“फॉक्सवैगन इंडिया ने वर्टस सेडान और टैगुन एसयूवी के 1.5-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन वाले 6-स्पीड मैनुअल वेरिएंट्स को चुपचाप बंद कर दिया है। अब ये मॉडल्स केवल 7-स्पीड डीएसजी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध होंगे, जिससे एंट्री प्राइस बढ़ गई है। 1.5 TSI इंजन अब अधिक प्रीमियम सेगमेंट में शिफ्ट हो रहा है, जबकि 1.0 TSI वेरिएंट्स में मैनुअल ऑप्शन बरकरार है।”
फॉक्सवैगन इंडिया ने अपने पॉपुलर मॉडल्स वर्टस और टैगुन के 1.5 TSI इंजन वाले मैनुअल वेरिएंट्स को डिसकंटिन्यू कर दिया है। यह बदलाव कंपनी की बिजनेस एफिशिएंसी को बढ़ाने और सेल्स ट्रेंड्स के आधार पर लिया गया फैसला है, जहां मैनुअल वेरिएंट्स की डिमांड कम हो रही थी। अब 150hp वाला 1.5-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन केवल 7-स्पीड ड्यूल-क्लच ऑटोमैटिक (DSG) के साथ मिलेगा, जो रिस्पॉन्सिव ड्राइविंग और हाई स्पीड पर बेहतर परफॉर्मेंस देता है।
इस बदलाव से वर्टस GT प्लस और टैगुन GT प्लस जैसे टॉप वेरिएंट्स की एंट्री प्राइस बढ़ गई है। पहले मैनुअल ऑप्शन से ये मॉडल्स अधिक अफोर्डेबल थे, लेकिन अब DSG की वजह से कीमतों में उछाल आया है। कंपनी ने यह कदम उठाया क्योंकि 1.5 TSI मैनुअल की सेल्स में गिरावट देखी गई, जबकि ऑटोमैटिक वेरिएंट्स की डिमांड मजबूत बनी हुई है। एंथुजियास्ट ड्राइवर्स के लिए यह निराशा का कारण हो सकता है, लेकिन DSG की स्मूथ शिफ्टिंग और पैडल शिफ्टर्स से स्पोर्टी फील मिलती रहेगी।
प्राइस कंपैरिजन: पुरानी vs नई कीमतें (एक्स-शोरूम)
| मॉडल | पुरानी एंट्री प्राइस (1.5 TSI MT) | नई एंट्री प्राइस (1.5 TSI DSG) |
|---|---|---|
| वर्टस | ₹17.09 लाख – ₹17.33 लाख | ₹18.80 लाख |
| टैगुन | ₹17.04 लाख | ₹18.95 लाख |
यह प्राइस बढ़ोतरी 1.5 TSI को अधिक प्रीमियम पोजिशनिंग देती है, जहां फोकस हाई-परफॉर्मेंस और कन्वीनियंस पर है। अगर आप मैनुअल गियरबॉक्स पसंद करते हैं, तो अब विकल्प केवल 1.0-लीटर TSI इंजन वाले वेरिएंट्स में बचा है, जो 115hp की पावर देता है और अधिक फ्यूल-एफिशिएंट है, लेकिन 1.5 TSI की स्पीड और थ्रिल नहीं मैच कर पाता।
क्या हैं अल्टरनेटिव ऑप्शंस?
स्कोडा कुशाक और स्लाविया : ये मॉडल्स भी 1.5 TSI के साथ DSG ऑफर करते हैं, लेकिन पिछले साल मैनुअल वेरिएंट्स बंद हो चुके हैं। प्राइस रेंज समान है।
हुंडई वर्ना और क्रेटा : 1.5-लीटर इंजन के साथ मैनुअल उपलब्ध, लेकिन टर्बो नहीं। कीमतें ₹15 लाख से शुरू।
किया सेल्टोस और सोनेट : टर्बो इंजन के साथ मैनुअल ऑप्शन, लेकिन DSG जैसी एडवांस्ड ट्रांसमिशन नहीं। ये अल्टरनेटिव्स भारतीय मार्केट में कॉम्पिटीटिव हैं, जहां EV ट्रेंड बढ़ रहा है, लेकिन पेट्रोल इंजन की डिमांड अभी मजबूत है।
फॉक्सवैगन का यह फैसला ऑटो इंडस्ट्री के ट्रेंड को रिफ्लेक्ट करता है, जहां ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की हिस्सेदारी 60% से ज्यादा हो गई है। 1.5 TSI अब फोकस्ड परफॉर्मेंस सेगमेंट में रहेगा, जहां सिटी ट्रैफिक में DSG की ईज ऑफ यूज अहम है। अगर आप अपग्रेड प्लान कर रहे हैं, तो DSG वेरिएंट्स में बेहतर रिसेल वैल्यू और लो मेंटेनेंस की उम्मीद की जा सकती है।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों, रिसर्च और इंडस्ट्री ट्रेंड्स पर आधारित है।


