जेपी मॉर्गन की गोल्ड पर नई बड़ी भविष्यवाणी, 7.79 लाख के पार जाएगी सोने की कीमत

जेपी मॉर्गन ने 2026 के अंत तक गोल्ड प्राइस को 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की भविष्यवाणी की है, लेकिन इनवेस्टर अलोकेशन बढ़ने पर यह 8,000 से 8,500 डॉलर तक जा सकता है, जो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत को 7.79 लाख रुपये से ऊपर ले जाएगा। वैश्विक अनिश्चितता, सेंट्रल बैंक डिमांड और कम ब्याज दरें प्रमुख ड्राइवर हैं, जबकि सप्लाई कंस्ट्रेंट्स कीमतों को सपोर्ट करेंगे।

जेपी मॉर्गन के ग्लोबल कमोडिटी स्ट्रैटेजी हेड नताशा कनेवा ने हालिया रिपोर्ट में गोल्ड की कीमतों को 2026 के चौथे क्वार्टर तक औसत 5,055 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। यह भविष्यवाणी सेंट्रल बैंक की लगातार खरीदारी, इनवेस्टर डिमांड और जियोपॉलिटिकल टेंशन पर आधारित है। यदि प्राइवेट सेक्टर इनवेस्टर अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड का अलोकेशन 3% से बढ़ाकर 4.6% कर दें, तो कीमतें 8,000 से 8,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। भारतीय संदर्भ में, वर्तमान एक्सचेंज रेट 91 रुपये प्रति डॉलर पर, यह 10 ग्राम सोने की कीमत को 7.79 लाख रुपये से ऊपर ले जाएगा, जो मौजूदा 1.69 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से करीब 360% की बढ़ोतरी होगी।

यह अनुमान गोल्ड की सेफ-हेवन स्टेटस को मजबूत करता है, जहां यूएस डॉलर की कमजोरी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कीमतों को बूस्ट देंगी। 2026 में ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ स्लो होने की स्थिति में गोल्ड डिमांड 585 टन प्रति क्वार्टर तक पहुंच सकती है, जिसमें सेंट्रल बैंक 190 टन, बार और कॉइन 330 टन और ईटीएफ 275 टन का योगदान देंगे। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि गोल्ड सप्लाई रिलेटिवली इनइलास्टिक रहेगी, यानी प्रोडक्शन हाई प्राइस के बावजूद नहीं बढ़ेगा, जो कीमतों पर अतिरिक्त प्रेशर डालेगा।

2026 में गोल्ड प्राइस को प्रभावित करने वाले प्रमुख फैक्टर में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की टैरिफ पॉलिसी शामिल है, जो साउथ कोरियन इंपोर्ट्स पर 25% टैरिफ लगा सकती है, जिससे ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितता बढ़ेगी। इसके अलावा, यूएस गवर्नमेंट शटडाउन का रिस्क और फेड चेयर जेरोम पॉवेल की इंडिपेंडेंस पर दबाव गोल्ड को हेज के रूप में आकर्षक बनाएगा। चाइना और क्रिप्टो कम्युनिटी से नई डिमांड, जैसे चाइनीज इंश्योरेंस कंपनियों की गोल्ड खरीद, कीमतों को आगे बढ़ाएगी।

वर्षऔसतगोल्डप्राइस(डॉलरप्रतिऔंस)भारतीयकीमत(रुपयेप्रति10ग्राम,अनुमानित)प्रमुखड्राइवर
2025Q44,7531.45लाखसेंट्रलबैंकडिमांड,ईटीएफइनफ्लो
2026Q14,8501.48लाखजियोपॉलिटिकलटेंशन,डॉलरवीकनेस
2026Q24,9501.51लाखइंफ्लेशनएक्सपेक्टेशंस,लोरेट्स
2026Q35,0251.53लाखइनवेस्टरअलोकेशनइंक्रीज
2026Q45,0551.54लाखसप्लाईकंस्ट्रेंट्स,हाईडिमांड
अपसाइडसिनेरियो(2026-2027)8,000-8,5007.79लाखसेऊपरपोर्टफोलियोशिफ्ट,ग्लोबलअनिश्चितता

जेपी मॉर्गन की भविष्यवाणी में लॉन्ग-टर्म टारगेट 2028 तक 6,000 डॉलर प्रति औंस है, लेकिन अपसाइड सिनेरियो में दशक के अंत तक 8,000 डॉलर संभव है। यह भारतीय इनवेस्टर्स के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि गोल्ड ज्वेलरी डिमांड यहां 50% से ज्यादा है, और हाई प्राइस इंपोर्ट बिल को बढ़ा सकता है। हालांकि, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स जैसे इंस्ट्रूमेंट्स से इनवेस्टर्स प्रॉफिट कमा सकते हैं। रिपोर्ट में सिल्वर की भी चर्चा है, जो 2026 में 58 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, लेकिन गोल्ड की तुलना में अधिक वोलेटाइल रहेगा।

कीमतों पर असर डालने वाले फैक्टर में रियल यील्ड्स शामिल हैं, जहां नेगेटिव रियल रेट्स गोल्ड को फायदेमंद बनाते हैं। फेडरल रिजर्व की 2026 में संभावित कट्स, यदि इकोनॉमी स्लो होती है, तो गोल्ड को 5,400 डॉलर तक ले जा सकती हैं। इसके अलावा, ग्लोबल डी-डॉलराइजेशन ट्रेंड, जहां सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, 2026 में 760 टन की सालाना खरीदारी का अनुमान है। भारत में आरबीआई ने 2025 में 100 टन गोल्ड खरीदा, जो 2026 में जारी रह सकता है।

2026 में गोल्ड मार्केट की डायनामिक्स में सप्लाई साइड पर चुनौतियां हैं, जैसे माइनिंग प्रोडक्शन में गिरावट और रिसाइक्लिंग की सीमित ग्रोथ। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2026 में गोल्ड प्राइस रेंजबाउंड रह सकती है यदि इकोनॉमिक कंडीशंस स्टेबल रहें, लेकिन रिसेशन की स्थिति में मजबूत गेंस संभव हैं। ट्रंप की पॉलिसी से अगर यूएस डॉलर मजबूत होता है, तो गोल्ड पर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ सकता है, लेकिन जियोइकोनॉमिक अनिश्चितता इसे काउंटर करेगी।

भारतीय बाजार में एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स वर्तमान में 1.69 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे हैं, लेकिन जेपी मॉर्गन की भविष्यवाणी से 2026 में हाई वैल्यूएशन की उम्मीद है। इनवेस्टर्स को डाइवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड को 10-15% पोर्टफोलियो में रखना चाहिए, खासकर यदि इंफ्लेशन एक्सपेक्टेशंस बढ़ें। रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि गोल्ड की रैली लीनियर नहीं होगी, बल्कि वोलेटाइल रहेगी, इसलिए लॉन्ग-टर्म होल्डिंग स्ट्रैटेजी अपनाएं।

प्रमुखफैक्टरप्रभाव2026अनुमान
सेंट्रलबैंकडिमांडपॉजिटिव760टनसालाना
जियोपॉलिटिकलरिस्कपॉजिटिवट्रंपटैरिफ्ससेबढ़ोतरी
यूएसडॉलरवीकनेसपॉजिटिवफेडकट्ससेसपोर्ट

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