चांदनी चौक की पुरानी इलेक्ट्रिकल दुकान से आधुनिक हवेल्स फैक्टरी तक की यात्रा दिखाती इमेज

सिर्फ 7 लाख में बिकी चांदनी चौक की ये छोटी सी इलेक्ट्रिकल दुकान, फिर कैसे बनी 80 हजार करोड़ की कंपनी?

“चांदनी चौक की एक छोटी इलेक्ट्रिकल दुकान से शुरू हुई हवेल्स इंडिया की यात्रा आज 82 हजार करोड़ की मार्केट कैप वाली कंपनी तक पहुंच चुकी है। किमत राय गुप्ता ने 1971 में 7 लाख रुपये में ब्रांड खरीदा और ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक विस्तार किया। ब्रांडिंग, इनोवेशन और ग्लोबल एक्विजिशन जैसे स्ट्रैटेजी से कंपनी ने इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री में लीडरशिप हासिल की, जबकि चुनौतियां जैसे कॉम्पिटिशन और मार्केट शिफ्ट को हैंडल किया।”

चांदनी चौक के भागीरथ प्लेस में 1958 में हवेली राम गांधी ने एक छोटी इलेक्ट्रिकल ट्रेडिंग दुकान शुरू की थी, जो मुख्य रूप से स्विचगियर और वायरिंग एक्सेसरीज बेचती थी। 1971 में किमत राय गुप्ता, जो पहले एक स्कूल टीचर थे और फिर ट्रेडर बने, ने इस ब्रांड को सिर्फ 7 लाख रुपये में खरीद लिया। उस समय यह दुकान सालाना कुछ लाख का ही टर्नओवर करती थी, लेकिन गुप्ता ने इसमें अपार संभावनाएं देखीं। उन्होंने शुरुआत में ट्रेडिंग पर फोकस किया, दिल्ली के बाजारों से इलेक्ट्रिकल गुड्स खरीदकर बेचना शुरू किया।

1980 के दशक में कंपनी ने मैन्युफैक्चरिंग में कदम रखा। सबसे पहले दिल्ली के बाहर फैक्टरियां लगाईं, जहां मिनिएचर सर्किट ब्रेकर्स (MCB) और अन्य सेफ्टी डिवाइसेज बनाए जाने लगे। यह कदम महत्वपूर्ण था क्योंकि उस समय भारत में इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ रही थी, लेकिन क्वालिटी कंट्रोल की कमी थी। हवेल्स ने आईएसआई सर्टिफिकेशन पर जोर दिया, जिससे ब्रांड की विश्वसनीयता बढ़ी। 1990 तक कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ तक पहुंच गया।

2000 के दशक में हवेल्स ने ब्रांडिंग पर निवेश किया। टेलीविजन ऐड्स में अमिताभ बच्चन जैसे सेलिब्रिटी को ब्रांड एंबेसडर बनाया, जिससे कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स सेगमेंट में पहचान मिली। कंपनी ने प्रोडक्ट रेंज बढ़ाई – फैन, लाइटिंग, वाटर हीटर्स और केबल्स तक। 2007 में सिल्वेनिया का एक्विजिशन एक टर्निंग पॉइंट था, जिससे ग्लोबल प्रेजेंस मिला। यह डील 1,050 करोड़ रुपये की थी और यूरोपियन मार्केट में एंट्री दी।

आज हवेल्स इंडिया की मार्केट कैप 82,306 करोड़ रुपये है, जैसा कि NSE पर लेटेस्ट डेटा से पता चलता है। कंपनी का रेवेन्यू FY 2025 में 22,366 करोड़ रहा, जबकि प्रॉफिट 1,483 करोड़। स्टॉक प्राइस हाल ही में 1,300 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले साल से 15% की ग्रोथ दिखाता है। कंपनी अब 70 से ज्यादा देशों में ऑपरेट करती है, जिसमें 6,500 एम्प्लॉयी और 20,000 ट्रेड पार्टनर्स शामिल हैं।

कुंजी माइलस्टोन्स की टेबल:

वर्षमहत्वपूर्ण घटनाप्रभाव
19717 लाख में हवेल्स ब्रांड खरीदाट्रेडिंग से शुरुआत, दिल्ली बेस्ड बिजनेस
1983पहली फैक्टरी साहिबाबाद में स्थापितमैन्युफैक्चरिंग में एंट्री, MCB प्रोडक्शन
1993स्टॉक मार्केट में लिस्टिंगकैपिटल रेजिंग, निवेशकों का विश्वास
2007सिल्वेनिया एक्विजिशनग्लोबल एक्सपैंशन, यूरोप और लैटिन अमेरिका में पहुंच
2010लॉयड ब्रांड का एक्विजिशनकंज्यूमर ड्यूरेबल्स में विस्तार, AC और TV सेगमेंट
2016रीब्रैंडिंग और डिजिटल मार्केटिंगऑनलाइन सेल्स बढ़ी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर प्रेजेंस
2025सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स लॉन्चसोलर लाइटिंग और EV चार्जर्स, ग्रीन एनर्जी फोकस

इन माइलस्टोन्स से पता चलता है कि कंपनी ने हर दशक में स्ट्रैटेजिक शिफ्ट किए। उदाहरण के लिए, 2010 में लॉयड का अधिग्रहण करके हवेल्स ने होम अप्लायंसेज मार्केट में एंट्री की, जहां कॉम्पिटिशन जैसे फिलिप्स और सीमेंस से मुकाबला किया। कंपनी ने R&D पर सालाना 500 करोड़ निवेश किया, जिससे इनोवेटिव प्रोडक्ट्स जैसे स्मार्ट लाइटिंग और IoT एनेबल्ड स्विचेज आए।

चुनौतियां भी कम नहीं थीं। 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस में सिल्वेनिया का एक्विजिशन रिस्की था, लेकिन गुप्ता फैमिली ने इसे टर्नअराउंड किया। भारत में इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री में चाइनीज इंपोर्ट्स की वजह से प्राइस वॉर हुई, लेकिन हवेल्स ने लोकल मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी पर फोकस रखा। COVID-19 के दौरान सप्लाई चेन डिसरप्शन हुआ, लेकिन कंपनी ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से रिकवर किया – ऑनलाइन सेल्स 30% बढ़ी।

ग्रोथ स्ट्रैटेजी के कुंजी पॉइंट्स:

ब्रांड बिल्डिंग: सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और IPL स्पॉन्सरशिप से विजिबिलिटी बढ़ाई। आज हवेल्स का ब्रांड वैल्यू 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा है।

डाइवर्सिफिकेशन: सिर्फ इलेक्ट्रिकल्स से निकलकर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स तक पहुंच। रेवेन्यू का 60% अब कंज्यूमर सेगमेंट से आता है।

ग्लोबल एक्सपैंशन: 13 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स भारत में और 4 विदेश में। एक्सपोर्ट रेवेन्यू 15% है।

इनोवेशन: 2025 में लॉन्च किए गए EV चार्जिंग स्टेशंस और स्मार्ट होम सॉल्यूशंस से फ्यूचर-प्रूफिंग। कंपनी ने 200 पेटेंट्स फाइल किए हैं।

सस्टेनेबिलिटी: कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए सोलर पावर प्लांट्स लगाए, जिससे एनर्जी कॉस्ट 20% घटी।

फाइनेंशियल मैनेजमेंट: डेब्ट-फ्री बैलेंस शीट, ROE 20% से ऊपर। डिविडेंड पेआउट रेशियो 40%।

मार्केट एडाप्टेशन: 5G और IoT ट्रेंड्स को कैप्चर करते हुए प्रोडक्ट्स अपडेट किए, जैसे वायरलेस स्विचेज।

अनिल राय गुप्ता, जो अब चेयरमैन हैं, ने फैमिली बिजनेस को प्रोफेशनल मैनेजमेंट में ट्रांसफॉर्म किया। कंपनी अब NSE 500 में टॉप परफॉर्मर्स में शामिल है, जहां पिछले 5 साल में स्टॉक रिटर्न 150% रहा। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2030 तक मार्केट कैप 1.5 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, अगर EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेगमेंट में ग्रोथ जारी रही।

फाइनेंशियल हाइलाइट्स की टेबल (FY 2025):

मेट्रिकवैल्यू (करोड़ रुपये में)ग्रोथ (%)
रेवेन्यू22,36618
EBITDA2,50022
नेट प्रॉफिट1,48315
EPS23.5012
मार्केट कैप82,30610 (YTD)
डिविडेंड पर शेयर8.00

यह डेटा दिखाता है कि कंपनी की ग्रोथ स्टेबल है,尽管 कॉम्पिटिटिव मार्केट में। हवेल्स ने हाल ही में उत्तराखंड में नई फैक्टरी लगाई, जो 1,000 करोड़ की इन्वेस्टमेंट से EV कंपोनेंट्स बनाएगी। इससे रोजगार के 2,000 नए अवसर पैदा होंगे।

कंपनी की सक्सेस की कुंजी लीडरशिप में है – किमत राय गुप्ता की विजन से शुरू होकर, आज की जनरेशन तक। उन्होंने कभी रिस्क से पीछे नहीं हटे, चाहे वह ग्लोबल एक्विजिशन हो या न्यू टेक्नोलॉजी एडॉप्शन। हवेल्स अब भारत की टॉप इलेक्ट्रिकल कंपनीज में से एक है, जो मेक इन इंडिया को प्रमोट करती है।

Disclaimer: यह लेख सूचना उद्देश्यों के लिए है और निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। सभी डेटा उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।

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