“यह लेख सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स में सोने के उपयोग की वजहों पर फोकस करता है, जैसे इसकी बेहतरीन कंडक्टिविटी और जंग-रोधी गुण। साथ ही, चीन के एक शख्स की कहानी, जिसने 2 टन ई-कचरे से 191 ग्राम सोना निकालकर 26 लाख रुपये कमाए, लेकिन प्रक्रिया के जोखिमों पर चेतावनी भी दी।”
सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स में सोने का इस्तेमाल मुख्य रूप से इसकी असाधारण विद्युत चालकता के कारण होता है। सोना बिजली को बिना ज्यादा रुकावट के प्रवाहित करने में सक्षम है, जो सेमीकंडक्टर और सर्किट बोर्ड के लिए जरूरी है। कॉपर या सिल्वर से बेहतर, सोना जंग और ऑक्सीडेशन से नहीं प्रभावित होता, जिससे कनेक्टर्स और कॉन्टैक्ट्स लंबे समय तक विश्वसनीय रहते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक चिप्स में सोने की पतली तारें बंधन के लिए इस्तेमाल होती हैं, जो CPU और RAM जैसे कंपोनेंट्स को जोड़ती हैं। एक स्मार्टफोन में औसतन 0.034 ग्राम सोना होता है, मुख्यतः सर्किट बोर्ड और SIM कार्ड के कॉन्टैक्ट पॉइंट्स पर। SIM कार्ड के गोल्ड-प्लेटेड कॉन्टैक्ट्स हवा या नमी से प्रभावित नहीं होते, जिससे डेटा ट्रांसफर सुचारू रहता है।
चीन के गुआंगडोंग प्रांत के हुइझोउ शहर से ताल्लुक रखने वाले शख्स कियाओ ने हाल ही में 2 टन ई-कचरे से 191 ग्राम शुद्ध सोना निकाला, जिसकी कीमत लगभग 200,000 युआन (करीब 26 लाख रुपये) है। उन्होंने पुराने SIM कार्ड्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप को केमिकल ड्रम्स में डाला, फिल्टर किया और हाई टेम्परेचर पर पिघलाया। इस प्रक्रिया ने सोशल मीडिया पर 50 लाख से ज्यादा व्यूज बटोरे, लेकिन कियाओ ने चेतावनी दी कि इसमें जहरीले केमिकल्स और गर्मी के जोखिम हैं, जो घर पर ट्राई करने लायक नहीं।
ई-कचरे से सोना निकालने की प्रक्रिया में पहले स्क्रैप को एसिड बाथ दिया जाता है, फिर फिल्ट्रेशन से सोने के कण अलग किए जाते हैं। एक टन ई-कचरे से औसतन 200-300 ग्राम सोना मिल सकता है, जो पारंपरिक माइनिंग से ज्यादा कुशल है। भारत में भी ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग बढ़ रही है, जहां 2025 तक ई-कचरा 5 मिलियन टन पहुंचने का अनुमान है, लेकिन केवल 20% ही रिसाइकल होता है।
सोने के उपयोग की मुख्य वजहें (की-पॉइंट्स):
कंडक्टिविटी: सोना बिजली को 99% एफिशिएंसी से पास करता है, जो माइक्रोचिप्स में सिग्नल लॉस रोकता है।
जंग-रोधी: ऑक्सीजन या नमी से रिएक्ट नहीं करता, इसलिए SIM कार्ड कॉन्टैक्ट्स 10-15 साल तक काम करते हैं।
मैलेबिलिटी: सोने को बेहद पतली तारों में बदला जा सकता है, जो छोटे डिवाइसेज के लिए आइडियल है।
रिलायबिलिटी: मेडिकल, एयरोस्पेस और मिलिट्री इक्विपमेंट में इस्तेमाल, जहां फेलियर का रिस्क नहीं लिया जा सकता।
इकोनॉमिक वैल्यू: एक लैपटॉप में 0.1 ग्राम सोना ($6 मूल्य) होता है, लेकिन स्केल पर रिसाइक्लिंग लाभदायक।
चीन में ई-कचरा रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री 2025 में 100 बिलियन युआन तक पहुंच सकती है, जहां गोल्ड एक्सट्रैक्शन एक बड़ा हिस्सा है। कियाओ की वीडियो ने पुराने SIM कार्ड्स की सेल्स बढ़ा दी, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अनप्रोफेशनल तरीके से यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है, जैसे एसिड लीकेज से मिट्टी दूषित होना।
ई-कचरे से गोल्ड एक्सट्रैक्शन की स्टेप्स (टेबल):
| स्टेप | विवरण | जोखिम/टिप्स |
|---|---|---|
| 1. कलेक्शन | पुराने SIM कार्ड्स, सर्किट बोर्ड इकट्ठा करें। एक टन में 200 ग्राम सोना संभव। | बड़े स्केल पर ही लाभदायक; छोटे स्तर पर लागत ज्यादा। |
| 2. क्रशिंग | स्क्रैप को पीसकर छोटे पीस बनाएं। | डस्ट से सांस की समस्या; मास्क जरूरी। |
| 3. केमिकल बाथ | नाइट्रिक या हाइड्रोक्लोरिक एसिड में डालें, जो अन्य मेटल्स घोल देता है। | जहरीले फ्यूम्स; वेंटिलेशन और PPE अनिवार्य। |
| 4. फिल्ट्रेशन | सोने के कण अलग करें, अन्य इंप्योरिटीज हटाएं। | पानी की बर्बादी; वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट जरूरी। |
| 5. मेल्टिंग | 1064°C पर पिघलाकर शुद्ध बार बनाएं। | हाई हीट; प्रोफेशनल इक्विपमेंट यूज करें। |
| 6. सेलिंग | मार्केट में बेचें; चीन में 450 युआन प्रति ग्राम रेट। | वैध रिसाइक्लर्स से संपर्क; अवैध तरीके से जुर्माना। |
भारत में ई-वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2022 के तहत, रिसाइक्लिंग कंपनियां जैसे Attero और E-Parisara गोल्ड एक्सट्रैक्शन कर रही हैं, जहां एक स्मार्टफोन से 0.034 ग्राम सोना रिकवर होता है। ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में विश्व स्तर पर 62 मिलियन टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ, जिसमें 31 बिलियन डॉलर का मूल्यवान मेटल छिपा है।
कियाओ ने अपनी वीडियो में बताया कि इस प्रक्रिया में 2 टन ई-कचरा प्रोसेस किया, जिसमें SIM कार्ड्स मुख्य थे। प्रत्येक SIM कार्ड में 0.0005-0.001 ग्राम सोना होता है, इसलिए हजारों कार्ड्स की जरूरत पड़ी। लेकिन उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा पहले: केमिकल हैंडलिंग से एसिड बर्न्स या पॉइजनिंग हो सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स में सोने की मात्रा (उदाहरण टेबल):
| डिवाइस | औसत सोना (ग्राम) | मूल्य (रुपये, अनुमानित) |
|---|---|---|
| स्मार्टफोन | 0.034 | 2,000 |
| लैपटॉप | 0.1 | 6,000 |
| टीवी (LCD) | 0.1 | 6,000 |
| कंप्यूटर CPU | 0.2 | 12,000 |
| SIM कार्ड (एकल) | 0.0005 | 30 |
चीन की ई-कचरा इंडस्ट्री में कियाओ जैसे इंडिविजुअल्स बढ़ रहे हैं, लेकिन गवर्नमेंट रेगुलेशंस सख्त हो रहे हैं ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे। भारत में भी CPCB गाइडलाइंस के तहत, ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर्स बढ़ाए जा रहे हैं, जहां गोल्ड रिकवरी से अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिल सकता है।
कियाओ की सफलता ने लोगों को प्रेरित किया, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रोफेशनल रिसाइक्लिंग कंपनियों से जुड़ें, क्योंकि घरेलू एक्सट्रैक्शन से स्वास्थ्य और पर्यावरण जोखिम ज्यादा हैं। ग्लोबल ट्रेंड्स में, 2026 तक ई-वेस्ट से रिकवर गोल्ड 1,000 टन पहुंच सकता है, जो नई माइनिंग की जरूरत कम करेगा।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। सूचनाएं विभिन्न स्रोतों से ली गई हैं और सलाह के रूप में नहीं मानी जानी चाहिए।


