अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच दुबई से अरबपति धन निकालते हुए, सुरक्षित देशों की ओर जाते हुए

अमेरिका-ईरान युद्ध के डर से गल्फ अरबपति खजाना समेटकर भाग रहे, इस ‘सुरक्षित देश’ में पहुंचा रहे अरबों डॉलर

“अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच गल्फ देशों की ‘सुरक्षित ठिकाना’ वाली छवि धूमिल हो गई है। दुबई में बसे एशियाई और अरब अरबपति अब अपने धन को सिंगापुर, हांगकांग और स्विट्जरलैंड जैसे स्थानों पर तेजी से स्थानांतरित कर रहे हैं, जहां हाल के हफ्तों में संपत्ति स्थानांतरण के अनुरोधों में भारी उछाल आया है। ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे अमीर वर्ग जोखिम कम करने के लिए त्वरित कदम उठा रहा है।”

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच गल्फ अरबपति खजाना समेटकर भाग रहे, इस ‘सुरक्षित देश’ में पहुंचा रहे अरबों डॉलर

अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों के जवाब में ईरान की ओर से गल्फ देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ने के बाद क्षेत्र में अरबपतियों और उच्च-नेट-वर्थ व्यक्तियों (HNWI) में घबराहट फैल गई है। दुबई, जो पिछले दशक में वैश्विक अमीरों का प्रमुख ठिकाना बन चुका था, अब अपनी ‘सुरक्षित हेवन’ वाली छवि खोता दिख रहा है। कई अरबपति और परिवारिक कार्यालय (फैमिली ऑफिस) अब अपने निवेश और तरल संपत्ति को तेजी से बाहर निकाल रहे हैं।

सिंगापुर और हांगकांग जैसे एशियाई वित्तीय केंद्रों में स्थानांतरण के अनुरोध बढ़े हैं। सिंगापुर स्थित एक प्राइवेट वेल्थ लॉयर के अनुसार, उनके दुबई-आधारित 20 क्लाइंट्स में से 6-7 ने संपत्ति स्थानांतरण की योजना बनाई है, जिनमें से प्रत्येक के पास औसतन 50 मिलियन डॉलर की संपत्ति है। तीन क्लाइंट्स ने तत्काल ट्रांसफर की मांग की है, जिसमें कुछ ने पूछा है कि “सब कुछ कितनी जल्दी सिंगापुर पहुंचाया जा सकता है”। भारतीय उद्यमियों सहित कई एशियाई अमीरों ने दुबई बैंक खातों से 100,000 डॉलर से अधिक राशि सिंगापुर भेजी है, जो दूसरे एमिरेट्स-आधारित बैंक के जरिए पूरा हुआ।

स्विट्जरलैंड भी इस संकट से फायदा उठा रहा है। स्विस वेल्थ मैनेजर्स को गल्फ से संपत्ति आने की उम्मीद बढ़ गई है। 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक संपत्ति संभालने वाले दर्जन भर से ज्यादा बैंकरों और सलाहकारों ने बताया कि ईरानी हमलों के बाद मिडिल ईस्ट से धन स्विट्जरलैंड की ओर मुड़ रहा है। स्विट्जरलैंड की सुरक्षित और तटस्थ छवि यहां प्रमुख कारक है।

दुबई में रहने वाले अमीरों की संख्या में पहले से ही गिरावट के संकेत मिल रहे थे, लेकिन युद्ध ने इसे तेज कर दिया। हेनले एंड पार्टनर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई में 237 सेंटीमिलियनेयर्स (100 मिलियन डॉलर से अधिक) और कम से कम 20 अरबपति हैं, लेकिन अब कई रियल एस्टेट डील होल्ड पर हैं और एक्सपैट्स पलायन की योजना बना रहे हैं। दुबई फाइनेंशियल मार्केट इंडेक्स में 4.7% की तेज गिरावट दर्ज हुई, जो दो साल में सबसे बड़ी है।

गल्फ देशों के संप्रभु धन कोष (सॉवरेन वेल्थ फंड्स) भी प्रभावित हैं। तीन गल्फ देश (सऊदी अरब, यूएई और कुवैत सहित) अपने ट्रिलियंस डॉलर के निवेश की समीक्षा कर रहे हैं ताकि युद्ध से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। इसमें ग्लोबल निवेश वादों को रिवर्स करना, डिवेस्टमेंट और स्पॉन्सरशिप डील्स की दोबारा जांच शामिल है। हालांकि यूएई ने कहा है कि उसके निवेश योजनाओं में कोई बदलाव नहीं है और वह आर्थिक दबाव झेलने के लिए तैयार है।

प्रमुख सुरक्षित गंतव्य जहां धन जा रहा है

सिंगापुर : सबसे तेज स्थानांतरण, एशियाई अमीरों के लिए पहली पसंद। परिवारिक कार्यालयों से 10-20 पूछताछ बढ़ी।

हांगकांग : क्षेत्रीय हब के रूप में वापसी, टैक्स और स्थिरता के कारण।

स्विट्जरलैंड : पारंपरिक सुरक्षित हेवन, गल्फ से अपेक्षित बढ़ोतरी।

युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन बाधित होने से गल्फ अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। पर्यटन, एविएशन और फाइनेंस सेक्टर प्रभावित हैं, जिससे अमीर वर्ग जोखिम कम करने के लिए तरल संपत्ति को प्राथमिकता दे रहा है। कई अब दुबई को छोड़कर ओमान या सऊदी अरब के रास्ते निकल रहे हैं, जबकि प्राइवेट जेट किराए में भारी उछाल आया है।

यह संकट गल्फ की अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय तक चुनौती बन सकता है, क्योंकि एक्सपैट्स और निवेशकों का पलायन स्थानीय बाजारों को कमजोर कर रहा है।

Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और वर्तमान घटनाक्रम पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

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