भारतीय रेलवे ट्रेन कोचों के विभिन्न रंगों का ऐतिहासिक और अर्थपूर्ण प्रदर्शन, नीला, लाल, हरा और मैरून कोच

भारतीय रेल के रंगों का इतिहास: हर रंग के पीछे छिपी है ट्रेन की अलग पहचान

भारतीय रेलवे के कोचों के अलग-अलग रंग सिर्फ सजावट नहीं हैं, बल्कि वे ट्रेन की श्रेणी, सुविधा स्तर, गति और ऐतिहासिक विकास को दर्शाते हैं। नीला रंग सामान्य आराम का प्रतीक रहा है, लाल प्रीमियम और आधुनिक LHB कोचों की पहचान, हरा संतुलित सुविधा का, जबकि मैरून पुरानी विरासत को जीवित रखता है। वंदे भारत और अमृत भारत जैसे नए ट्रेनसेट में सफेद-नारंगी-ग्रे जैसे आधुनिक रंग भारतीय रेल की प्रगति दिखाते हैं।

भारतीय रेल के रंगों का इतिहास और हर रंग का मतलब

भारतीय रेलवे की शुरुआत से ही कोचों के रंगों में बदलाव आया है, जो तकनीकी उन्नति, यात्री सुविधा और सेवा वर्गीकरण से जुड़ा रहा है। 1950 के दशक में जब इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) चेन्नई में स्थापित हुई, तब कोच मुख्य रूप से मैरून रंग में बनाए जाते थे। यह गहरा भूरा-लाल रंग भारतीय रेल की क्लासिक छवि बना, जो पारंपरिक और मजबूत कोचों का प्रतीक था। मैरून कोच ICF डिजाइन पर आधारित थे, जो लंबे समय तक भारतीय रेल की रीढ़ रहे। आज भी कुछ हेरिटेज ट्रेनों और पुराने रेक में मैरून रंग दिखता है, जो नॉस्टैल्जिया और रेलवे की शुरुआती विरासत को याद दिलाता है।

समय के साथ रेलवे ने आधुनिकीकरण किया। 1990 के अंत और 2000 के शुरुआत में नीला रंग प्रमुख हो गया। नीला मुख्य रूप से ICF कोचों के लिए इस्तेमाल हुआ, खासकर नॉन-एसी और स्टैंडर्ड सुविधा वाले कोचों में। नीला रंग सामान्य यात्रा का प्रतीक बन गया, जो किफायती और सुलभ यात्रा को दर्शाता है। यह रंग इतना आम हो गया कि आज भी अधिकांश एक्सप्रेस ट्रेनों में नीले कोच दिखते हैं, हालांकि LHB आने के बाद इसका उपयोग बदल रहा है। नीला कोच मजबूत, भारी और लंबी दूरी के लिए भरोसेमंद माने जाते हैं।

2000 के दशक में जर्मन कंपनी Linke-Hofmann-Busch (LHB) के डिजाइन पर आधारित नए कोच आए, जो सुरक्षित, हल्के और कम झटके देने वाले थे। इन LHB कोचों को लाल रंग दिया गया। लाल रंग प्रीमियम सेवा का प्रतीक बन गया। राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, दुरंतो और तेजस जैसी हाई-स्पीड, फुल एसी ट्रेनों में लाल कोच प्रमुख हैं। लाल कोच तेज गति (130-160 किमी/घंटा तक), बेहतर सस्पेंशन और लग्जरी सुविधाओं से जुड़े हैं। शुरुआत में राजधानी के लिए विशेष लाल-ग्रे लिवरी थी, लेकिन अब अधिकांश LHB स्लीपर कोच लाल और सीटिंग कोच नीले-ग्रे में हैं।

हरा रंग संतुलित सुविधा का प्रतीक है। ग़रीब रथ एक्सप्रेस जैसे ट्रेनों में हरे कोच इस्तेमाल होते हैं, जो एसी थर्ड और सेकंड क्लास के बीच का विकल्प देते हैं। हरा किफायती लेकिन आरामदायक यात्रा को दर्शाता है। कुछ स्पेशल ट्रेनों में हरा-पीला कॉम्बिनेशन भी दिखता है।

आधुनिक युग में वंदे भारत एक्सप्रेस ने रंगों में नयापन लाया। शुरुआत में सफेद-नीला-नारंगी (त्रिरंग से प्रेरित) लिवरी थी। बाद में नारंगी-ग्रे और सफेद-नारंगी स्कीम आई, जो भारतीय संस्कृति और ऊर्जा को दिखाती है। वंदे भारत सेमी-हाई स्पीड ट्रेनसेट है, जो 180 किमी/घंटा तक चलती है और रोटेटिंग सीट्स, बायो-टॉयलेट जैसी सुविधाएं देती है।

अमृत भारत एक्सप्रेस में नारंगी रंग प्रमुख है, जो नॉन-एसी लेकिन आधुनिक स्लीपर सेवा के लिए है। यह कम लागत वाली लंबी दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन की गई है।

पीला रंग स्पेशल कोचों के लिए इस्तेमाल होता है, जैसे दिव्यांगजन या मेडिकल कोच। लोकल ट्रेनों में पीली स्ट्रिप्स या हरा लेडीज कंपार्टमेंट दिखाता है।

स्ट्राइप्स का महत्व भी कम नहीं। पुराने समय में जब साक्षरता कम थी, रंगीन स्ट्राइप्स कोच की पहचान बनाती थीं। सफेद स्ट्रिप अनारक्षित, पीली दिव्यांग/महिला स्पेशल, हरी लेडीज, लाल प्रीमियम के लिए।

रंगमुख्य कोच प्रकारजुड़ी ट्रेनें/उदाहरणमतलब/विशेषता
मैरूनपुराने ICFहेरिटेज, पुरानी एक्सप्रेसक्लासिक विरासत, नॉस्टैल्जिया
नीलास्टैंडर्ड ICF/LHB सीटिंगसामान्य एक्सप्रेस, कुछ शताब्दीकिफायती, सामान्य आराम
लालLHB प्रीमियमराजधानी, शताब्दी, दुरंतो, तेजसहाई-स्पीड, लग्जरी, सुरक्षा
हराग़रीब रथ/स्पेशलग़रीब रथ, कुछ MEMUसंतुलित सुविधा, किफायती एसी
नारंगी-ग्रे/सफेदवंदे भारत, अमृत भारतवंदे भारत, अमृत भारतआधुनिक, सेमी-हाई स्पीड, सांस्कृतिक

ये रंग भारतीय रेल की यात्रा को आसान बनाते हैं। प्लेटफॉर्म पर दूर से ही यात्री समझ जाते हैं कि कौन सा कोच उनकी क्लास का है। रंग सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि इतिहास, तकनीक और यात्री अनुभव की कहानी कहते हैं।

Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। रंग योजनाएं समय-समय पर बदल सकती हैं। यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी जांचें।

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