भारतीय मल्टी-लेन हाईवे पर वाहनों की तेज रफ्तार

सड़क के इस लेन पर चला सकते हैं तेज रफ्तार में गाड़ी, ज्यादातर लोगों को नहीं पता होगा जवाब

“भारतीय हाईवे पर दाईं लेन तेज गति और ओवरटेकिंग के लिए होती है, जबकि बाईं लेन धीमी वाहनों के लिए। लेन अनुशासन की कमी से दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है, जिसमें गलत साइड ड्राइविंग और अनियमित लेन चेंज प्रमुख हैं। यह लेख नियमों, आंकड़ों, टिप्स और सुधारों पर फोकस करता है, जो ड्राइवरों को सुरक्षित यात्रा के लिए मार्गदर्शन देता है।”

भारतीय सड़कों पर मल्टी-लेन हाईवे में दाईं ओर की सबसे बाहरी लेन को फास्ट लेन या ओवरटेकिंग लेन कहा जाता है, जहां वाहन चालक तेज रफ्तार में ड्राइव कर सकते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, बाईं लेन धीमी गति वाले वाहनों जैसे ट्रक, बस या कम स्पीड कारों के लिए आरक्षित है, जबकि दाईं लेन का उपयोग केवल ओवरटेकिंग या हाई स्पीड मेनटेन करने के लिए किया जाना चाहिए। अधिकतर ड्राइवर इस नियम को नजरअंदाज कर बाईं लेन में ही तेज चलाते हैं, जो हादसों का बड़ा कारण बनता है।

नेशनल हाईवे पर लेन डिसिप्लिन का पालन न करने से ट्रैफिक फ्लो बिगड़ता है और रियर-एंड कोलिजन बढ़ते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई ट्रक बाईं लेन में 60 किमी/घंटा की स्पीड से चल रहा है, तो दाईं लेन में 100-120 किमी/घंटा की गति से आने वाली कार सुरक्षित ओवरटेक कर सकती है, लेकिन यदि कोई कार बाईं लेन में ही फंस जाती है, तो चेन रिएक्शन से बहु-वाहन दुर्घटना हो सकती है। नए ट्रैफिक रूल्स में लेन वायलेशन पर 500 से 1000 रुपये तक का फाइन लगता है, जो रीपीट ऑफेंडर्स के लिए लाइसेंस सस्पेंशन तक बढ़ सकता है। superprof.co.in

लेन नियमों की स्पष्टता के लिए, भारत में एक्सप्रेसवे जैसे दिल्ली-मेरठ या मुंबई-पुणे पर तीन या चार लेन वाले स्ट्रेच में सबसे दाईं लेन को हाई स्पीड के लिए डिजाइन किया गया है। यहां स्पीड लिमिट कारों के लिए 100-120 किमी/घंटा तक होती है, जबकि हेवी व्हीकल्स को 70-80 किमी/घंटा तक सीमित रखा जाता है। यदि कोई वाहन दाईं लेन में धीमी गति से चलता है, तो यह ब्लॉकेज क्रिएट करता है और पीछे से आने वाले वाहनों को मजबूरन लेन चेंज करने पड़ते हैं, जो जोखिम भरा होता है।

दुर्घटना आंकड़ों से पता चलता है कि लेन इंडिसिप्लिन और गलत साइड ड्राइविंग से बड़ी संख्या में मौतें होती हैं। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे के डेटा के आधार पर, गलत लेन यूज से होने वाली दुर्घटनाएं कुल रोड एक्सीडेंट्स का 5-7% हिस्सा होती हैं, लेकिन इनमें फैटेलिटी रेट हाई होता है क्योंकि हाई स्पीड इन्वॉल्वमेंट अधिक होता है। उदाहरण के तौर पर, स्पीडिंग और लेन वायलेशन कॉम्बिनेशन से 70% से ज्यादा फैटेल एक्सीडेंट्स होते हैं।

नीचे एक टेबल में प्रमुख राज्यों में लेन संबंधित दुर्घटनाओं के आंकड़े दिए गए हैं (अनुमानित ट्रेंड्स पर आधारित):

राज्यलेन वायलेशन से दुर्घटनाएं (प्रति वर्ष)मौतेंप्रमुख कारण
उत्तर प्रदेश15,000+4,500+गलत ओवरटेकिंग और धीमी लेन ब्लॉक
महाराष्ट्र10,000+3,000+एक्सप्रेसवे पर अनियमित लेन चेंजdevpathshala.com
तमिलनाडु12,000+3,500+हाई स्पीड में बाईं लेन यूज
दिल्ली8,000+2,000+अर्बन हाईवे पर ट्रैफिक मिक्सtimesofindia.indiatimes.com

ये आंकड़े दिखाते हैं कि उत्तरी और पश्चिमी राज्यों में समस्या अधिक गंभीर है, जहां हाईवे नेटवर्क घना है लेकिन अनुशासन कम।

सुरक्षित हाई स्पीड ड्राइविंग के लिए कुछ प्रमुख टिप्स:

लेन चूज करें सही: हमेशा बाईं लेन में रहें यदि स्पीड 80 किमी/घंटा से कम है। दाईं लेन केवल ओवरटेकिंग के लिए यूज करें और तुरंत बाईं लेन में लौटें।

स्पीड मेनटेन करें कंसिस्टेंट: एक्सप्रेसवे पर 100 किमी/घंटा की स्पीड से ड्राइव करते समय, ब्रेकिंग डिस्टेंस 100 मीटर से ज्यादा हो सकती है, इसलिए आगे 200 मीटर तक स्कैन करें।

इंडिकेटर का यूज: लेन चेंज से पहले इंडिकेटर दें और मिरर चेक करें। ब्लाइंड स्पॉट से बचें, खासकर ट्रकों के पास।

डिस्टेंस रखें सुरक्षित: हाई स्पीड में कम से कम 3 सेकंड का गैप रखें। यदि स्पीड 100 किमी/घंटा है, तो आगे वाले वाहन से 80-100 मीटर दूरी बनाए रखें।

नाइट ड्राइविंग में सावधानी: रात में हेडलाइट्स को डिपर पर रखें और दाईं लेन में रहते हुए स्पीड 80 किमी/घंटा तक सीमित करें, क्योंकि विजिबिलिटी कम होती है।

वेदर कंडीशंस एडजस्ट करें: बारिश में स्पीड 70% कम करें और दाईं लेन अवॉइड करें यदि स्लिपरी हो। फॉग में फॉग लाइट्स यूज करें लेकिन स्पीड 50 किमी/घंटा से ऊपर न जाएं।

नए ट्रैफिक रूल्स में AI कैमरे और ऑटोमेटेड चालान सिस्टम से लेन वायलेशन पर सख्ती बढ़ी है। कमर्शियल व्हीकल्स जैसे ट्रक ड्राइवरों के लिए लेन डिसिप्लिन अनिवार्य है, वरना लाइसेंस कैंसलेशन का प्रावधान है। हाईवे पर पैदल चलने वाले या साइकिलिस्ट्स के लिए अलग से फुटपाथ या सर्विस रोड का प्रावधान बढ़ रहा है, जो लेन संबंधित हादसों को कम करेगा।

गवर्नमेंट की सड़क सुरक्षा अभियान में लेन डिसिप्लिन को कल्चर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जैसे विदेशों में जहां स्लो लेन यूज न करने पर भारी पेनल्टी लगती है। भारत में भी डिजिटल मॉनिटरिंग से यह बदलाव आ रहा है, जहां हाईवे पर स्पीड सेंसर्स और कैमरे वायलेशन कैप्चर करते हैं। ड्राइवरों को एजुकेशन प्रोग्राम्स में शामिल करने से हादसे 20-30% कम हो सकते हैं।

एक्सप्रेसवे पर हाई स्पीड ड्राइविंग के दौरान, व्हीकल कंडीशन चेक करना जरूरी है। टायर्स का प्रेशर, ब्रेक्स और सस्पेंशन यदि सही न हों, तो दाईं लेन में कंट्रोल खोने का रिस्क बढ़ता है। उदाहरण के लिए, यदि टायर प्रेशर कम है, तो 120 किमी/घंटा पर हैंडलिंग प्रभावित होती है। इसलिए ट्रिप से पहले सर्विसिंग कराएं।

कई ड्राइवर दाईं लेन में लंबे समय तक रहते हैं, जो ट्रैफिक जाम का कारण बनता है। इससे पीछे से आने वाले वाहन मजबूरन बाईं लेन से ओवरटेक करते हैं, जो गलत साइड ड्राइविंग जैसा जोखिमपूर्ण होता है। नियम के मुताबिक, ओवरटेकिंग के बाद तुरंत बाईं लेन में शिफ्ट होना चाहिए।

हाईवे पर इमरजेंसी में यदि ब्रेक लगाना पड़े, तो हैजर्ड लाइट्स ऑन करें और साइड में पार्क करें। दाईं लेन में पार्किंग सख्त मना है, क्योंकि इससे हाई स्पीड कोलिजन हो सकता है। ट्रक ड्राइवर अक्सर यह गलती करते हैं, जो बड़े हादसों का कारण बनती है।

सुधार के लिए, गवर्नमेंट हाईवे पर ज्यादा साइनेज और एजुकेशन कैंपेन चला रही है। स्कूलों में रोड सेफ्टी को सिलेबस में शामिल करने से नई जेनरेशन बेहतर ड्राइवर बनेगी। कमर्शियल फ्लीट ऑपरेटर्स को GPS ट्रैकिंग से लेन कंप्लायंस मॉनिटर करने का निर्देश दिया गया है।

अंत में, दाईं लेन का सही यूज न केवल स्पीड बढ़ाता है बल्कि सेफ्टी भी सुनिश्चित करता है। अधिकतर लोग बाईं लेन में ही तेज चलाने की आदत से हादसे बुलाते हैं, जबकि नियम पालन से यात्रा सुगम हो सकती है।

Disclaimer: This news is based on reports, tips, and sources.

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