“सोने और चांदी की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है, जहां चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि सोने का रेट 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वैश्विक तनाव, मुद्रास्फीति और भारतीय बाजार की मांग ने इन धातुओं को नए शिखर पर पहुंचाया, जिससे निवेशक और ज्वेलरी सेक्टर प्रभावित हो रहे हैं।”
सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का दौर जारी है, जहां चांदी ने 4,20,500 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में 5% से अधिक की वृद्धि देखी गई, जो औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाती है। वहीं, सोने का रेट 1,50,200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो पिछले सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करता है। वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमजोरी और जियोपॉलिटिकल टेंशन्स ने इन कीमतों को और ऊपर धकेला है।
भारतीय बाजार में सोने की मांग मुख्य रूप से त्योहारों और शादियों के सीजन से प्रभावित हो रही है, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय कारकों ने इसे और तेज कर दिया। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के नए दौर और मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने निवेशकों को गोल्ड और सिल्वर की ओर आकर्षित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावना ने भी इन धातुओं को सपोर्ट प्रदान किया। चांदी की कीमतों में विशेष रूप से सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की बढ़ती डिमांड ने योगदान दिया, जहां भारत में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स की संख्या दोगुनी हो गई है।
कीमतों की तुलना में देखें तो पिछले वर्ष की तुलना में सोने में 40% और चांदी में 60% की वृद्धि दर्ज की गई। MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स ने 1,48,000 रुपये से ऊपर ट्रेडिंग की, जबकि स्पॉट मार्केट में दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में रेट्स में अंतर देखा गया। निवेशकों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उच्च कीमतें ज्वेलरी खरीद को प्रभावित कर रही हैं, लेकिन ETF और डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेडिंग वॉल्यूम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
प्रमुख शहरों में सोने और चांदी के रेट्स (रुपये में)
| शहर | सोना (प्रति 10 ग्राम, 24 कैरेट) | चांदी (प्रति किलो) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 1,50,200 | 4,20,500 |
| मुंबई | 1,49,800 | 4,19,800 |
| कोलकाता | 1,50,000 | 4,20,200 |
| चेन्नई | 1,49,900 | 4,19,500 |
| बेंगलुरु | 1,50,100 | 4,20,000 |
| हैदराबाद | 1,49,700 | 4,19,300 |
ये रेट्स स्पॉट मार्केट पर आधारित हैं, जहां दिल्ली में सबसे ऊंची कीमतें देखी जा रही हैं, मुख्य रूप से आयात शुल्क और लोकल डिमांड के कारण। मुंबई में थोड़ा कम रेट होने के बावजूद, ट्रेडिंग वॉल्यूम सबसे अधिक है, जो बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के डेटा से पता चलता है।
चांदी की कीमतों में यह उछाल विशेष रूप से इंडस्ट्रियल सेक्टर को प्रभावित कर रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरिंग में चांदी का उपयोग बढ़ा है, जहां टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसे ब्रांड्स ने उत्पादन बढ़ाया है। वैश्विक स्तर पर सिल्वर माइनिंग में कमी आई है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई। भारत में चांदी के आयात में 30% की वृद्धि दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और पेरू से हो रहा है।
सोने के मामले में, आरबीआई की गोल्ड रिजर्व्स में वृद्धि ने बाजार को स्थिरता प्रदान की, लेकिन व्यक्तिगत निवेशकों के लिए उच्च कीमतें एक बाधा बन रही हैं। गोल्ड लोन कंपनियां जैसे मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस ने लोन डिस्बर्समेंट में 25% की बढ़ोतरी रिपोर्ट की, क्योंकि लोग अपनी पुरानी ज्वेलरी को गिरवी रखकर कैश निकाल रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव जारी रहा, तो सोना 1,60,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
कीमतों में उछाल के प्रमुख कारण
जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स : यूक्रेन-रूस संघर्ष और मध्य पूर्व में इजराइल-हमास टेंशन्स ने सुरक्षित निवेश की तलाश बढ़ाई।
मुद्रास्फीति का दबाव : वैश्विक इन्फ्लेशन रेट 5% से ऊपर होने से निवेशक गोल्ड-सिल्वर को हेज के रूप में देख रहे हैं।
भारतीय डिमांड : अक्षय तृतीया और दीवाली जैसे त्योहारों से पहले मांग में स्पाइक, जहां रिटेल सेल्स 20% बढ़ी।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट : यूएस डॉलर इंडेक्स 90 के नीचे आने से कमोडिटीज महंगी हुईं।
इंडस्ट्रियल यूज : चांदी के लिए सोलर पैनल और 5G टेक्नोलॉजी में बढ़ता उपयोग, जहां भारत का सोलर कैपेसिटी 100 GW पार करने वाला है।
स्टॉक मार्केट की अस्थिरता : सेंसेक्स में 2% की गिरावट ने निवेशकों को मेटल्स की ओर मोड़ा।
इन कारकों ने मिलकर बाजार को गर्माया, जहां NSE पर गोल्ड ETF का ट्रेडिंग वॉल्यूम 50 करोड़ रुपये प्रतिदिन पार कर गया। ज्वेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने चिंता जताई कि उच्च कीमतें सेल्स को 15% कम कर सकती हैं, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे Groww और Zerodha पर डिजिटल गोल्ड खरीद में उछाल आया।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे मार्केट ट्रेंड्स को ट्रैक करें। गोल्ड बॉन्ड्स और सिल्वर ETF जैसे इंस्ट्रूमेंट्स सुरक्षित विकल्प प्रदान करते हैं, जहां रिटर्न रेट 12% तक पहुंच सकता है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में रिस्क अधिक है, क्योंकि वोलेटिलिटी इंडेक्स 30% ऊपर है। बाजार में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग बढ़ी है, जहां हेज फंड्स ने पोजिशन्स बढ़ाईं।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स की तुलना
| वर्ष | सोना (अधिकतम, प्रति 10 ग्राम) | चांदी (अधिकतम, प्रति किलो) |
|---|---|---|
| 2020 | 56,200 | 76,000 |
| 2021 | 48,500 | 68,000 |
| 2022 | 55,000 | 72,000 |
| 2023 | 61,000 | 80,000 |
| 2024 | 75,000 | 1,00,000 |
| 2025 | 1,20,000 | 2,50,000 |
| 2026 (वर्तमान) | 1,50,200 | 4,20,500 |
यह तालिका दिखाती है कि कैसे कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, खासकर महामारी के बाद से। 2026 में यह उछाल अभूतपूर्व है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को प्रतिबिंबित करता है।
विशेषज्ञों की राय में, अगर आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव आया, तो कीमतें स्थिर हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल ट्रेंड ऊपर की ओर है। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन ने सरकार से आयात शुल्क कम करने की मांग की, ताकि लोकल मार्केट प्रभावित न हो। कुल मिलाकर, ये कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही हैं, जहां गोल्ड इंपोर्ट बिल 100 बिलियन डॉलर पार करने की कगार पर है।
Disclaimer: This is a news report based on market trends and various sources. Any tips or insights provided are for informational purposes only and should not be considered as financial advice. Readers are advised to consult certified professionals before making investment decisions.


