बजट 2026 प्रेजेंटेशन के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रियल एस्टेट सेक्टर पर बोलते हुए।

बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को क्या मिला, क्यों गिरे प्रॉपर्टी कंपनी के शेयर? एक्सपर्ट ने सबकुछ बताया.

“बजट 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और CPSE एसेट्स के लिए डेडिकेटेड REITs जैसे प्रावधान मिले, लेकिन किफायती आवास पर कोई ठोस राहत न होने से निराशा हुई। प्रॉपर्टी शेयरों में 10% तक गिरावट आई, मुख्यतः बजट निराशा और F&O पर STT बढ़ोतरी के कारण, जिससे निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 4.6% गिरा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टियर-2 शहरों पर फोकस से लंबे समय में ग्रोथ आएगी, लेकिन शॉर्ट टर्म में मार्केट प्रेशर बनेगा।”

बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कुछ प्रमुख घोषणाएं कीं, जो इंफ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ और एसेट मॉनेटाइजेशन पर फोकस करती हैं। सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड का लाभ मिलेगा, जो प्राइवेट लेंडर्स को पार्शियल क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगा। इससे बड़े प्रोजेक्ट्स में फाइनेंसिंग आसान होगी और रिस्क कम होगा। CPSEs की बड़ी रियल एस्टेट एसेट्स को डेडिकेटेड REITs के जरिए रिसाइकल करने की योजना से करीब 10 लाख करोड़ रुपये की एसेट्स को मार्केट में लाया जाएगा, जिसमें रेलवे प्रॉपर्टी, पोर्ट लैंड और पावर इंफ्रा शामिल हैं। इससे इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की भागीदारी बढ़ेगी और CPSEs को रिकरिंग रेवेन्यू मिलेगा।

हालांकि, सेक्टर की मुख्य उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। किफायती आवास सेगमेंट पर कोई नई स्कीम या इंसेंटिव नहीं दिया गया, जबकि PMAY जैसी पहले की योजनाओं पर फोकस जारी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किफायती आवास की परिभाषा आउटडेटेड है, जो अब सिर्फ 18% सप्लाई तक सीमित है, जबकि 2019 में यह 38% था। होम लोन इंटरेस्ट पर डिडक्शन लिमिट को 5 लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग भी अनसुनी रही। टियर-1 और टियर-2 शहरों पर विकास का जोर दिया गया, जो अर्बनाइजेशन को बैलेंस करेगा और मेट्रो सिटीज़ पर प्रेशर कम करेगा। कैपिटल एक्सपेंडिचर को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया, जो रियल एस्टेट, सीमेंट और स्टील जैसे सेक्टर्स के लिए ऑर्डर बुक बढ़ाएगा।

शेयर मार्केट में प्रॉपर्टी कंपनियों के शेयर क्यों गिरे? बजट प्रेजेंटेशन के बाद निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 4.6% गिरा, जबकि कुछ स्टॉक्स में 10% तक की गिरावट आई। मुख्य वजह बजट से किफायती और मिड-इनकम हाउसिंग के लिए कोई बड़ा बूस्ट न मिलना है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि महामारी के बाद किफायती हाउसिंग सेल्स 38% से घटकर 18% रह गई है, और बजट में इसकी अनदेखी से इन्वेस्टर सेंटिमेंट प्रभावित हुआ। इसके अलावा, F&O ट्रेड्स पर STT बढ़ोतरी (फ्यूचर्स पर 0.02% से 0.05% और ऑप्शंस पर 0.10% से 0.15%) ने ओवरऑल मार्केट को हिट किया, जिससे सेंसेक्स 1,800 पॉइंट्स से ज्यादा गिरा। ब्रोकरेज और एक्सचेंज स्टॉक्स में भारी सेलिंग से रियल्टी सेक्टर भी प्रभावित हुआ, क्योंकि बढ़ी ट्रेडिंग कॉस्ट से वॉल्यूम घट सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय में, लॉन्ग टर्म में बजट पॉजिटिव है। एक एक्सपर्ट ने कहा कि CPSE REITs से मार्केट डेप्थ बढ़ेगी और म्यूचुअल फंड्स जैसे इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स की एंट्री होगी। दूसरी ओर, CREDAI जैसे बॉडीज ने निराशा जताई कि किफायती हाउसिंग पर कुछ नहीं मिला, जिससे सप्लाई और डिमांड गैप बढ़ सकता है। टियर-2 शहरों का फोकस रीजनल ग्रोथ को सपोर्ट करेगा, लेकिन शॉर्ट टर्म में होमबायर्स के लिए टैक्स रिलीफ न होने से डिमांड स्लो रहेगी। डेटा सेंटर्स के लिए टैक्स हॉलिडे तक 2047 तक एक्सटेंड करने से डेटा सेंटर्स और इंडस्ट्रियल पार्क्स में इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा।

बजट 2026 की प्रमुख घोषणाएं रियल एस्टेट के लिए

प्रमुख प्रॉपर्टी शेयरों में गिरावट

घोषणाविवरणप्रभाव
इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंडलेंडर्स को पार्शियल क्रेडिट गारंटीप्रोजेक्ट फाइनेंसिंग आसान, प्राइवेट पार्टिसिपेशन बढ़ेगा
CPSE REITsसरकारी एसेट्स का रिसाइक्लिंग, 10 लाख करोड़ एसेट्समार्केट लिक्विडिटी बढ़ेगी, इंस्टीट्यूशनल कैपिटल आएगा
कैपिटल एक्सपेंडिचर12.2 लाख करोड़ रुपयेइंफ्रा प्रोजेक्ट्स से रियल एस्टेट डिमांड बढ़ेगी
टियर-1 और टियर-2 फोकसअर्बनाइजेशन बैलेंसरीजनल डेवलपमेंट, मेट्रो प्रेशर कम
किफायती आवासकोई नई इंसेंटिव नहींसेगमेंट में गिरावट जारी रह सकती है
कंपनी/इंडेक्सगिरावट प्रतिशतकारण
निफ्टी रियल्टी इंडेक्स4.6%बजट निराशा और STT हाइक
डेवलपर स्टॉक्स (औसत)5-10%किफायती हाउसिंग पर कोई बूस्ट नहीं
REITs स्टॉक्स3% ऊपरCPSE REITs से पॉजिटिव सेंटिमेंट

एक्सपर्ट्स आगे बताते हैं कि बजट का फोकस मैन्युफैक्चरिंग और AI पर है, जो इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट को बूस्ट देगा। बायोफार्मा शक्ति प्रोग्राम से लाइफ साइंस क्लस्टर्स में डिमांड बढ़ेगी। हालांकि, GST रेशनलाइजेशन और होम लोन प्रिंसिपल रिपेमेंट पर सेक्शन 80C कैप बढ़ाने की मांगें पूरी नहीं हुईं। छोटे शहरों में रियल एस्टेट को नई रफ्तार मिल सकती है, क्योंकि 20 नए जलमार्ग और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी सुधरेगी। कुल मिलाकर, सेक्टर की ग्रोथ 5-7% सालाना रह सकती है, लेकिन 2026 में शेयर मार्केट वोलेटिलिटी बनी रहेगी।

रियल एस्टेट स्टेकहोल्डर्स का मानना है कि बजट bittersweet है – इंफ्रा पुश से लॉन्ग टर्म बेनिफिट, लेकिन इमीडिएट डिमांड बूस्ट की कमी। F&O टैक्स हाइक से ट्रेडिंग वॉल्यूम 10-15% घट सकता है, जो ब्रोकरेज फर्म्स को हिट करेगा और अप्रत्यक्ष रूप से रियल्टी इन्वेस्टमेंट प्रभावित करेगा। टियर-3 शहरों में प्लग-एंड-प्ले सिस्टम से इंडस्ट्रियल पार्क्स बढ़ेंगे। अंत में, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इन्वेस्टर्स को REITs पर फोकस करना चाहिए, क्योंकि वे स्टेबल रिटर्न दे सकते हैं।

Disclaimer: यह खबर रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट ओपिनियंस पर आधारित है। निवेश सलाह के लिए प्रोफेशनल्स से संपर्क करें।

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