हाईवे पर कार चलाते हुए सुरक्षित ड्राइविंग करते ड्राइवर, लेन में रहते हुए स्पीड कंट्रोल

हाईवे पर सुरक्षित ड्राइविंग: एक्सीडेंट से बचने के लिए अपनाएं ये 5 जरूरी टिप्स

भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें करीब 1.80 लाख लोगों की जान जाती है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली मौतों का बड़ा हिस्सा ओवरस्पीडिंग, थकान और लापरवाही से होता है। हाईवे पर सही तरीके से गाड़ी चलाकर आप न सिर्फ खुद को बल्कि परिवार और अन्य यात्रियों को भी बचा सकते हैं। यहां 5 प्रमुख टिप्स दिए गए हैं जो एक्सीडेंट के जोखिम को काफी कम कर देते हैं।

हाईवे पर गाड़ी चलाने का सही तरीका और एक्सीडेंट से बचाव के टिप्स

भारत के हाईवे तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन साथ ही दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग केवल 2% सड़कों का हिस्सा हैं, लेकिन इन पर कुल मौतों का 30-35% हिस्सा होता है। ओवरस्पीडिंग अकेले 60-70% मौतों का कारण बनती है, जबकि थकान, मोबाइल फोन का इस्तेमाल और गलत लेन चेंज जैसे कारक भी प्रमुख हैं। हाईवे पर ड्राइविंग शहर की तुलना में अलग होती है क्योंकि यहां स्पीड ज्यादा, दूरी लंबी और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया का समय कम होता है।

टिप 1: हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखें – 3 सेकंड का नियम अपनाएं हाईवे पर सबसे आम एक्सीडेंट रियर-एंड कोलिजन होते हैं। आगे वाली गाड़ी से कम से कम 3 सेकंड की दूरी रखें। इसे जांचने का आसान तरीका: जब आगे वाली गाड़ी किसी फिक्स्ड पॉइंट (जैसे पोल या साइन) से गुजरे, तब गिनती शुरू करें – एक-एक हजार, दो-दो हजार, तीन-तीन हजार। अगर आप तीन सेकंड से पहले उसी पॉइंट पर पहुंच गए, तो दूरी कम है। बारिश, कोहरे या रात में इस दूरी को 5-6 सेकंड तक बढ़ाएं। इससे अचानक ब्रेक लगने पर भी रिएक्शन टाइम मिलता है और टक्कर से बचा जा सकता है।

टिप 2: स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन करें और कंसिस्टेंट स्पीड बनाए रखें एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट 100-120 किमी/घंटा हो सकती है, लेकिन हमेशा मौसम, ट्रैफिक और रोड कंडीशन के हिसाब से स्पीड कम रखें। ओवरस्पीडिंग से रिएक्शन टाइम घटता है और ब्रेकिंग डिस्टेंस बढ़ता है। उदाहरण के तौर पर, 100 किमी/घंटा की स्पीड पर ब्रेक लगाने में 70-80 मीटर की दूरी लग सकती है। कंसिस्टेंट स्पीड रखने से फ्यूल बचता है और ट्रैफिक फ्लो सुचारू रहता है। अचानक एक्सेलरेट या ब्रेक न करें, इससे पीछे वाली गाड़ियां प्रभावित होती हैं।

टिप 3: लेन डिसिप्लिन फॉलो करें और ओवरटेकिंग सावधानी से करें हाईवे पर बाएं लेन में रहें, दाएं लेन सिर्फ ओवरटेकिंग के लिए इस्तेमाल करें। ओवरटेकिंग से पहले हमेशा रियरव्यू और साइड मिरर चेक करें, इंडिकेटर दें और ब्लाइंड स्पॉट की जांच करें। ओवरटेकिंग के बाद जल्दी से लेन में वापस आएं। गलत साइड ड्राइविंग या बार-बार लेन चेंज सबसे खतरनाक है। ट्रक या बस को ओवरटेक करते समय उनकी स्पीड और ब्लाइंड स्पॉट का ध्यान रखें।

टिप 4: थकान से बचें – हर 2 घंटे में ब्रेक लें लंबी ड्राइव में थकान सबसे बड़ा दुश्मन है। हर 2 घंटे या 150-200 किमी के बाद ब्रेक लें। ब्रेक में स्ट्रेचिंग करें, पानी पिएं और हल्का नाश्ता लें। रात में ड्राइविंग से बचें, खासकर 2-6 बजे के बीच जब नींद सबसे ज्यादा आती है। अगर नींद आ रही हो तो तुरंत सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोकें। कैफीन या म्यूजिक से थकान दूर नहीं होती, सिर्फ अस्थायी राहत मिलती है।

टिप 5: डिस्ट्रैक्शन से पूरी तरह दूर रहें और व्हीकल चेक जरूरी ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन बिल्कुल न छुएं – न कॉल, न मैसेज, न नेविगेशन। हैंड्स-फ्री भी डिस्ट्रैक्शन बढ़ाता है। सीटबेल्ट हमेशा पहनें, सभी पैसेंजर्स के लिए भी। ट्रिप से पहले व्हीकल चेक करें – टायर प्रेशर, ब्रेक, लाइट्स, फ्यूल और इमरजेंसी किट। फॉग में फॉग लाइट्स इस्तेमाल करें और हैजर्ड लाइट्स ऑन रखें अगर गाड़ी रोकनी पड़े।

ये टिप्स अपनाकर आप हाईवे पर यात्रा को सुरक्षित बना सकते हैं। याद रखें, स्पीड और लापरवाही से ज्यादा महत्वपूर्ण आपकी और परिवार की जान है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जागरूकता और सड़क सुरक्षा के लिए है। हर स्थिति में स्थानीय ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग को प्राथमिकता दें।

Scroll to Top