“वर्तमान में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट जारी है, जहां सेंसेक्स 76,000 के स्तर के आसपास और निफ्टी 23,700 के नीचे ट्रेड कर रहा है। ऐसे समय में SIP रोकना सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है, क्योंकि रुपी कॉस्ट एवरेजिंग के जरिए कम NAV पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो बाजार रिकवरी पर भारी रिटर्न देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गिरते बाजार में SIP जारी रखना या शुरू करना ही लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन का सबसे मजबूत फॉर्मूला है।”
भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ दिनों से भारी दबाव में है। सेंसेक्स 76,400 के आसपास और निफ्टी 23,700 के नीचे पहुंच गया है, जिसमें पिछले सत्र से 0.5-1% की गिरावट देखी गई। पिछले एक महीने में सेंसेक्स में 7% से ज्यादा की गिरावट आई है, जबकि पिछले साल की तुलना में अभी भी मामूली बढ़त बनी हुई है। यह गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल तनाव, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और FII की बिकवाली से जुड़ी है। ऐसे में कई निवेशक SIP रोकने या नए SIP शुरू न करने की सोच रहे हैं। लेकिन डेटा और इतिहास बताते हैं कि यह फैसला महंगा पड़ सकता है।
रुपी कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee Cost Averaging) SIP का सबसे बड़ा फायदा है। फिक्स्ड अमाउंट हर महीने निवेश करने से बाजार गिरने पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और ऊपर जाने पर कम। इससे औसत खरीद मूल्य कम रहता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई निवेशक ₹10,000 मासिक SIP कर रहा है:
बाजार हाई पर NAV ₹100 → 100 यूनिट्स मिलती हैं।
बाजार गिरकर NAV ₹80 पर → 125 यूनिट्स मिलती हैं।
औसत लागत कम हो जाती है, रिकवरी पर ज्यादा फायदा।
हाल के महीनों में SIP इन्फ्लो ₹30,000 करोड़ से ऊपर बने हुए हैं, जो दिखाता है कि ज्यादातर निवेशक अनुशासित रहकर जारी रख रहे हैं। बाजार में 15% तक करेक्शन के बाद भी SIP कैंसल करने वाले निवेशकों को बाद में नुकसान होता है, क्योंकि वे कम कीमत पर खरीदने का मौका गंवा देते हैं।
गिरते बाजार में SIP के फायदे
कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स : वोलेटाइल मार्केट में SIP सबसे प्रभावी। गिरावट में यूनिट्स बढ़ती हैं, जो रिकवरी फेज में कंपाउंडिंग से तेज ग्रोथ देती हैं।
इमोशनल कंट्रोल : SIP ऑटोमैटिक है, इसलिए बाजार देखकर पैनिक सेलिंग या रोकने की जरूरत नहीं पड़ती।
लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग : 5-10 साल के होराइजन पर SIP ने ऐतिहासिक रूप से 12-18% CAGR दिए हैं, भले ही बीच में गिरावट आई हो।
डायवर्सिफिकेशन : इक्विटी, हाइब्रिड या मल्टीकैप फंड्स में SIP से रिस्क फैलता है। लार्जकैप फंड्स में स्थिरता, मिडकैप में ग्रोथ पोटेंशियल।
SIP जारी रखें या रोकें? विशेषज्ञों की राय
गिरावट में SIP रोकना मतलब कम कीमत पर खरीदने का अवसर छोड़ना।
अगर फाइनेंशियल गोल लॉन्ग-टर्म (5+ साल) है, तो SIP जारी रखें या बढ़ाएं (स्टेप-अप SIP)।
रिस्क टॉलरेंस कम है तो हाइब्रिड या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स चुनें।
SIP कैंसल करने वाले अक्सर मार्केट बॉटम पर वापस आते हैं, जो महंगा साबित होता है।
2026 में SIP के लिए बेस्ट स्ट्रैटेजी
| पैरामीटर | सलाह |
|---|---|
| SIP अमाउंट | ₹5,000 से शुरू, स्टेप-अप 10-20% सालाना |
| फंड कैटेगरी | 40% लार्जकैप, 30% फ्लेक्सीकैप/मल्टीकैप, 30% हाइब्रिड |
| होराइजन | कम से कम 7-10 साल |
| रिव्यू | साल में एक बार, गोल चेंज पर एडजस्ट |
| बढ़त का तरीका | स्टेप-अप SIP या वैल्यू एवरेजिंग (मार्केट गिरने पर ज्यादा निवेश) |
वेल्थ क्रिएशन का असली फॉर्मूला अनुशासन, निरंतरता और रुपी कॉस्ट एवरेजिंग है। गिरते बाजार को डर के बजाय अवसर मानें। SIP जारी रखने से औसत रिटर्न बढ़ता है और वोलेटिलिटी का असर कम होता है। अगर आप नए हैं, तो आज ही छोटी रकम से SIP शुरू करें—यह गिरावट का सबसे अच्छा जवाब है।


