“बजट 2026 में कैपेक्स को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया, जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में डिमांड बढ़ेगी। लिथियम-आयन सेल और क्रिटिकल मिनरल्स पर कस्टम ड्यूटी छूट से EV सप्लाई चेन मजबूत होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स स्कीम का आउटले बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये हुआ। रेयर अर्थ कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिलेगा। ऑटो PLI का आवंटन दोगुना होकर 5,940 करोड़ रुपये पहुंचा। एक्सपर्ट्स ने इसे सप्लाई चेन रेजिलिएंस और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए सकारात्मक बताया, हालांकि डायरेक्ट इंसेंटिव की कमी पर निराशा जताई।”
बजट 2026 में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रमुख घोषणाएं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में ऑटोमोबाइल सेक्टर को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत करने वाली कई घोषणाएं कीं, जिनमें कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग पर फोकस शामिल है। FY27 के लिए कैपेक्स को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया, जो GDP का 4.4% है और अब तक का सबसे ऊंचा स्तर। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तेज होंगे, जिससे कमर्शियल व्हीकल्स और पैसेंजर व्हीकल्स की डिमांड में उछाल आएगा।
ऑटो सेक्टर में EV ट्रांजिशन को सपोर्ट करने के लिए लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग और क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई। इससे इंपोर्ट डिपेंडेंसी घटेगी और लोकल EV सप्लाई चेन मजबूत होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का आउटले 22,919 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया गया, जो ऑटो कंपोनेंट्स जैसे बैटरी और सेंसर के प्रोडक्शन को बूस्ट देगा।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स स्कीम को नवंबर 2025 में लॉन्च किया गया था, अब इसे विस्तार देते हुए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव है। ये कॉरिडोर माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करेंगे, जो EV मोटर्स और बैटरीज के लिए जरूरी हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 की सफलता पर बिल्ड करते हुए ISM 2.0 लॉन्च किया जाएगा, जो इक्विपमेंट, मटेरियल्स, डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत करेगा। साथ ही, इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स पर फोकस से टेक्नोलॉजी और स्किल्ड वर्कफोर्स डेवलप होगी।
कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10,000 करोड़ रुपये की स्कीम लॉन्च की गई, जो ग्लोबली कॉम्पिटिटिव इकोसिस्टम बनाएगी और ऑटो एक्सपोर्ट्स को आसान बनाएगी। पुरवोदय स्टेट्स के लिए 4,000 ई-बसेज का आवंटन सस्टेनेबल पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देगा। ऑटो PLI स्कीम का आवंटन दोगुना होकर 5,940 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो EV और एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी पर फोकस करेगा।
मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल से मिलने वाले इंटरेस्ट को इनकम टैक्स से छूट दी गई, जो कंज्यूमर्स के लिए राहत है। ओवरसीज टूर प्रोग्राम पैकेजेस पर TCS रेट 5% और 20% से घटाकर 2% किया गया, साथ ही एजुकेशन और मेडिकल पर्पज के लिए LRS के तहत 5% से 2%। मनपावर सर्विसेज को TDS के दायरे में लाकर 1% या 2% रेट पर क्लैरिटी दी गई।
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर प्रभाव: एक विश्लेषण
ये घोषणाएं ऑटो सेक्टर की चुनौतियों जैसे सप्लाई चेन डिसरप्शन, इंपोर्ट डिपेंडेंसी और EV ट्रांजिशन को एड्रेस करती हैं। कैपेक्स बढ़ोतरी से इंडस्ट्रियल एक्टिविटी बढ़ेगी, जिससे फ्रेट उपलब्धता और ट्रक डिमांड में ग्रोथ होगी। FY26 में ऑटो कंपोनेंट इंपोर्ट्स 12.3 बिलियन डॉलर तक पहुंचे, जो एक्सपोर्ट्स से ज्यादा थे—ये मेजर्स इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन को प्रमोट करेंगे।
EV सेक्टर के लिए क्रिटिकल मिनरल्स छूट से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटेगी, जो बैटरी प्राइस को 10-15% कम कर सकती है। रेयर अर्थ कॉरिडोर से इंडिया की EV सप्लाई चेन ग्लोबल रिस्क से सुरक्षित होगी, खासकर चीन पर डिपेंडेंसी घटाकर। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से ऑटोमोटिव-ग्रेड चिप्स का लोकल प्रोडक्शन बढ़ेगा, जो ADAS और EV कंट्रोल सिस्टम्स के लिए जरूरी हैं।
हालांकि, डायरेक्ट EV इंसेंटिव्स या GST कट की कमी से कुछ निराशा है। FY25 में EV सेल्स ग्रोथ 20% रही, लेकिन बजट में डिमांड बूस्ट के लिए कोई नई स्कीम नहीं। कंटेनर स्कीम से एक्सपोर्ट्स आसान होंगे, जहां इंडियन ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्ट्स 12.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचे।
एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रियाएं: क्या कहते हैं इंडस्ट्री लीडर्स
| प्रमुखक्षेत्र | बजटघोषणा | संभावितप्रभावऑटोसेक्टरपर |
|---|---|---|
| कैपिटलएक्सपेंडिचर | 12.2लाखकरोड़रुपये(FY27) | इंफ्राप्रोजेक्ट्ससेकमर्शियलव्हीकलडिमांड+15-20% |
| क्रिटिकलमिनरल्स | कस्टमड्यूटीछूटऔरकॉरिडोर | EVबैटरीकॉस्टरिडक्शन,लोकलाइजेशन30%तकबढ़ोतरी |
| इलेक्ट्रॉनिक्सस्कीम | 40,000करोड़रुपयेआउटले | कंपोनेंट्सप्रोडक्शनबूस्ट,इंपोर्ट्समें10%कटौती |
| सेमीकंडक्टरमिशन2.0 | IPडिजाइनऔरट्रेनिंगसेंटर्स | ADASटेकमेंइंडियाकीकैपेबिलिटीमजबूत,एक्सपोर्टग्रोथ |
| ऑटोPLI | 5,940करोड़रुपये(दोगुना) | EVमैन्युफैक्चरिंगइन्वेस्टमेंट्समें25%उछाल |
| ई-बसेज | 4,000यूनिट्सपुरवोदयस्टेट्समें | पब्लिकट्रांसपोर्टEVशिफ्ट,चार्जिंगइंफ्राडेवलपमेंट |
SIAM प्रेसिडेंट शैलेश चंद्रा ने कहा कि कैपेक्स बढ़ोतरी से इंडस्ट्रियल एक्टिविटी और ऑटो डिमांड बढ़ेगी। रेयर अर्थ कॉरिडोर और इलेक्ट्रॉनिक्स इनीशिएटिव्स से सप्लाई चेन रेजिलिएंस मजबूत होगी, जो ग्लोबल अनसर्टेन्टी में जरूरी है। पुरवोदय स्टेट्स में 4,000 ई-बसेज सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ACMA प्रेसिडेंट विक्रमपति सिंघानिया ने बजट को मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मजबूत करने वाला बताया। MSMEs पर फोकस, क्लीन मोबिलिटी और एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन से ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ग्लोबल हेडविंड्स का सामना कर सकेगी, इंडिया को कॉम्पिटिटिव डेस्टिनेशन बनाएगी।
Mercedes-Benz India के MD संतोष अय्यर ने इंफ्रास्ट्रक्चर पुश को मोबिलिटी इकोसिस्टम का कैटेलिस्ट बताया। बेहतर हाईवे और इंटरसिटी कनेक्टिविटी से लग्जरी कार डिमांड बढ़ेगी। फिस्कल डेफिसिट 4.3% टारगेट और एक्सपोर्ट फोकस से मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबिलिटी आएगी, करेंसी वोलेटिलिटी घटेगी।
Tata Motors Passenger Vehicles के MD शैलेश चंद्रा ने लॉन्ग-टर्म ग्रोथ एजेंडा की सराहना की। इंडस्ट्रियल एक्टिविटी से ऑटो सेक्टर में डिमांड बढ़ेगी, सप्लाई चेन इनीशिएटिव्स से रेजिलिएंस आएगी। ई-बस आवंटन सस्टेनेबल पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रमोट करेगा।
Volvo Car India के MD ज्योति मल्होत्रा ने बजट को इकॉनॉमिक मोमेंटम बनाए रखने वाला बताया। ग्रोथ मेजर्स से कंजम्प्शन बढ़ेगा, खासकर हाई-वैल्यू सेगमेंट्स में। सिंपल टैक्सेशन और कस्टम प्रोसेस से इकॉनॉमिक ट्रेजेक्टरी मजबूत होगी।
Uno Minda के MD रवि मेहरा ने एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर जोर को स्वागत किया। इलेक्ट्रॉनिक्स स्कीम और ISM 2.0 से डोमेस्टिक वैल्यू चेन्स मजबूत होंगी। रेयर अर्थ कॉरिडोर और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिफॉर्म्स से इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।
Omega Seiki Mobility के फाउंडर डॉ. उदय नारंग ने MSME फाइनेंसिंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को EV कंपनियों के लिए फायदेमंद बताया। कॉस्ट बैरियर्स घटेंगे, सप्लाई चेन रेजिलिएंस से इनोवेशन स्केल होगा, टियर-2 और टियर-3 मार्केट्स में एडॉप्शन बढ़ेगा।
River Mobility के CEO अरविंद मणि ने क्रिटिकल मिनरल्स एक्सेस को महत्वपूर्ण बताया। रेयर अर्थ कॉरिडोर और केमिकल पार्क्स से बैटरीज और कंपोनेंट्स का डोमेस्टिक प्रोडक्शन बढ़ेगा।
YOUDHA के CEO आयुष लोहिया ने कस्टम ड्यूटी छूट को मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटाने वाला बताया। वैल्यू चेन्स मजबूत होंगी, ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी, इंडिया को EV हब बनाएगी।
Nawgati के CEO वैभव कौशिक ने फ्यूल और चार्जिंग को इंटीग्रेटेड नेटवर्क मानने को बजट के सस्टेनेबल इंफ्रा फोकस से जोड़ा। एक्जीक्यूशन से कॉन्जेशन घटेगा, फ्लीट ऑपरेशंस ऑप्टिमाइज होंगे।
Grant Thornton Bharat के पार्टनर साकेत मेहरा ने इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को EV कंपोनेंट्स इंपोर्ट डिपेंडेंसी घटाने वाला बताया।
CEAT Limited के MD अर्नब बनर्जी ने इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क्स को मोबिलिटी और टायर डिमांड बूस्ट करने वाला बताया। टियर-2/3 ग्रोथ से मेट्रो से बाहर मोबिलिटी बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, एक्सपर्ट्स बजट को लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और रेजिलिएंस पर फोकस्ड मानते हैं, लेकिन डिमांड बूस्ट के लिए डायरेक्ट मेजर्स की कमी पर चिंता जताते हैं। इससे ऑटो सेक्टर की राह आसान हो सकती है, अगर इंप्लीमेंटेशन सही रहा।
Disclaimer: यह रिपोर्ट समाचार, विश्लेषण और विशेषज्ञ राय पर आधारित है। इसमें दिए गए विचार सलाह नहीं हैं और स्रोतों से प्राप्त हैं।


