“मार्केट पार्टिसिपेंट्स यूनियन बजट 2026 से पहले LTCG टैक्स रेट घटाने, एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाने और STT में राहत की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में LTCG 12.5% और STCG 20% है, जबकि डिविडेंड इनकम पर भी टैक्स सुधार की उम्मीद। विशेषज्ञों का मानना है कि राहत सीमित हो सकती है, लेकिन निवेशकों को टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग का फायदा उठाना चाहिए।”
शेयर मार्केट के निवेशक और ट्रेडर्स यूनियन बजट 2026 से कैपिटल गेंस टैक्स में बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। हालिया प्री-बजट डिमांड्स में LTCG (Long-Term Capital Gains) टैक्स रेट को 12.5% से घटाकर 10% करने की मांग प्रमुख है। साथ ही, LTCG पर टैक्स-फ्री एग्जेम्प्शन लिमिट को मौजूदा ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख या उससे अधिक करने का सुझाव दिया गया है। STCG (Short-Term Capital Gains) को भी 20% से कम करने की अपील की गई है, जो पहले 15% था।
मार्केट एसोसिएशंस जैसे कि ANMI और BSE ब्रोकर्स फोरम ने सरकार से STT (Securities Transaction Tax) में कटौती की मांग की है, क्योंकि बढ़ती ट्रांजैक्शन कॉस्ट्स से ट्रेडिंग वॉल्यूम प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, STT को 0.01% से नीचे लाने से डेरिवेटिव्स और इक्विटी ट्रेडिंग में भागीदारी बढ़ सकती है। डिविडेंड इनकम पर टैक्स को भी रेशनलाइज करने की डिमांड है, जहां हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स को 10% से ऊपर की दरों से राहत चाहिए।
निवेशकों का तर्क है कि ये बदलाव कैपिटल मार्केट को बूस्ट देंगे, खासकर जब सेंसेक्स हाल में 85,000 के पार पहुंचा है। यदि LTCG होल्डिंग पीरियड को सभी एसेट क्लासेस के लिए यूनिफॉर्म किया जाए, तो रियल एस्टेट और इक्विटी के बीच बैलेंस बनेगा। हालांकि, फाइनेंशियल एनालिस्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि सरकारी राजस्व की जरूरतों के चलते राहत सीमित रह सकती है।
मौजूदा vs मांगी गई टैक्स राहत
प्रमुख डिमांड्स की सूची
| पैरामीटर | मौजूदा दर/लिमिट | मांगी गई राहत |
|---|---|---|
| LTCG टैक्स रेट | 12.5% | 10% या कम |
| LTCG एग्जेम्प्शन | ₹1.25 लाख | ₹2 लाख या अधिक |
| STCG टैक्स रेट | 20% | 15% या कम |
| STT (इक्विटी) | 0.1% | 0.01% या कटौती |
| डिविडेंड टैक्स | 10% (TDS) | रेट घटाना या एग्जेम्प्शन बढ़ाना |
LTCG रेशनलाइजेशन : इंडेक्सेशन बेनिफिट्स की रिस्टोरेशन, जो पहले हटा दिया गया था, ताकि इन्फ्लेशन एडजस्टमेंट से टैक्स बोझ कम हो।
STT रिलीफ : F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ाने के बजाय घटाना, क्योंकि हालिया हाइक्स से रिटेल ट्रेडर्स दूर हो रहे हैं।
डिविडेंड टैक्स सुधार : कॉर्पोरेट डिविडेंड पर डबल टैक्सेशन खत्म करने की मांग, जहां कंपनियां DDT पहले ही पे कर चुकी हैं।
टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग : मार्च 2026 से पहले ₹1.25 लाख की एग्जेम्प्शन का उपयोग करने की सलाह, जहां निवेशक घाटे वाले स्टॉक्स बेचकर गेंस ऑफसेट कर सकते हैं।
यूनिफॉर्म होल्डिंग : इक्विटी के लिए 1 साल, जबकि डेब्ट के लिए 3 साल की बजाय सभी के लिए 2 साल का पीरियड।
इन डिमांड्स से मार्केट सेंटिमेंट पॉजिटिव हो सकता है, लेकिन सरकारी फिस्कल डेफिसिट टारगेट्स के चलते पूरी तरह लागू होना मुश्किल। ट्रेडर्स को बजट अनाउंसमेंट तक पोर्टफोलियो रिव्यू करने की सलाह दी जा रही है।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट विभिन्न सोर्सेज और टिप्स पर आधारित है।


