैनेजमेंट और रेजिलिएंस बिल्डिंग

सेक्टरमुख्य इनिशिएटिवबजट आउटले (रुपये में)अपेक्षित प्रभाव
इंफ्रास्ट्रक्चरपब्लिक कैपेक्स पुश11.2 लाख करोड़ (FY26 से 89% बढ़ोतरी)हाईवे नेटवर्क 10,000 किमी टारगेट, रेल नेटवर्क 3,500 किमी एक्सटेंशन
एनर्जीकार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज20,000 करोड़ (5 साल)लो-कार्बन फुटप्रिंट, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग
फाइनेंशियलTReDS इंप्रूवमेंट्स, PFC/REC रिस्ट्रक्चरिंगएमएसएमई के लिए बेहतर वर्किंग कैपिटल, कैपिटल मार्केट्स में लिक्विडिटी
रूरल एम्प्लॉयमेंटविकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका1,256 अरब42% बढ़ोतरी, ग्रामीण रोजगार सपोर्ट

बजट में ग्लोबल डायनामिक्स के खिलाफ रेजिलिएंस बिल्डिंग पर फोकस है, जिसमें सप्लाई चेन रीअलाइनमेंट और जियोपॉलिटिकल टेंशन्स शामिल हैं। फाइनेंशियल सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए सेबिंग्स मोबिलाइजेशन, कैपिटल एलोकेशन और रिस्क मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी गई है। फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (नॉन-डेट इंस्ट्रूमेंट्स) रूल्स 2019 की रिव्यू प्रोपोज्ड है, जो फॉरेन इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क को मॉडर्नाइज करेगी।

एमएसएमई के लिए SME ग्रोथ फंड (10,000 करोड़ रुपये) और सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। TReDS को इंप्रूव करने के लिए चार मेजर्स प्रोपोज्ड हैं, जिसमें मांडेटरी एडॉप्शन, क्रेडिट गारंटी, GeM पोर्टल लिंकिंग और सेकंडरी मार्केट्स शामिल हैं। ये स्टेप्स एमएसएमई के लिए वर्किंग कैपिटल अवेलेबिलिटी को बढ़ाएंगे और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को 7 ट्रिलियन रुपये से आगे ले जाएंगे।

टैक्सेशन और कंप्लायंस ईजिंग

इनकम टैक्स एक्ट 2025 को 1 अप्रैल 2026 से इम्प्लीमेंट किया जाएगा, जो 1961 के एक्ट को रिप्लेस करेगा और टैक्स लॉ को सिंप्लिफाई करेगा। कोई नई पर्सनल टैक्स रिलीफ नहीं दी गई, लेकिन कंप्लायंस ईजिंग के लिए रिवाइज्ड रिटर्न फाइलिंग की ड्यू डेट 31 मार्च तक एक्सटेंड की गई है। फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम 2026 लॉन्च की गई, जो स्टूडेंट्स, यंग प्रोफेशनल्स और रिटर्निंग एनआरआई को अनडिस्क्लोज्ड फॉरेन इनकम को रेगुलराइज करने की सुविधा देगी।

टीडीएस और टीसीएस प्रोविजन्स रेशनलाइज्ड किए गए, जैसे ओवरसीज रेमिटेंस फॉर एजुकेशन एंड मेडिकल पर्पोजेस पर टीसीएस रेट 2% कर दिया गया। पेनल्टी और प्रॉसीक्यूशन प्रोविजन्स में भी रिलीफ दिए गए हैं।

इनक्लूसिव ग्रोथ और पब्लिक पार्टिसिपेशन

बजट में हर फैमिली, कम्युनिटी, रीजन और सेक्टर को रिसोर्सेज, एमेनिटीज और ऑपर्चुनिटीज देने पर फोकस है। रूरल एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट में 42% बढ़ोतरी की गई है, जो विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका के थ्रू 1,256 अरब रुपये तक पहुंचेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग मजबूत हुई है, जिसमें नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनीज से कमर्शियल सेक्टर को क्रेडिट फ्लो FY20-FY25 में 43.3% CAGR पर बढ़ा।

फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में नेशनल हाईवे 4,938 किमी कंप्लीट (दिसंबर 2025 तक), रेल इलेक्ट्रिफिकेशन 99.1% और एयरपोर्ट्स 74 से 164 तक पहुंचे। इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट कार्गो 18 MMT से 146 MMT तक बढ़ा। इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी 509.7 GW पहुंची, जिसमें रिन्यूएबल्स 49.8% हैं।

पीएम गतिशक्ति ने मल्टीमोडल जीआईएस-इनेबल्ड प्लानिंग को इंबेड किया, जो कोऑर्डिनेशन और प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन को इंप्रूव करेगा। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप्स को सेंट्रल रखा गया है, जो इंडिया को प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट के टॉप फाइव ग्लोबल डेस्टिनेशन्स में पोजिशन करता है।

फ्यूचर-रेडी इन्वेस्टमेंट्स

बजट में एनर्जी ट्रांजिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस सेक्टर पर फोकस है। कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज के लिए 200 अरब रुपये का आउटले। स्टार्टअप इकोसिस्टम को बूस्ट देने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और कैपिटल एक्सेस को सपोर्ट किया गया। इंडियाAI मिशन, फाउंडेशन मॉडल्स और डीप-टेक R&D को फंडिंग मिलेगी।

फाइनेंशियल सेक्टर रिफॉर्म्स में फॉरेन इन्वेस्टमेंट लिमिट्स को एन्हांस किया गया, जो पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट्स को बूस्ट करेगा। मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क और टोटल रिटर्न स्वैप्स कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट की लिक्विडिटी को डीपन करेंगे।

ये सभी स्टेप्स इंडिया की इकोनॉमिक ट्रेजेक्टरी को मजबूत बनाते हैं, जिसमें आत्मनिर्भरता को लोडस्टार बनाया गया है। डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी, एनर्जी सिक्योरिटी और क्रिटिकल इंपोर्ट डिपेंडेंसीज को रिड्यूस किया जाएगा, जो विकसित भारत की राह को पक्का करेगा।

Disclaimer: यह न्यूज, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है, जो विभिन्न सोर्सेज से प्राप्त हैं।

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