“हरिद्वार में देहरादून विजिलेंस टीम ने जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य और उनके सहायक गौरव शर्मा को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एक राशन डीलर की शिकायत पर जिला पूर्ति कार्यालय में की गई, जहां रिश्वत रकम बरामद हुई और दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।”
देहरादून से आई विजिलेंस टीम ने हरिद्वार जिला पूर्ति कार्यालय में छापेमारी कर जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) श्याम आर्य को उनके सहायक गौरव शर्मा के साथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। टीम ने मौके से 50 हजार रुपये की रकम बरामद की, जो एक राशन डीलर से लाइसेंस नवीनीकरण के बदले मांगी गई थी।
विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता राशन डीलर ने DSO पर आरोप लगाया कि उनके लाइसेंस संबंधी कार्य को अटकाने के लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी। टीम ने जाल बिछाकर DSO के कार्यालय में प्रवेश किया और रिश्वत लेनदेन के दौरान दोनों को पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई, जिसमें रिश्वत की पूरी प्रक्रिया का खुलासा हुआ।
इस कार्रवाई से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया, क्योंकि DSO जैसे पद पर तैनात अधिकारी की संलिप्तता से भ्रष्टाचार की गहराई उजागर हुई। विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज कर लिया है, और दोनों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।
मुख्य तथ्य:
आरोपित: जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य और सहायक गौरव शर्मा।
रिश्वत रकम: 50,000 रुपये।
कारण: राशन डीलर के लाइसेंस नवीनीकरण में अनुकूल कार्रवाई के बदले।
कार्रवाई स्थल: हरिद्वार जिला पूर्ति कार्यालय।
कानूनी कदम: गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और मुकदमा दर्ज।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विजिलेंस टीम | देहरादून से विशेष टीम, जिसमें इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल। |
| बरामदगी | 50,000 रुपये नकद, कार्यालय से दस्तावेज जब्त। |
| प्रभाव | जिला स्तर पर भ्रष्टाचार जांच तेज करने की संभावना। |
| आगे की प्रक्रिया | आरोपियों की रिमांड और संपत्ति जांच। |
इस घटना से उत्तराखंड में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को बल मिला है, जहां हाल के महीनों में सरकारी अधिकारियों पर कई ऐसी कार्रवाइयां हुई हैं। विजिलेंस ने जनता से अपील की कि भ्रष्टाचार की शिकायत बेझिझक दर्ज कराएं।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न सूत्रों पर आधारित है।


