हरियाणा सरकार के खातों से IDFC First Bank की चंडीगढ़ ब्रांच में लगभग 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार के साथ मिलकर फर्जी चेक और अनधिकृत ट्रांसफर के जरिए सरकारी फंड्स को स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला की कंपनी स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर किया। चारों आरोपी गिरफ्तार, बैंक ने 583 करोड़ रुपये ब्याज समेत वापस जमा कर दिए। जांच में सामने आया कि यह साजिश महीनों से चल रही थी।
IDFC First Bank घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी: कैसे उड़े 590 करोड़
IDFC First Bank की सेक्टर 32, चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और बोर्ड-कॉर्पोरेशनों के फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य खातों में जमा राशि से भारी अनियमितता सामने आई। कुल मिलाकर लगभग 590 करोड़ रुपये की राशि गायब होने का मामला दर्ज हुआ, जो बैंक के तीसरी तिमाही के शुद्ध लाभ 503 करोड़ रुपये से भी अधिक है।
यह घोटाला साइबर अटैक या हैकिंग से नहीं जुड़ा, बल्कि पूरी तरह आंतरिक साजिश और मैनुअल प्रक्रियाओं के दुरुपयोग पर आधारित था। मुख्य आरोपी रिभव ऋषि, जो ब्रांच के पूर्व हेड थे, ने अभय कुमार (पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर) के साथ मिलकर योजना बनाई। अभय की पत्नी स्वाति सिंगला कंपनी स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स में 75% हिस्सेदार हैं, जबकि उनके भाई अभिषेक सिंगला के पास 25% हिस्सा है।
घोटाले का तरीका क्या था?
आरोपी फर्जी और अनधिकृत चेक जारी करते थे।
डिजिटल सिस्टम की बजाय मैनुअल डेबिट ट्रांजेक्शन का सहारा लिया गया।
हरियाणा सरकार के खातों से राशि सीधे स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के खाते में ट्रांसफर की गई।
शुरुआत में छोटी रकम (लगभग 50 करोड़) ट्रांसफर की गई, फिर धीरे-धीरे राशि बढ़ाई गई।
पॉजिटिव पे सिस्टम, मेकर-चेकर नियम और अलर्ट सिस्टम को बायपास किया गया।
जांच में पाया गया कि कुछ ट्रांसफर में 100 करोड़ तक की राशि एक कंपनी से जुड़ी मिली।
हरियाणा सरकार को इसकी भनक कई महीने पहले लग चुकी थी। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्राइवेट बैंकों में खातों के संचालन पर अलर्ट जारी किया था। 23 फरवरी को औपचारिक शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच शुरू की।
गिरफ्तारियां और रिकवरी की स्थिति
हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने चार लोगों को गिरफ्तार किया:
रिभव ऋषि (पूर्व ब्रांच मैनेजर, पंचकूला निवासी)
अभय कुमार (पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर, मोहाली-खरड़ निवासी)
स्वाति सिंगला (अभय की पत्नी, कंपनी की 75% मालिक)
अभिषेक सिंगला (स्वाति के भाई, कंपनी के 25% मालिक)
बैंक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों के खातों में मूल राशि के साथ ब्याज मिलाकर कुल 583 करोड़ रुपये जमा कर दिए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बताया कि 24 घंटे के भीतर पूरी राशि रिकवर हो गई। बैंक ने KPMG को फॉरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त किया है।
बैंक पर क्या असर पड़ा?
घोटाले की खबर आने के बाद IDFC First Bank के शेयरों में 20% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे मार्केट कैप में भारी नुकसान हुआ। बैंक ने स्पष्ट किया कि यह घटना केवल एक ब्रांच तक सीमित है और ग्राहकों के फंड्स पर कोई असर नहीं पड़ा। हालांकि, यह घटना प्राइवेट बैंकों में गवर्नेंस, इंटरनल कंट्रोल और सरकारी खातों की मॉनिटरिंग की कमजोरियों को उजागर करती है।
जांच में आगे क्या?
ACB की जांच जारी है। कुछ सरकारी अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। विपक्ष ने CBI जांच की मांग की है। बैंक ने हरियाणा सरकार के साथ सहयोग का वादा किया है। यह मामला भारतीय बैंकिंग सिस्टम में इंसाइडर फ्रॉड के खतरे को फिर से सामने लाता है, खासकर सरकारी फंड्स वाले खातों में।


