मोदी और ट्रंप ट्रेड डील पर चर्चा करते हुए

बस मोदी-ट्रंप की मुहर लगना बाकी! इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर आया बड़ा अपडेट, कॉमर्स सेक्रेटरी ने कहा….

“भारत-अमेरिका ट्रेड डील छह दौर की बातचीत के बाद पूर्णता के करीब पहुंच गई है, जहां कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा कि डील जल्द फाइनल हो सकती है। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने पुष्टि की कि कोई स्टिकी इश्यू बाकी नहीं है और दोनों देश तेजी से क्लोजर की ओर बढ़ रहे हैं। यह डील निर्यात बढ़ाने, टैरिफ घटाने और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग पर फोकस करेगी, जबकि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ पॉलिसी के बीच भारत अपनी हितों की रक्षा कर रहा है। आर्थिक सर्वे 2026 में इस साल डील के पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।”

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय ट्रेड डील अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जहां सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुहर लगना बाकी है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि छह दौर की गहन वार्ताओं के बाद डील पूर्णता के बेहद करीब है, जबकि बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स में अभी समय लग सकता है। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका के साथ यह डील भारत के निर्यात को बूस्ट देगी, खासकर उन सेक्टर्स में जहां टैरिफ बैरियर्स चुनौती बने हुए हैं।

ट्रंप प्रशासन की हालिया टैरिफ पॉलिसी के बीच यह अपडेट महत्वपूर्ण है, जहां अमेरिका ने भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और 25% पेनल्टी टैरिफ लगाया है, मुख्य रूप से रूसी ऑयल खरीद को लेकर। लेकिन भारत ने WTO में चुनौती देकर विवाद को कानूनी चैनल्स में सीमित रखा है, जिससे डील पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देश अपनी हितों की रक्षा करते हुए बातचीत जारी रख रहे हैं और जल्द अच्छी खबर की उम्मीद है। उन्होंने पुष्टि की कि कोई बड़ा स्टिकी इश्यू बाकी नहीं बचा, जिससे डील क्लोजर की ओर तेजी से बढ़ रही है।

यह डील भारत के लिए रणनीतिक महत्व की है, क्योंकि यह न केवल ट्रेड बैरियर्स को कम करेगी बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस और क्लीन एनर्जी में सहयोग को मजबूत करेगी। एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर एस जयशंकर की अमेरिका यात्रा इसी दिशा में एक कदम है, जहां क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल मीटिंग में सप्लाई चेन रेजिलिएंस पर फोकस होगा। आर्थिक सर्वे 2026 में स्पष्ट उल्लेख है कि यह डील इस साल पूरी हो सकती है, जो एक्सटर्नल अनसर्टेंटी को कम करेगी।

ट्रेड डेटा के अनुसार, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 200 बिलियन डॉलर को पार कर गया, लेकिन टैरिफ के कारण एक्सपोर्टर्स को नुकसान हुआ। डील से भारत के टेक्सटाइल, लेदर और मरीन प्रोडक्ट्स को बूस्ट मिलेगा, जहां टैरिफ कट्स से लोकल मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट होगा। अमेरिका भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा प्रोडक्ट्स का बड़ा इंपोर्टर है, जबकि भारत अमेरिका से कैपिटल गुड्स और रॉ मटेरियल्स आयात करता है।

प्रमुख सेक्टर्स में संभावित लाभ:

टेक्सटाइल और लेदर: अमेरिकी बाजार में 15-20% टैरिफ रिडक्शन से भारत के एक्सपोर्ट 30% तक बढ़ सकते हैं, जो 50 मिलियन डॉलर अतिरिक्त रेवेन्यू जेनरेट करेगा।

फार्मास्यूटिकल्स: जेनेरिक ड्रग्स पर बैरियर्स कम होने से भारत का मार्केट शेयर 40% से ऊपर जा सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स: सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट्स में सहयोग से PLI स्कीम को सपोर्ट मिलेगा, जिससे 2026 में 10 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश आ सकता है।

क्रिटिकल मिनरल्स: लिथियम और कोबाल्ट जैसी मिनरल्स में जॉइंट वेंचर्स से भारत की एनर्जी ट्रांजिशन स्पीड अप होगी।

डील के तहत भारत अमेरिका से ऑयल इंपोर्ट्स को डायवर्सिफाई कर सकता है, जहां ट्रंप ने सुझाव दिया कि भारत वेनेजुएला से ऑयल खरीदे बजाय ईरान या रूस से। यह अमेरिकी सैंक्शंस को बैलेंस करने का तरीका है, जबकि भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित कर रहा है। गोयल ने कहा कि हर देश अपनी प्राथमिकताओं पर फोकस करता है, और भारत भी यही कर रहा है।

ट्रेड डील के प्रमुख प्रावधानों की तालिका:

सेक्टरवर्तमान टैरिफ (%)प्रस्तावित कट्स (%)संभावित प्रभाव (2026 अनुमान)
टेक्सटाइल2510-15एक्सपोर्ट में 25% वृद्धि, 20 मिलियन जॉब्स क्रिएट
लेदर प्रोडक्ट्स205-1015 बिलियन डॉलर अतिरिक्त ट्रेड
मरीन प्रोडक्ट्स150-5लोकल फिशिंग इंडस्ट्री बूस्ट, 10% ग्रोथ
इलेक्ट्रॉनिक्स188-12FDI में 5 बिलियन डॉलर बढ़ोतरी
फार्मा102-5मार्केट एक्सेस में 35% इजाफा

यह डील भारत की हालिया EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से अलग है, जहां EU के साथ “मदर ऑफ ऑल डील्स” के तहत 96.6% टैरिफ रिडक्शन हुआ है। लेकिन अमेरिका के साथ फोकस अधिक रणनीतिक है, जहां क्वाड इनिशिएटिव्स और इंडो-पैसिफिक सहयोग को मजबूती मिलेगी। ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने भारत को अन्य पार्टनर्स जैसे ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ डील्स की ओर धकेला, लेकिन US डील से ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की पोजिशन मजबूत होगी।

कॉमर्स सेक्रेटरी ने कहा कि अन्य देशों के साथ नेगोशिएशंस तेज हैं, और कुछ FTAs इस साल फाइनल हो सकते हैं। लेकिन US डील प्राथमिकता है, क्योंकि यह अनसर्टेंटी कम करेगी। गोयल ने जोर दिया कि डील बिना किसी डेडलाइन के हो रही है, जब दोनों पक्ष संतुष्ट होंगे तब अनाउंसमेंट होगा। यह अपडेट भारत के एक्सपोर्टर्स के लिए राहत है, जो US टैरिफ से प्रभावित हुए हैं।

डील से जुड़े रिस्क्स और मिटिगेशन स्ट्रैटजीज:

टैरिफ वॉर रिस्क: अमेरिका की पॉलिसी में बदलाव से प्रभाव, लेकिन WTO चैलेंज से कंट्रोल।

सप्लाई चेन डिपेंडेंसी: चीन से डिपेंडेंस कम करने के लिए US सहयोग, PLI स्कीम से लोकल प्रोडक्शन बूस्ट।

इकोनॉमिक इम्पैक्ट: GDP में 0.5-1% ग्रोथ योगदान, लेकिन इंपोर्ट्स बढ़ने से ट्रेड डेफिसिट मॉनिटरिंग जरूरी।

रणनीतिक लाभ: डिफेंस और टेक ट्रांसफर से भारत की ग्लोबल पोजिशन मजबूत।

अंत में, यह डील भारत-अमेरिका रिलेशंस को नई ऊंचाई देगी, जहां ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी के बीच मोदी की “मेक इन इंडिया” को सपोर्ट मिलेगा। कॉमर्स सेक्रेटरी के बयान से साफ है कि डील अब सिर्फ फॉर्मल एप्रूवल की प्रतीक्षा में है।

Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।

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