दिल्ली सरकार ने EV Policy 2.0 के तहत पुरानी BS-IV या उससे अधिक पुरानी दिल्ली-रजिस्टर्ड गाड़ियों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर जमा कराने पर नई इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले खरीदारों को आकर्षक इंसेंटिव देने का प्लान तैयार किया है। प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार पर 1 लाख रुपये तक का कैश इंसेंटिव, दोपहिया पर 10 हजार और तिपहिया पर 25 हजार तक मिलेगा, साथ ही रोड टैक्स में छूट और बैटरी रिसाइक्लिंग फ्रेमवर्क जैसी नई सुविधाएं शामिल हैं। यह नीति प्रदूषण कम करने और EV अपनाने को बढ़ावा देने के लिए लाई जा रही है, जो जल्द ही लागू होने वाली है।
दिल्ली EV Policy 2.0: पुरानी गाड़ी कबाड़ में देकर पाएं 1 लाख तक का फायदा
दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण और हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नई Electric Vehicle Policy 2.0 (EV Policy 2.0) तैयार कर रही है। इस नीति का मुख्य फोकस पुरानी प्रदूषणकारी गाड़ियों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देना है। हालिया अपडेट्स के अनुसार, BS-IV या उससे पुरानी दिल्ली में रजिस्टर्ड गाड़ियों को अधिकृत स्क्रैपिंग फैसिलिटी पर जमा करने पर खरीदारों को सीधे बैंक अकाउंट में इंसेंटिव मिलेगा, बशर्ते वे छह महीने के अंदर नई EV खरीदें।
प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर अधिकतम 1 लाख रुपये का इंसेंटिव उपलब्ध होगा। यह लाभ पहले कुछ लाख रजिस्ट्रेशन तक सीमित रह सकता है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन (जैसे स्कूटर और बाइक) के लिए पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर 10 हजार रुपये का फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक तीनपहिया (L5M कैटेगरी जैसे ई-ऑटो) पर 25 हजार रुपये तक का इंसेंटिव प्रस्तावित है।
नीति में रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से 100% छूट का प्रावधान भी है, खासकर 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली EV और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों के लिए। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन और रेसिडेंशियल चार्जिंग को बढ़ावा देने के लिए अलग से फंडिंग प्लान है।
एक महत्वपूर्ण बदलाव बैटरी रिसाइक्लिंग फ्रेमवर्क है। दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी (DPCC) इसकी नोडल एजेंसी होगी। EV बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट के लिए मैन्युफैक्चरर्स को जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि रेयर अर्थ मटेरियल रिकवर हो सकें और पर्यावरण सुरक्षित रहे।
नीति में पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को रेट्रोफिट (कन्वर्ट) करने का विकल्प भी है। पहले 1,000 वाहनों के लिए 50 हजार रुपये का इंसेंटिव प्रस्तावित है, जिससे स्क्रैपिंग के बजाय मौजूदा गाड़ी को EV में बदला जा सके। यह उन मालिकों के लिए फायदेमंद है जिनकी कारें 10-15 साल पुरानी हैं और दिल्ली में चलाने पर प्रतिबंध है।
EV अपनाने के लिए साल-दर-साल इंसेंटिव स्ट्रक्चर भी बदलेगा। उदाहरण के लिए, दोपहिया EV पर पहले साल 10 हजार रुपये प्रति kWh (अधिकतम 30 हजार तक), दूसरे साल कम और तीसरे साल और कम। इसी तरह ई-ऑटो पर पहले साल 50 हजार, दूसरे में 40 हजार और तीसरे में 30 हजार तक। महिलाओं और ट्रांसजेंडर खरीदारों के लिए अतिरिक्त सब्सिडी जैसे 30 हजार तक का फायदा भी चर्चा में है।
नीति का लक्ष्य 2030 तक दिल्ली में EV अपनाने को तेज करना है। सार्वजनिक बस फ्लीट को पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने का प्लान है, जिसमें 2026 तक 6,000, 2027 तक 7,500 और 2028 तक 10,400 ई-बसें शामिल हैं। स्कूल बसों में भी 30% इलेक्ट्रिक करने का टारगेट है।
मुख्य इंसेंटिव की तालिका
| वाहन प्रकार | स्क्रैपिंग इंसेंटिव (पुरानी गाड़ी पर) | अन्य लाभ (सब्सिडी/छूट) |
|---|---|---|
| प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार | 1 लाख रुपये तक | रोड टैक्स-रजिस्ट्रेशन फीस 100% छूट |
| इलेक्ट्रिक दोपहिया | 10 हजार रुपये | 10 हजार/kWh (कैप 30 हजार पहले साल) |
| इलेक्ट्रिक तीनपहिया | 25 हजार रुपये | 50 हजार पहले साल (कैटेगरी अनुसार) |
| रेट्रोफिटिंग (पुरानी कार को EV में बदलना) | 50 हजार रुपये (पहले 1,000 वाहन) | – |
यह नीति केंद्र की PM E-Drive स्कीम से जुड़ेगी, जिससे कुल सब्सिडी बढ़ सकती है। दिल्ली में EV चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने, बैटरी स्वैपिंग और R&D के लिए अलग फंड भी प्रस्तावित है।
पुरानी गाड़ी मालिकों के लिए यह सुनहरा मौका है कि वे प्रदूषण कम करें और आर्थिक फायदा उठाएं। नीति जल्द कैबिनेट से मंजूरी के बाद लागू होगी।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स और सरकारी घोषणाओं पर आधारित है। विस्तृत नियमों के लिए आधिकारिक दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग की वेबसाइट चेक करें।


