भारतीय शेयर बाजार क्रैश के बीच POWERGRID का स्टॉक स्थिर, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में एक महीने में 51 लाख करोड़ का नुकसान, लेकिन इस PSU कंपनी के शेयर पर एक पैसा भी नहीं हुआ घाटा!

“बीते एक महीने में भारतीय शेयर बाजार से करीब 51 लाख करोड़ रुपये की पूंजी साफ हो गई है। सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट के बीच ज्यादातर बड़े शेयर टूटे, लेकिन एक प्रमुख सरकारी कंपनी के स्टॉक ने शानदार स्थिरता दिखाई और निवेशकों को शून्य नुकसान दिया।”

एक महीने में बाजार का 51 लाख करोड़ स्वाहा, PSU स्टॉक अडिग रहा

मार्च 2026 की शुरुआत से अब तक भारतीय शेयर बाजार में लगातार अस्थिरता देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट संकट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों की भारी निकासी और रुपए की कमजोरी जैसे कारकों ने बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया। बीएसई का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले महीने की तुलना में करीब 51 लाख करोड़ रुपये घटकर 414-420 लाख करोड़ के आसपास पहुंच गया। सेंसेक्स 80,000 के स्तर से फिसलकर 72,000-74,000 के दायरे में आ गया, जबकि निफ्टी 25,000 से नीचे 22,500 के करीब ट्रेड कर रहा है।

इस दौरान कई सत्रों में एक दिन में ही 10-15 लाख करोड़ तक का नुकसान हुआ। उदाहरण के लिए, मिडिल ईस्ट में इजराइल-ईरान तनाव बढ़ने पर एक सत्र में 11.5-12.5 लाख करोड़ रुपये की मार्केट कैप गायब हो गई। बैंकिंग, आईटी, ऑटो, मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। निफ्टी बैंक 3-4% तक टूटा, जबकि निफ्टी आईटी में 10-14% की गिरावट दर्ज हुई।

लेकिन एक सरकारी कंपनी का स्टॉक बिल्कुल नहीं डगमगाया

जब पूरा बाजार लाल निशान में डूबा हुआ था, तब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID) ने असाधारण स्थिरता दिखाई। कंपनी के शेयर में पिछले एक महीने में शून्य से लेकर मामूली प्रतिशत की ही गिरावट या स्थिरता रही, जिससे निवेशकों को एक पैसा भी नुकसान नहीं हुआ। कई दिनों में तो यह हरे निशान में बंद हुआ, जबकि निफ्टी और सेंसेक्स में 2-3% की दैनिक गिरावट आम थी।

POWERGRID क्यों रहा मजबूत? प्रमुख कारण

मजबूत फंडामेंटल्स : कंपनी भारत की सबसे बड़ी पावर ट्रांसमिशन कंपनी है, जो पूरे देश में बिजली के ट्रांसमिशन नेटवर्क को संभालती है। सरकारी स्वामित्व वाली यह कंपनी लगभग मोनोपॉली जैसी स्थिति में है, क्योंकि ट्रांसमिशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बहुत कम है।

रेगुलेटेड रेवेन्यू मॉडल : POWERGRID की कमाई ज्यादातर रेगुलेटेड टैरिफ पर आधारित है, जो सरकार द्वारा तय होता है। इससे बाजार की अस्थिरता का सीधा असर नहीं पड़ता। कंपनी की आय स्थिर रहती है, चाहे बिजली की मांग कम-ज्यादा हो।

उच्च डिविडेंड यील्ड : कंपनी नियमित रूप से अच्छा डिविडेंड देती है, जिससे लॉन्ग-टर्म निवेशक बने रहते हैं। मार्च 2026 में भी डिविडेंड की उम्मीद ने स्टॉक को सपोर्ट दिया।

कम FII निर्भरता : PSU स्टॉक्स में FII होल्डिंग कम होती है, इसलिए विदेशी निकासी का असर कम पड़ता है। DII और रिटेल निवेशक मजबूती से होल्ड कर रहे हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड : भारत में रिन्यूएबल एनर्जी, 5G और इलेक्ट्रिक व्हीकल के विस्तार से ट्रांसमिशन नेटवर्क की जरूरत बढ़ रही है। कंपनी को नए प्रोजेक्ट्स मिल रहे हैं, जैसे इंटरस्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम में निवेश।

अन्य PSU स्टॉक्स की तुलना में स्थिति

निवेशकों के लिए सीख

सेक्टर/कंपनीएक महीने में परफॉर्मेंस (लगभग)कारण
POWERGRID0% से +1-2%रेगुलेटेड, स्थिर रेवेन्यू
NTPC-5 से -8%फ्यूल कॉस्ट बढ़ोतरी, डिमांड प्रभाव
ONGC-3 से -6%क्रूड ऑयल उतार-चढ़ाव
SBI-7 से -10%बैंकिंग सेक्टर दबाव
कोल इंडिया-4 से -7%कोयला डिमांड में उतार-चढ़ाव

यह स्थिति बताती है कि बाजार की गिरावट में डिफेंसिव और रेगुलेटेड सेक्टर के स्टॉक्स बेहतर परफॉर्म कर सकते हैं। POWERGRID जैसे स्टॉक्स पोर्टफोलियो में स्थिरता लाते हैं, खासकर जब बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम और FII आउटफ्लो हो। हालांकि, भविष्य में भी कंपनी की ग्रोथ नए ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स पर निर्भर करेगी।

Scroll to Top