“आरबीआई ने छोटे मूल्य की डिजिटल फ्रॉड में ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें OTP गलती से शेयर करने पर भी पात्रता शामिल है यदि कोई दुर्भावना न हो; यह एक बार का लाभ है जहां ग्राहक को 15% नुकसान खुद वहन करना होगा, और उच्च मूल्य के मामलों में कैप लागू रहेगा, जबकि रिपोर्टिंग समयसीमा का पालन जरूरी है।”
आरबीआई साइबर फ्रॉड नियम: OTP शेयर करने पर ₹25,000 मुआवजा
आरबीआई ने डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक नई फ्रेमवर्क का ऐलान किया है, जिसमें छोटे मूल्य की अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन में प्रभावित ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकता है। यह प्रस्ताव विशेष रूप से उन मामलों पर फोकस करता है जहां फ्रॉड छोटी राशि का हो और ग्राहक की ओर से कोई जानबूझकर गलती न पाई जाए। मुआवजे की राशि फ्रॉड अमाउंट के 85% या ₹25,000 में से जो भी कम हो, उसी के आधार पर तय होगी। उदाहरण के लिए, यदि फ्रॉड ₹20,000 का है, तो मुआवजा ₹17,000 (85%) तक सीमित रहेगा, लेकिन ग्राहक को शेष 15% खुद वहन करना पड़ेगा।
इस फ्रेमवर्क के तहत, OTP को गलती से शेयर करने वाले ग्राहक भी पात्र होंगे, बशर्ते जांच में कोई मालाफाइड इंटेंट न मिले। आरबीआई के गवर्नर ने स्पष्ट किया कि अनइंटेंडेड एक्शन के मामलों में ग्राहकों को राहत दी जाएगी, जो पहले के नियमों से ज्यादा कस्टमर-फ्रेंडली अप्रोच है। यह मुआवजा डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड से दिया जाएगा, जिसका मौजूदा बैलेंस ₹85,000 करोड़ से अधिक है। हालांकि, यह लाभ जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगा, और यदि फ्रॉड हाई-वैल्यू हो, तो कैप ₹25,000 पर ही रहेगा, भले ही नुकसान लाखों में क्यों न हो।
आरबीआई के प्रस्तावित नियमों में रिपोर्टिंग टाइमलाइन पर सख्ती बरती गई है। यदि ग्राहक फ्रॉड की रिपोर्ट 3 दिनों के अंदर करता है, तो जीरो लायबिलिटी लागू हो सकती है, लेकिन नए फ्रेमवर्क में 4-7 दिनों तक की देरी पर भी सीमित मुआवजा मिल सकता है। 7 दिनों से अधिक देरी पर लायबिलिटी पूरी तरह ग्राहक पर आएगी। यह नियम UPI, IMPS, NEFT और क्रेडिट/डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन पर लागू होंगे, जहां फिशिंग, स्कैम या अनऑथराइज्ड एक्सेस से नुकसान होता है।
मुआवजा पाने की प्रक्रिया और शर्तें
मुआवजा क्लेम करने के लिए ग्राहक को बैंक में लिखित शिकायत दर्ज करानी होगी, जिसमें फ्रॉड डिटेल्स, ट्रांजेक्शन आईडी और रिपोर्टिंग टाइम शामिल हो। बैंक 10 दिनों के अंदर जांच शुरू करेगा और 90 दिनों में फैसला देगा। यदि बैंक की ओर से कोई लापरवाही पाई जाती है, जैसे कमजोर ऑथेंटिकेशन सिस्टम, तो फुल कंपेंसेशन मिल सकता है। लेकिन ग्राहक की नेग्लिजेंस, जैसे OTP शेयरिंग, पर भी नए नियमों में राहत दी गई है।
आरबीआई ने ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करने का ऐलान किया है, जिसमें पब्लिक कमेंट्स मांगे जाएंगे। ये गाइडलाइंस मिस-सेलिंग प्रैक्टिसेज, लोन रिकवरी और कस्टमर लायबिलिटी पर फोकस करेंगी। साथ ही, डिजिटल पेमेंट्स में अतिरिक्त सेफ्टी मेजर्स जैसे लैग्ड क्रेडिट टू बेनिफिशियरी अकाउंट्स और वल्नरेबल डिपॉजिटर्स के लिए स्ट्रॉन्गर ऑथेंटिकेशन लागू किए जाएंगे।
किन ग्राहकों को मिलेगा फायदा?
| स्थिति | ग्राहक लायबिलिटी | मुआवजा कैप | शर्तें |
|---|---|---|---|
| बैंक या सिस्टम फेलियर | ₹0 | फुल राशि | कोई नेग्लिजेंस न हो |
| थर्ड-पार्टी डेटा ब्रीच | ₹0 | फुल राशि | रिपोर्ट 3 दिनों में |
| OTP शेयरिंग (अनइंटेंडेड) | 15% बेयर | ₹25,000 या 85% | एक बार का लाभ, नो मालाफाइड |
| हाई-वैल्यू फ्रॉड (>₹25,000) | शेष राशि ग्राहक पर | ₹25,000 | रिपोर्टिंग टाइमलाइन का पालन |
| क्रेडिट कार्ड अनऑथराइज्ड यूज | सीमित | ₹25,000 | OTP यूज से प्रभावित नहीं |
यह फ्रेमवर्क मुख्य रूप से रिटेल कस्टमर्स, स्मॉल बिजनेस ओनर्स और सीनियर सिटिजंस को टारगेट करता है, जो डिजिटल फ्रॉड के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत में डिजिटल फ्रॉड केसेज 30% बढ़े, जिसमें UPI स्कैम्स का बड़ा हिस्सा था। नए नियमों से ऐसे ग्राहकों को फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिलेगी, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां डिजिटल लिटरेसी कम है। क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए, यदि OTP यूज से फ्रॉड होता है, तो भी कंपेंसेशन पॉसिबल है, लेकिन बैंक जांच में OTP शेयरिंग की डिटेल्स चेक करेगा।
MSME सेक्टर के लिए, जहां कॉलेटरल-फ्री लोन लिमिट को दोगुना कर ₹20 लाख किया गया है, फ्रॉड प्रोटेक्शन और मजबूत होगा। NBFC के लिए भी राहत दी गई है, लेकिन फ्रॉड कंपेंसेशन मुख्य रूप से बैंक कस्टमर्स पर लागू है। आरबीआई का फोकस फ्रॉड इंसिडेंट्स को कम करने पर है, इसलिए ऑथेंटिकेशन डायवर्सिटी को बढ़ावा दिया जा रहा है – SMS OTP के अलावा बायोमेट्रिक, टोकन और PIN का यूज अनिवार्य होगा।
फ्रॉड प्रिवेंशन टिप्स और प्रभाव
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि फिशिंग ईमेल्स या अननोन कॉल्स पर OTP कभी शेयर न करें। आरबीआई के नए नियमों में, यदि बैंक ऑथेंटिकेशन गाइडलाइंस फॉलो नहीं करता, तो फुल लॉस बैंक वहन करेगा। 2026 में डिजिटल पेमेंट्स के लिए दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को और डायवर्सिफाई किया जाएगा, जिसमें ‘व्हाट यू नो’, ‘व्हाट यू हैव’ और ‘व्हाट यू आर’ शामिल होंगे। इससे फ्रॉड रेट 20% तक कम होने की उम्मीद है।
उदाहरणस्वरूप, यदि कोई ग्राहक फेक UPI रिक्वेस्ट पर OTP शेयर करता है और ₹15,000 का नुकसान होता है, तो मुआवजा ₹11,475 (85%) तक मिल सकता है, जबकि ₹2,250 ग्राहक खुद देगा। हाई-वैल्यू मामलों में, जैसे ₹1 लाख का फ्रॉड, कंपेंसेशन ₹25,000 पर कैप रहेगा। यह अप्रोच ‘स्किन इन द गेम’ को सुनिश्चित करती है, जहां ग्राहक भी सतर्क रहें।
अतिरिक्त सेफ्टी मेजर्स
आरबीआई ने लोन रिकवरी एजेंट्स के एंगेजमेंट पर नए नियम बनाए हैं, जिसमें कस्टमर प्रोटेक्शन को प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल फ्रॉड के लिए, बेनिफिशियरी अकाउंट्स में क्रेडिट को लैग्ड करने का प्रावधान है, जिससे फ्रॉड डिटेक्शन आसान होगा। वल्नरेबल ग्राहकों, जैसे सीनियर्स, के लिए एक्स्ट्रा ऑथेंटिकेशन लेयर्स अनिवार्य होंगे। ये बदलाव भारत के डिजिटल इकोनॉमी को मजबूत बनाएंगे, जहां UPI ट्रांजेक्शन वॉल्यूम 2025 में 100 बिलियन से पार हो गया।
आरबीआई के इस कदम से बैंकिंग सेक्टर में कस्टमर ट्रस्ट बढ़ेगा, लेकिन ग्राहकों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। फ्रॉड रिपोर्टिंग के लिए NPCI पोर्टल या बैंक हेल्पलाइन का यूज करें, और हमेशा ट्रांजेक्शन अलर्ट्स इनेबल रखें।
Disclaimer: यह रिपोर्ट सामान्य सूचना के उद्देश्य से है और किसी कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। पाठक अपनी स्थिति के आधार पर प्रोफेशनल एडवाइस लें।


