“Zoho के CEO श्रीधर वेम्बू ने Meta के विज्ञापन-आधारित मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुनाफा यूजर आदतों पर निर्भर हो, तो प्राइवेसी कभी प्राथमिकता नहीं बन सकती। WhatsApp के एन्क्रिप्शन दावों पर चल रहे मुकदमे के बीच वेम्बू की यह टिप्पणी टेक इंडस्ट्री में प्राइवेसी बनाम प्रॉफिट की बहस को तेज कर रही है, जहां उन्होंने Elon Musk के विचारों का समर्थन किया। भारतीय यूजर्स के लिए यह चेतावनी है कि ऐड-ड्रिवेन प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा हमेशा संदिग्ध रहती है।”
Zoho के सह-संस्थापक और CEO श्रीधर वेम्बू ने WhatsApp के एन्क्रिप्शन विवाद पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए Meta के बिजनेस मॉडल को निशाने पर लिया। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब कोई कंपनी यूजर की आदतों पर आधारित विज्ञापनों से कमाई करती है, तो प्राइवेसी को कभी पहली प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। यह टिप्पणी Meta के खिलाफ चल रहे एक मुकदमे के संदर्भ में आई है, जहां आरोप है कि WhatsApp के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन दावे झूठे हैं और कंपनी यूजर डेटा का दुरुपयोग कर रही है।
वेम्बू ने आगे जोड़ा कि पब्लिक मार्केट में बढ़ते प्रॉफिट के दबाव और कंपनी की वैल्यूएशन को जस्टिफाई करने की होड़ में यूजर प्राइवेसी को नजरअंदाज करना अपरिहार्य हो जाता है। उन्होंने इसे एक गंभीर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट करार दिया, जहां मुनाफा प्राइवेसी से ऊपर रखा जाता है। इस बयान से टेक जगत में हलचल मच गई है, खासकर जब Elon Musk ने भी WhatsApp और Signal जैसे ऐप्स को असुरक्षित बताते हुए X को सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रमोट किया। वेम्बू की प्रतिक्रिया Musk के विचारों से मेल खाती है, जो Meta की प्रैक्टिसेज पर सवाल उठाती है।
WhatsApp एन्क्रिप्शन विवाद की जड़ में Meta का ऐड-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल है। कंपनी दावा करती है कि मैसेजेस एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं, यानी केवल भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही उन्हें पढ़ सकता है। लेकिन मुकदमे में आरोप है कि Meta यूजर डेटा को ऐड टारगेटिंग के लिए इस्तेमाल करती है, जो प्राइवेसी पॉलिसी का उल्लंघन है। अमेरिका में दायर इस केस में दावा किया गया है कि WhatsApp के 2 अरब से ज्यादा यूजर्स का डेटा रिस्क पर है, जिसमें भारत के करोड़ों यूजर्स शामिल हैं।
वेम्बू की टिप्पणी भारतीय टेक इंडस्ट्री के लिए खास मायने रखती है, जहां Zoho खुद एक प्राइवेसी-फोकस्ड कंपनी के रूप में जाना जाता है। Zoho का अपना मैसेजिंग ऐप Arattai, जो WhatsApp का प्रतिद्वंद्वी है, हाल ही में वायरल हुआ है। Arattai में अभी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है, लेकिन वेम्बू ने जोर देकर कहा कि उनकी कंपनी का पूरा SaaS बिजनेस ट्रस्ट पर आधारित है और वे कभी यूजर डेटा एक्सेस नहीं करते। उन्होंने Arattai पर इंटीमेट पिक्चर्स शेयर करने के सवाल पर भी जवाब दिया कि ट्रस्ट टेक्निकल फीचर्स से कहीं ज्यादा कीमती है।
इस विवाद ने टेक कंपनियों के बिजनेस मॉडल्स पर बहस छेड़ दी है। जहां Meta जैसे प्लेटफॉर्म्स फ्री सर्विस देकर यूजर डेटा से मुनाफा कमाते हैं, वहीं Zoho जैसी कंपनियां सब्सक्रिप्शन-बेस्ड मॉडल पर चलती हैं, जो प्राइवेसी को प्राथमिकता देता है। आंकड़ों के मुताबिक, Meta की 2025 की कमाई में ऐड रेवेन्यू का हिस्सा 95% से ज्यादा है, जबकि Zoho की ग्रोथ प्राइवेसी-केंद्रित प्रोडक्ट्स पर निर्भर है। भारतीय यूजर्स, जो WhatsApp पर सबसे ज्यादा एक्टिव हैं, अब वैकल्पिक ऐप्स की तलाश कर रहे हैं।
प्रमुख बिंदु: प्राइवेसी बनाम मुनाफा की जंग
Meta का मॉडल : विज्ञापनों पर निर्भर, जहां यूजर डेटा ऐड टारगेटिंग के लिए इस्तेमाल होता है। वेम्बू के अनुसार, यह प्राइवेसी को सेकेंडरी बनाता है।
मुकदमे का प्रभाव : अमेरिकी कोर्ट में चल रहा केस WhatsApp के एन्क्रिप्शन दावों को चुनौती दे रहा है, जो ग्लोबल यूजर्स के लिए चिंता का विषय है।
वेम्बू का स्टैंड : Zoho ट्रस्ट-बेस्ड बिजनेस चलाता है, जहां डेटा एक्सेस नहीं किया जाता। Arattai में जल्द एन्क्रिप्शन फीचर आएगा।
Elon Musk का समर्थन : Musk ने WhatsApp को असुरक्षित बताया, जो वेम्बू की बात को मजबूत करता है।
भारतीय संदर्भ : भारत में 50 करोड़ से ज्यादा WhatsApp यूजर्स हैं, जहां डेटा प्राइवेसी लॉ जैसे PDP Bill लागू होने से कंपनियां दबाव में हैं।
टेक इंडस्ट्री में प्राइवेसी ट्रेंड्स की तालिका
| कंपनी | बिजनेस मॉडल | प्राइवेसी फोकस | प्रमुख चुनौतियां |
|---|---|---|---|
| Meta (WhatsApp) | ऐड-बेस्ड | एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का दावा, लेकिन मुकदमे में संदेह | डेटा शेयरिंग और ऐड टारगेटिंग |
| Zoho (Arattai) | सब्सक्रिप्शन-बेस्ड | ट्रस्ट पर आधारित, एन्क्रिप्शन आने वाला | मार्केट शेयर बढ़ाना |
| X (Twitter) | ऐड और सब्सक्रिप्शन | Musk के अनुसार सुरक्षित | यूजर ट्रस्ट बनाए रखना |
| Signal | डोनेशन-बेस्ड | पूर्ण एन्क्रिप्शन | स्केलिंग और फंडिंग |
इस तालिका से साफ है कि ऐड-डिपेंडेंट कंपनियां प्राइवेसी को मुनाफे के नीचे रखती हैं, जबकि इंडिपेंडेंट मॉडल्स बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं। वेम्बू की प्रतिक्रिया ने भारतीय स्टार्टअप्स को प्रेरित किया है कि वे प्राइवेसी को बिजनेस का कोर बनाएं।
यूजर्स के लिए सलाह: प्राइवेसी कैसे सुरक्षित रखें
WhatsApp पर सेंसिटिव जानकारी शेयर करने से बचें, खासकर जब मुकदमा चल रहा हो।
वैकल्पिक ऐप्स जैसे Arattai या Signal चुनें, जहां एन्क्रिप्शन मजबूत है।
प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें: WhatsApp में लास्ट सीन, प्रोफाइल पिक्चर आदि को लिमिट करें।
PDP लॉ के तहत कंपनियों से डेटा डिलीट करने का राइट इस्तेमाल करें।
दो-कारक प्रमाणीकरण एक्टिवेट करें और ऐप अपडेट्स फॉलो करें।
वेम्बू का बयान टेक वर्ल्ड को याद दिलाता है कि मुनाफा भले ही बड़ा हो, लेकिन यूजर ट्रस्ट के बिना कोई कंपनी लंबे समय तक नहीं टिक सकती। Meta जैसी दिग्गजों पर बढ़ते दबाव से भविष्य में प्राइवेसी पॉलिसीज में बदलाव संभव हैं, लेकिन फिलहाल यूजर्स को सतर्क रहना चाहिए। Arattai जैसे भारतीय ऐप्स का उभार दर्शाता है कि लोकल सॉल्यूशंस ग्लोबल चुनौतियों का जवाब दे सकते हैं।
Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों से प्राप्त खबरों, रिपोर्टों और टिप्स पर आधारित है।


