सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं की ऑन-स्क्रीन जांच प्रक्रिया, डिजिटल स्क्रीन पर मूल्यांकन

सीबीएसई बोर्ड: 12वीं की 1 करोड़ कॉपियां अब ऑन-स्क्रीन जांचेंगी, 7 चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया – छात्रों के लिए बड़ा बदलाव!

“सीबीएसई ने 2026 बोर्ड परीक्षाओं से कक्षा 12 की लगभग 1 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से करने का फैसला किया है। परीक्षा केंद्रों पर ही 32 करोड़ पन्नों को स्कैन कर अपलोड किया जाएगा, जिससे मूल्यांकन तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनेगा। कक्षा 10 की कॉपियां पुराने तरीके से ही जांचेंगी। यह बदलाव छात्रों को जल्दी रिजल्ट और कम गलतियों का लाभ देगा।”

सीबीएसई बोर्ड: 12वीं की 1 करोड़ कॉपियां अब ऑन-स्क्रीन जांचेंगी, 7 चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में क्रांतिकारी बदलाव लागू किया है। 2026 सत्र से On-Screen Marking (OSM) सिस्टम के तहत लगभग 17 लाख से अधिक छात्रों की करीब 1 करोड़ उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल तरीके से जांचेंगी। इस प्रक्रिया में कुल 32 करोड़ पन्नों को स्कैन और अपलोड किया जाएगा। परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक चलेंगी, और मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल होगा, जबकि कक्षा 10 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पारंपरिक तरीके से जारी रहेगा।

यह फैसला CBSE द्वारा 9 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के बाद आया है, जिसका उद्देश्य मूल्यांकन की सटीकता, गति और पारदर्शिता बढ़ाना है। OSM से कुलिंग एरर खत्म हो जाएंगे, मैनुअल हस्तक्षेप कम होगा और शिक्षकों की व्यापक भागीदारी संभव बनेगी, जिसमें विदेशों में स्थित संबद्ध स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हो सकेंगे।

ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया के 7 प्रमुख चरण

परीक्षा केंद्र पर उत्तर लेखन : छात्र परीक्षा केंद्र पर सामान्य रूप से उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखेंगे। कोई बदलाव नहीं, पेन-पेपर मोड ही रहेगा।

स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन : परीक्षा समाप्त होते ही केंद्र पर ही प्रत्येक उत्तर पुस्तिका के सभी पन्नों को उच्च गुणवत्ता वाले स्कैनर से स्कैन किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि हर पेज क्लियर और पढ़ने योग्य हो।

अपलोड और सर्वर पर स्टोरेज : स्कैन किए गए पन्नों को सुरक्षित तरीके से CBSE के डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। लगभग 32 करोड़ पन्नों का यह डेटा क्लाउड-बेस्ड सिस्टम में संग्रहीत होगा।

एग्जामिनर असाइनमेंट : CBSE द्वारा प्रशिक्षित एग्जामिनर, असोसिएट हेड एग्जामिनर और हेड एग्जामिनर को उनके यूनिक आईडी से लॉगिन करवाया जाएगा। प्रत्येक एग्जामिनर को विशिष्ट विषय और सेक्शन असाइन किए जाएंगे।

डिजिटल मूल्यांकन : एग्जामिनर कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तर देखेंगे। डिजिटल टूल्स से मार्किंग, एनोटेशन, हाइलाइटिंग और पेज नेविगेशन करेंगे। मार्किंग सख्ती से आंसर की और स्कीम के अनुसार होगी, जिससे व्यक्तिगत पूर्वाग्रह कम होगा।

क्वालिटी चेक और मॉडरेशन : हेड एग्जामिनर द्वारा रैंडम सैंपल चेक किए जाएंगे। यदि कोई असंगति मिलेगी तो री-एग्जामिनेशन या एडजस्टमेंट किया जाएगा। ऑटोमेटेड सिस्टम कुल मार्क्स की गणना करेगा।

मार्क्स ट्रांसफर और रिजल्ट इंटीग्रेशन : मूल्यांकन पूरा होते ही मार्क्स सीधे CBSE के रिजल्ट डेटाबेस में ट्रांसफर हो जाएंगे। कोई मैनुअल एंट्री या ट्रांसफर नहीं होगा, जिससे पोस्ट-रिजल्ट वेरिफिकेशन की जरूरत कम हो जाएगी।

छात्रों के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

लिखावट साफ और स्पेसिंग उचित रखें, क्योंकि स्क्रीन पर छोटी या अस्पष्ट लिखावट पढ़ने में कठिनाई हो सकती है।

डायग्राम, चार्ट और टेबल साफ-सुथरे बनाएं, क्योंकि डिजिटल व्यू में ये बेहतर दिखेंगे।

पेज नंबरिंग और सेक्शन स्पष्ट करें, ताकि स्कैनिंग के दौरान कोई पेज मिस न हो।

OSM से रिजल्ट तेज आएगा और कुलिंग एरर की संभावना शून्य हो जाएगी, लेकिन छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

लाभ और चुनौतियां

OSM से परिवहन लागत और समय में भारी बचत होगी। शिक्षक अपने स्कूल से ही मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे उनका नियमित काम प्रभावित नहीं होगा। सिस्टम पर्यावरण-अनुकूल भी है, क्योंकि कागज की फिजिकल हैंडलिंग कम होगी। हालांकि, स्कूलों को इंटरनेट, बिजली बैकअप और स्कैनिंग उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। CBSE ने सभी स्टेकहोल्डर्स को अलग-अलग चरणों के लिए विस्तृत निर्देश जारी करने की बात कही है।

यह बदलाव CBSE की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है, जो बोर्ड परीक्षाओं को अधिक आधुनिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Disclaimer: यह खबर विभिन्न विश्वसनीय रिपोर्ट्स और आधिकारिक अधिसूचनाओं पर आधारित है। इसमें कोई सलाह या व्यक्तिगत राय शामिल नहीं है।

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