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जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.4, ऑर्डर बढ़े फिर भी भरोसा 3.5 साल के निचले स्तर पर क्यों?

“जनवरी में HSBC India Manufacturing PMI 55.4 पर पहुंचा, जो दिसंबर के 55.0 से ऊपर है, नए ऑर्डर और आउटपुट में सुधार के साथ। हालांकि, इनपुट लागत में तेजी, एक्सपोर्ट की कमजोरी और मार्जिन प्रेशर से बिजनेस कॉन्फिडेंस 3.5 साल के निचले स्तर पर गिरा, जहां केवल 15% कंपनियां आउटपुट ग्रोथ की उम्मीद कर रही हैं।”

PMI की प्रमुख बातें HSBC India Manufacturing Purchasing Managers’ Index (PMI) जनवरी में 55.4 पर दर्ज हुआ, जो दिसंबर के दो साल के निचले स्तर 55.0 से मामूली ऊपर है। यह इंडेक्स जुलाई 2021 से लगातार 50 से ऊपर बना हुआ है, जो सेक्टर में विस्तार का संकेत देता है। PMI के कंपोनेंट्स में नए ऑर्डर इंडेक्स में सुधार देखा गया, जो घरेलू डिमांड से प्रेरित है। आउटपुट सब-इंडेक्स भी 38 महीने के निचले स्तर से ऊपर आया, लेकिन कुल मिलाकर ग्रोथ सीमित रही। एंप्लॉयमेंट में हल्की वृद्धि हुई, जो तीन महीने में सबसे तेज है, लेकिन अभी भी मामूली स्तर पर। इनपुट खरीद में तेजी आई, जिससे इन्वेंटरी बढ़ी।

नए ऑर्डर में वृद्धि के पीछे के फैक्टर नए ऑर्डर में तेजी मुख्य रूप से घरेलू मार्केट से आई, जहां क्लाइंट्स की डिमांड में सुधार हुआ। मैन्युफैक्चरर्स ने डिमांड बूस्ट, नए बिजनेस गेन और टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट को उत्पादन बढ़ाने का कारण बताया। एक्सपोर्ट ऑर्डर में भी मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन गति कमजोर रही। बेहतर डिमांड एशिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप और मिडिल ईस्ट से आई। कुल नए ऑर्डर की ग्रोथ पिछले महीने की तुलना में मजबूत हुई, जो सेक्टर के रिबाउंड को सपोर्ट करती है। इससे उत्पादन में वृद्धि हुई, और कंपनियां अतिरिक्त स्टाफ हायर करने लगीं।

इनपुट लागत और प्राइसिंग डायनामिक्स इनपुट लागत में चार महीने में सबसे तेज वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें केमिकल्स, कॉपर, आयरन, स्टील और ट्रांसपोर्टेशन की कीमतें प्रमुख हैं। यह लागत दबाव मॉडरेट रहा, लेकिन मैन्युफैक्चरर्स पर असर पड़ा। आउटपुट प्राइस इन्फ्लेशन 22 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा, जो लगभग दो साल में सबसे कमजोर है। कई फर्म्स ने बेहतर एफिशिएंसी, कॉस्ट मैनेजमेंट और मार्केट कॉम्पिटिशन के कारण कीमतें नहीं बढ़ाईं। इससे मार्जिन पर प्रेशर बढ़ा, क्योंकि इनपुट कॉस्ट तेजी से बढ़ी लेकिन सेलिंग प्राइस में वृद्धि धीमी रही।

PMIकंपोनेंट्सदिसंबर2025जनवरी2026बदलावकाकारण
कुलPMI55.055.4नएऑर्डरऔरआउटपुटमेंमामूलीसुधार
नएऑर्डरकमगतिमजबूतगतिघरेलूडिमांडसेबूस्ट,एक्सपोर्टकमजोर
आउटपुट38महीनेकानिचलास्तरऊपरउठाटेक्नोलॉजीइन्वेस्टमेंटऔरनएबिजनेस
एंप्लॉयमेंटमामूलीतीनमहीनेमेंसबसेतेजऑपरेटिंगजरूरतोंसेहायरिंग
इनपुटलागतमॉडरेटचारमहीनेमेंसबसेतेजमटेरियलऔरट्रांसपोर्टकॉस्टऊपर
आउटपुटप्राइसऊंचीइन्फ्लेशन22महीनेकानिचलास्तरकॉम्पिटिशनसेकीमतेंस्थिर

बिजनेस कॉन्फिडेंस में गिरावट के प्रमुख कारण बिजनेस कॉन्फिडेंस 3.5 साल के निचले स्तर पर पहुंचा, जहां केवल 15% कंपनियां अगले साल आउटपुट ग्रोथ की उम्मीद कर रही हैं, जबकि 83% को कोई बदलाव नहीं दिखता। नए ऑर्डर में सुधार के बावजूद, एक्सपोर्ट मोमेंटम की कमजोरी प्रमुख वजह है, जो ग्लोबल टेंशन्स और स्लो इकोनॉमिक रिकवरी से प्रभावित है। इनपुट लागत में तेजी ने मार्जिन को दबाया, जिससे फर्म्स प्राइसिंग पावर खो रही हैं। फ्यूचर आउटलुक जुलाई 2022 के बाद सबसे कमजोर है, क्योंकि डिमांड का गेन मजबूत नहीं है जो ऑप्टिमिज्म बढ़ा सके। बजट में फिस्कल डेफिसिट 4.3% पर टारगेटेड है, लेकिन मार्केट बॉरोइंग 11.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने से चिंता बढ़ी, जो स्लोअर फिस्कल कंसॉलिडेशन का संकेत देता है। कैपेक्स 12.2 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ा, लेकिन कंजम्प्शन बूस्ट की उम्मीदें कम हैं। ग्लोबल टेंशन्स, जैसे जियोपॉलिटिकल इश्यूज, ने एक्सपोर्ट आउटलुक को प्रभावित किया। मैन्युफैक्चरर्स हायरिंग बढ़ा रही हैं, लेकिन गति मामूली है, जो अनिश्चितता दर्शाती है।

सेक्टर-वाइज इम्पैक्ट कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में सबसे तेज ग्रोथ देखी गई, जहां नए ऑर्डर और आउटपुट मजबूत रहे। इंटरमीडिएट गुड्स में सुधार हुआ, लेकिन कैपिटल गुड्स में गति धीमी। एक्सपोर्ट-डिपेंडेंट इंडस्ट्रीज, जैसे टेक्सटाइल्स और ऑटोमोटिव, कमजोर डिमांड से प्रभावित हुईं। सप्लायर्स की डिलीवरी टाइम में सुधार हुआ, लेकिन इनपुट स्टॉक बढ़ाने से वेयरहाउसिंग कॉस्ट ऊपर गई। कुल मिलाकर, सेक्टर रिबाउंड कर रहा है, लेकिन अनिश्चितताएं बरकरार हैं।

की पॉइंट्स फॉर मैन्युफैक्चरर्स

डोमेस्टिक डिमांड पर फोकस: एक्सपोर्ट की कमजोरी से घरेलू मार्केट को प्राथमिकता दें।

कॉस्ट मैनेजमेंट: इनपुट प्राइस में वृद्धि से एफिशिएंसी बढ़ाएं, जैसे सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन।

हायरिंग स्ट्रैटेजी: जूनियर और मिड-लेवल पोजिशन्स पर फोकस, लेकिन डिमांड के आधार पर।

फ्यूचर प्लानिंग: बजट के कैपेक्स बूस्ट से इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट का फायदा उठाएं।

रिस्क मिटिगेशन: ग्लोबल अनिश्चितताओं से बचने के लिए डाइवर्सिफाइड मार्केट्स तलाशें।

आंकड़ों का विश्लेषण PMI सर्वे में लगभग 400 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के रिस्पॉन्स शामिल हैं, जो S&P Global द्वारा कंपाइल किए जाते हैं। जनवरी में पर्चेजिंग एक्टिविटी तेज हुई, जो फ्यूचर डिमांड की उम्मीद दर्शाती है। हालांकि, बैकलॉग ऑफ वर्क में कमी आई, जो कैपेसिटी प्रेशर कम होने का संकेत है। इन्फ्लेशन ट्रेंड्स से पता चलता है कि इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन मॉडरेट लेकिन बढ़ती हुई है, जबकि आउटपुट प्राइस में स्थिरता बनी हुई है। एक्सपोर्ट ऑर्डर सब-इंडेक्स अभी भी कमजोर है, जो ग्लोबल इकोनॉमी की स्लोडाउन से जुड़ा है। कुल मिलाकर, PMI 55.4 विस्तार दिखाता है, लेकिन गति पिछले साल के हाई से कम है।

प्रमुखइंडिकेटर्समूल्यइम्प्लिकेशन

| बिजनेसकॉन्फिडेंस | 3.5सालकानिचलास्तर | फ्यूचरग्रोथपरसंदेह |

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