केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8th Pay Commission में फिटमेंट फैक्टर 3.0 से 3.25 तक की मांग तेज हो गई है। NC-JCM की ड्राफ्टिंग कमिटी ने हाल ही में मीटिंग में ग्रेजुएटेड फिटमेंट स्ट्रक्चर, 7% एनुअल इंक्रीमेंट और OPS बहाली जैसे प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति जताई। न्यूनतम वेतन 18,000 से बढ़ाकर 54,000 रुपये तक करने की मांग प्रमुख है, जबकि उच्च स्तरों पर पे कम्प्रेशन रोकने के लिए अलग-अलग फैक्टर प्रस्तावित। रिपोर्ट 2027 तक आने की संभावना, लेकिन 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही है, arrears के साथ।
8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर पर बड़ा खुलासा, कर्मचारियों का वेतन फॉर्मूला बदल सकता है; NC-JCM का पूरा प्लान
8th Pay Commission की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। हाल ही में दिल्ली में हुई NC-JCM (स्टाफ साइड) की ड्राफ्टिंग कमिटी की महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को लेकर मजबूत मांग रखी है। विभिन्न यूनियनों ने एकसमान फिटमेंट फैक्टर की बजाय मल्टी-लेवल या ग्रेजुएटेड फिटमेंट फैक्टर की वकालत की है, ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों को ज्यादा राहत मिले और सीनियर लेवल पर पे कम्प्रेशन न हो।
FNPO जैसी प्रमुख संस्थाओं ने प्रस्ताव दिया है कि लेवल 1 से 5 तक फिटमेंट फैक्टर 3.0 हो, जिससे न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर 54,000 रुपये हो जाए। लेवल 6 से 12 तक 3.05 से 3.10, लेवल 13 से 15 तक 3.05 से 3.15 और लेवल 16 से ऊपर 3.25 तक का फैक्टर सुझाया गया है। यह प्रस्ताव Akroyd फॉर्मूला पर आधारित है, जिसमें न्यूनतम वेतन को जरूरत-आधारित न्यूनतम मजदूरी से जोड़ा गया है।
NC-JCM की बैठक में अन्य प्रमुख मांगें शामिल हैं:
एनुअल इंक्रीमेंट को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 7% करना या बायएनुअल इंक्रीमेंट लागू करना।
रिटायरमेंट पर लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 दिनों से बढ़ाकर 400 दिन करना।
फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 सदस्यों तक करना, ताकि हाउस रेंट अलाउंस और अन्य लाभ बढ़ें।
Old Pension Scheme (OPS) की बहाली को फिर से प्रमुखता देना।
पेंशनर्स के लिए भी समान फिटमेंट फैक्टर लागू करना, जिससे करीब 68 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स लाभान्वित हों।
यह मेमोरेंडम 8th Pay Commission की चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा। कमिशन को 18 महीने का समय दिया गया है, जिससे रिपोर्ट मिड-2027 तक आने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार और यूनियनों ने 1 जनवरी 2026 को प्रभावी तारीख मानी है, जिससे देरी होने पर arrears मिलेंगे।
फिटमेंट फैक्टर का प्रभाव वेतन मैट्रिक्स पर सीधा पड़ेगा। उदाहरण के लिए:
| पे लेवल | मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे (7th CPC) | प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर | संभावित नया न्यूनतम बेसिक पे |
|---|---|---|---|
| लेवल 1 | 18,000 रुपये | 3.0 | 54,000 रुपये |
| लेवल 5 | 29,200 रुपये | 3.0 | 87,600 रुपये |
| लेवल 10 | 56,100 रुपये | 3.10 (मध्यम) | 1,73,910 रुपये |
| लेवल 18 | 2,50,000 रुपये | 3.25 | 8,12,500 रुपये |
(नोट: ये आंकड़े यूनियनों के प्रस्तावों पर आधारित हैं; अंतिम फैसला कमिशन पर निर्भर।)
कर्मचारी संगठन तर्क देते हैं कि 7th Pay Commission में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, लेकिन DA मर्ज होने के बाद असली बढ़ोतरी कम रही। अब महंगाई और लिविंग कॉस्ट को देखते हुए 3.0 से 3.25 का फैक्टर जरूरी है। इससे न केवल बेसिक पे बढ़ेगा, बल्कि HRA, TA और अन्य अलाउंस भी प्रभावित होंगे।
कमिशन की रिपोर्ट के बाद सरकार की मंजूरी और संसदीय प्रक्रिया के बाद ही अंतिम फॉर्मूला तय होगा। लेकिन NC-JCM का यह प्लान वेतन संरचना में बड़ा बदलाव ला सकता है, खासकर निचले और मध्यम स्तर के कर्मचारियों के लिए।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगों और उपलब्ध अपडेट्स पर आधारित है। अंतिम फैसला 8th Pay Commission की सिफारिशों और सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।


