“गूगल ने कन्फर्म किया कि क्विक शेयर और एयरड्रॉप की इंटरऑपरेबिलिटी पिक्सल 10 सीरीज से आगे बढ़कर ज्यादा एंड्रॉयड डिवाइसेज पर आएगी, जिससे यूजर्स फाइल्स, मीडिया और डॉक्यूमेंट्स को एंड्रॉयड फोन्स से iPhone, iPad या MacBook पर आसानी से ट्रांसफर कर सकेंगे; ये फीचर 2026 के अंत तक रोलआउट होने की उम्मीद है, जो क्रॉस-प्लेटफॉर्म शेयरिंग को सरल बनाएगा।”
गूगल ने हाल ही में घोषणा की कि उसका क्विक शेयर फीचर अब एप्पल के एयरड्रॉप के साथ और बेहतर तरीके से काम करेगा, जिससे एंड्रॉयड यूजर्स को iOS डिवाइसेज के साथ फाइल शेयरिंग में आसानी होगी। ये बदलाव पिक्सल 10 सीरीज से शुरू होकर अब अन्य एंड्रॉयड ब्रैंड्स जैसे सैमसंग, वनप्लस और शाओमी के फोन्स पर भी उपलब्ध होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये इंटरऑपरेबिलिटी यूजर्स को बिना थर्ड-पार्टी ऐप्स के ब्लूटूथ और वाई-फाई डायरेक्ट के जरिए फाइल्स ट्रांसफर करने की सुविधा देगी, जो स्पीड में 50 Mbps तक पहुंच सकती है।
इस फीचर की मदद से एंड्रॉयड यूजर्स iPhone यूजर्स को हाई-रेजोल्यूशन इमेजेस, वीडियोज या बड़े PDF फाइल्स भेज सकेंगे, जबकि पहले ऐसे ट्रांसफर्स के लिए ईमेल या क्लाउड स्टोरेज का सहारा लेना पड़ता था। गूगल के इंजीनियरिंग डायरेक्टर एरिक के ने बताया कि पिक्सल 10 पर टेस्टिंग के दौरान 90% से ज्यादा ट्रांसफर्स सफल रहे, जिसमें iPad और MacBook के साथ कनेक्टिविटी भी शामिल थी। ये सपोर्ट एंड्रॉयड 12 या उससे ऊपर के वर्जन पर काम करेगा, लेकिन कुछ पुराने मॉडल्स में हार्डवेयर लिमिटेशन्स के कारण परफॉर्मेंस कम हो सकती है।
क्या है क्विक शेयर और एयरड्रॉप इंटरऑपरेबिलिटी?
क्विक शेयर गूगल का नेティブ फाइल शेयरिंग टूल है, जो पहले नियरबाय शेयर के नाम से जाना जाता था। अब ये एप्पल के एयरड्रॉप के साथ कंपैटिबल हो रहा है, मतलब दोनों प्लेटफॉर्म्स के डिवाइसेज एक-दूसरे को डिटेक्ट कर सकेंगे। यूजर्स को बस डिवाइस को पास रखना होगा, और शेयरिंग ऑप्शन ऑटोमैटिकली पॉप-अप होगा। सिक्योरिटी के लिहाज से, हर ट्रांसफर के लिए कन्फर्मेशन की जरूरत पड़ेगी, और एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन यूज होगा ताकि डेटा लीक का रिस्क कम हो। भारत में जहां 70% से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स एंड्रॉयड पर हैं, ये फीचर ऑफिस वर्कर्स और स्टूडेंट्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, खासकर मीटिंग्स या ग्रुप प्रोजेक्ट्स में।
कब और कैसे मिलेगा ये फीचर?
रिपोर्ट्स इंडिकेट करती हैं कि ये एक्सपैंशन 2026 के थर्ड क्वार्टर में शुरू होगा, पहले बीटा टेस्टिंग के साथ। गूगल प्ले सर्विसेज अपडेट के जरिए ये रोलआउट होगा, जिससे यूजर्स को नया OS इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शुरुआत में पिक्सल 9 और 9 प्रो जैसे मॉडल्स को प्राथमिकता मिलेगी, उसके बाद सैमसंग गैलेक्सी S23 सीरीज और ऊपर के फोन्स शामिल होंगे। भारत में जहां 5G नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, ये फीचर वाई-फाई 6 सपोर्ट वाले डिवाइसेज पर बेहतर परफॉर्म करेगा, जहां ट्रांसफर स्पीड 100 Mbps तक जा सकती है।
फायदे और चुनौतियां
| डिवाइस कैटेगरी | सपोर्टेड मॉडल्स (उदाहरण) | अपेक्षित रोलआउट टाइमलाइन | न्यूनतम रिक्वायरमेंट्स |
|---|---|---|---|
| Google Pixel | Pixel 9, Pixel 10 सीरीज | Q3 2026 | Android 12+ |
| Samsung Galaxy | S23, S24, Fold 5 | Q4 2026 | One UI 5.1+ |
| OnePlus | OnePlus 11, Nord 3 | Q4 2026 | OxygenOS 13+ |
| Xiaomi/Redmi | Mi 14, Redmi Note 13 | 2027 की शुरुआत | MIUI 14+ |
| Other Brands | Vivo X90, Oppo Reno 10 | डिपेंडेंट ऑन OEM अपडेट | Android 13+ |
एंड्रॉयड से iPhone शेयरिंग के साथ यूजर्स को मल्टीपल डिवाइसेज के बीच स्विच करने में आसानी होगी, जैसे फैमिली में जहां कुछ मेंबर्स iOS यूज करते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ग्लोबल स्तर पर ऐसे ट्रांसफर्स की डिमांड 40% बढ़ी है, खासकर हाइब्रिड वर्क एनवायरनमेंट में। भारत में UPI और डिजिटल पेमेंट्स की तरह, ये फीचर डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करेगा, जहां यूजर्स कॉन्टैक्टलेस शेयरिंग से कोविड-एरा हैबिट्स को जारी रख सकेंगे।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। पुराने एंड्रॉयड फोन्स में ब्लूटूथ 5.0 की कमी से कनेक्टिविटी इश्यूज हो सकते हैं, और iOS 18 या ऊपर की जरूरत पड़ेगी एप्पल साइड से। प्राइवेसी कॉन्सर्न्स को देखते हुए, गूगल ने पुष्टि की कि कोई डेटा क्लाउड पर स्टोर नहीं होगा, बल्कि डायरेक्ट पीयर-टू-पीयर होगा। यूजर्स को सेटिंग्स में “Visibility” ऑप्शन को “Everyone” पर सेट करना होगा, लेकिन सिक्योरिटी के लिए टेम्पररी शेयरिंग मोड भी उपलब्ध होगा।
टेक्निकल डिटेल्स और यूजर गाइड
क्विक शेयर को एक्टिवेट करने के लिए, यूजर्स को सेटिंग्स > कनेक्टेड डिवाइसेज > क्विक शेयर में जाना होगा। यहां से iOS डिवाइसेज को सर्च किया जा सकेगा, और ट्रांसफर के दौरान फाइल साइज लिमिट 5GB तक होगी। टेस्टिंग डेटा से पता चलता है कि 1GB वीडियो ट्रांसफर में औसतन 30 सेकंड्स लगते हैं, जो ईमेल से 5 गुना तेज है। भारत में जहां मोबाइल डेटा महंगा है, ये ऑफलाइन शेयरिंग यूजर्स को डेटा बचाने में मदद करेगी।
अगर यूजर मल्टीपल फाइल्स शेयर कर रहा है, तो बैच ट्रांसफर सपोर्ट मिलेगा, जहां प्रोग्रेस बार रीयल-टाइम अपडेट देगा। एरर हैंडलिंग के लिए, अगर कनेक्शन ब्रेक होता है, तो रिज्यूम ऑप्शन उपलब्ध होगा, जो 80% मामलों में काम करता है। गूगल ने ये भी हाइलाइट किया कि ये फीचर क्रॉस-बॉर्डर शेयरिंग को सपोर्ट करेगा, मतलब इंडियन यूजर्स विदेशी iPhone यूजर्स से भी कनेक्ट हो सकेंगे बिना VPN के।
भविष्य की संभावनाएं
ये इंटरऑपरेबिलिटी आगे चलकर लाइव लोकेशन शेयरिंग या ग्रुप शेयरिंग को भी शामिल कर सकती है, जैसा कि गूगल के रोडमैप में इंडिकेट किया गया है। भारत के टेक मार्केट में जहां एंड्रॉयड का शेयर 95% है, ये फीचर एप्पल के मार्केट एक्सपैंशन को चैलेंज कर सकता है, क्योंकि अब यूजर्स को इकोसिस्टम लॉक-इन की जरूरत कम पड़ेगी। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 2026 में ऐसे फीचर्स से ग्लोबल फाइल शेयरिंग वॉल्यूम 25% बढ़ सकता है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों से संकलित जानकारी पर आधारित है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक अपडेट्स की जांच करें।


