बजट 2026 में NBFC को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में मान्यता देकर बैंक लोन पर कम ब्याज दरें सुनिश्चित करने की उम्मीद है, जिससे MSME और ग्रामीण उधारकर्ताओं को सस्ता क्रेडिट मिल सकेगा। MSME सेक्टर में 25 लाख करोड़ रुपये का क्रेडिट गैप भरने के लिए नई गारंटी स्कीम्स और SIDBI से सस्ता रिफाइनेंस प्रस्तावित है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और पहले-बार उधारकर्ताओं पर फोकस रहेगा।
केंद्रीय बजट 2026 में NBFC को प्राथमिकता क्षेत्र के प्रमुख सक्षमकर्ता के रूप में मान्यता देने की मांग तेज हो गई है, जो MSME और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मददगार साबित होगी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बैंक NBFC को कम दरों पर फंडिंग उपलब्ध करा सकेंगे, जिसका सीधा लाभ छोटे व्यवसायों और गांवों तक पहुंचेगा। NBFC वर्तमान में MSME क्रेडिट का 20-25 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं, लेकिन ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में पहले-बार उधारकर्ताओं को 30-40 प्रतिशत तक लोन प्रदान करते हैं।
MSME सेक्टर में क्रेडिट गैप 25 लाख करोड़ रुपये का होने से लोन रिजेक्शन रेट 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसे कम करने के लिए बजट में क्रेडिट गारंटी कवरेज बढ़ाने की योजना है। इससे स्टार्टअप्स और एक्सपोर्टर्स को बिना कोलेटरल के लोन मिल सकेगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल फंडिंग मैकेनिज्म प्रस्तावित हैं। NBFC-MSME कैटेगरी बनाने से SIDBI के माध्यम से सस्ता रिफाइनेंस उपलब्ध होगा, जो ब्याज दरों को 8-10 प्रतिशत तक कम कर सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सस्टेनेबल इनकम को बढ़ावा देने के लिए बजट में माइक्रोफाइनेंस और गोल्ड लोन NBFC को प्राथमिकता सेक्टर लेंडिंग स्टेटस देने की उम्मीद है, जिससे फंडिंग कॉस्ट घटेगी और सेमी-अर्बन इलाकों में पहुंच बढ़ेगी। पर्सनल लोन, एजुकेशन फाइनेंस और MSME क्रेडिट सेगमेंट 15-18 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण उधारकर्ताओं के लिए क्रेडिट स्कोरिंग फ्रेमवर्क को मजबूत करने से औपचारिक लेंडिंग बढ़ेगी।
प्रमुख उम्मीदें और प्रभाव:
क्रेडिट एक्सेस में सुधार: MSME के लिए डेडिकेटेड माइक्रो क्रेडिट फैसिलिटी कार्ड्स जारी करने से ब्याज दरें कम होंगी और लोन अप्रूवल 7-15 दिनों में हो सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में फर्स्ट-टाइम बॉरोअर्स को प्राथमिकता मिलने से अनौपचारिक लेंडिंग घटेगी।
NBFC के लिए पॉलिसी सपोर्ट: बैंक लेंडिंग को NBFC के लिए प्राथमिकता सेक्टर में शामिल करने से फंडिंग एफिशिएंसी बढ़ेगी, खासकर ग्रामीण MSME के लिए। रिस्क-शेयरिंग मैकेनिज्म से बैंक NBFC को ज्यादा आत्मविश्वास से फंड देंगे।
ग्रामीण विकास पर फोकस: महिलाओं की उद्यमिता और ग्रामीण लाइवलीहुड्स को सपोर्ट करने के लिए बजट में रूरल क्रेडिट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा, जिसमें फाइनेंशियल लिटरेसी और डिजिटल लेंडिंग रूल्स शामिल हैं।
टैक्स और रिकवरी में राहत: NBFC के लिए फास्टर रिकवरी टूल्स और टैक्स रिलीफ से लेंडिंग मोमेंटम बनेगा, जबकि MSME के लिए GST रिफॉर्म्स से कैश फ्लो सुधरेगा।
| सेक्टर | प्रमुख उम्मीद | संभावित प्रभाव | अनुमानित लाभार्थी |
|---|---|---|---|
| MSME | क्रेडिट गारंटी बढ़ोतरी और सस्ता रिफाइनेंस | 5-10 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंडिंग अनलॉक | 60 प्रतिशत छोटे व्यवसाय, खासकर ग्रामीण |
| NBFC | प्राथमिकता सेक्टर स्टेटस और बैंक लेंडिंग में छूट | फंडिंग कॉस्ट में 2-3 प्रतिशत की कमी | 20-25 प्रतिशत MSME क्रेडिट सप्लाई बढ़ोतरी |
| ग्रामीण क्षेत्र | महिलाओं और फर्स्ट-टाइम बॉरोअर्स के लिए स्पेशल स्कीम्स | रूरल इनकम में 15-18 प्रतिशत ग्रोथ | सेमी-अर्बन और गांवों के 30-40 प्रतिशत उधारकर्ता |
| माइक्रोफाइनेंस | गोल्ड लोन NBFC को PSL स्टेटस | पहुंच में विस्तार और कम ब्याज दरें | ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता में बढ़ोतरी |
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने के लिए PLI स्कीम्स का विस्तार MSME को लाभ पहुंचाएगा, जबकि हाई-ग्रोथ सेगमेंट्स जैसे पर्सनल लोन और MSME क्रेडिट को प्रोत्साहन मिलने से ओवरऑल लेंडिंग 12-18 प्रतिशत बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में क्रेडिट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से रिस्पॉन्सिबल लेंडिंग बढ़ेगी, जिसमें फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम्स शामिल हैं।
NBFC सेक्टर में MSME क्रेडिट पेनेट्रेशन को बढ़ाने के लिए पॉलिसी सपोर्ट जरूरी है, क्योंकि हालिया बजट मेजर्स ने गारंटी कवरेज बढ़ाया है लेकिन बैंक अभी भी कोलेटरल की मांग करते हैं। बजट में हेल्प डेस्क्स सेटअप करने से रिजेक्टेड लोन एप्लीकेशंस की सहायता मिलेगी, जबकि डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन से प्रोसेसिंग टाइम घटेगा।
ग्रामीण MSME और सेल्फ-एम्प्लॉयड इंडिविजुअल्स के लिए क्रेडिट फ्लो को सुगम बनाने से अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी, खासकर कंजम्प्शन और स्टेबिलिटी के संदर्भ में। उद्योग लीडर्स का कहना है कि बजट में रूरल और सेमी-अर्बन एंटरप्रेन्योर्स को अनइंटरप्टेड क्रेडिट सुनिश्चित करने के लिए स्ट्रक्चर्ड रिफाइनेंस मैकेनिज्म जरूरी है।
की पॉइंट्स MSME और ग्रामीण क्रेडिट में सुधार के लिए:
क्रेडिट गैप को भरने के लिए 25 लाख करोड़ रुपये का टारगेटेड फंडिंग।
NBFC को सस्ता बैंक लेंडिंग उपलब्ध कराने से ग्रामीण पहुंच में 40 प्रतिशत बढ़ोतरी।
महिलाओं की उद्यमिता को सपोर्ट करने वाली स्कीम्स से रूरल लाइवलीहुड्स मजबूत।
GST रिफॉर्म्स से MSME कैश फ्लो में सुधार और इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर फिक्स।
डिजिटल लेंडिंग रूल्स से सेफर और फास्टर क्रेडिट डिस्बर्सल।
SIDBI से रिफाइनेंस बढ़ाने से ब्याज दरें 8-10 प्रतिशत तक कम।
प्राथमिकता सेक्टर में NBFC शामिल करने से MSME ग्रोथ में तेजी।
बजट 2026 में इन मेजर्स से MSME और ग्रामीण सेक्टर में रेजिलिएंस बढ़ेगी, जबकि NBFC की भूमिका सिस्टेमिक रूप से मजबूत होगी। एफिशिएंट रिस्क-शेयरिंग से बैंक और NBFC के बीच कोऑपरेशन बढ़ेगा, जो अंततः छोटे व्यवसायों और गांवों को सस्ते लोन का रास्ता साफ करेगा।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है।


