“चांदी की कीमतें जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, जहां MCX पर यह 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर चुकी है, लेकिन ब्रोकरेज हाउस जैसे HDFC Securities ने चेतावनी दी है कि आगामी यूनियन बजट में इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती से घरेलू दामों में गिरावट आ सकती है। यह तेजी जियोपॉलिटिकल टेंशन, सप्लाई डेफिसिट और इंडस्ट्रियल डिमांड से आई है, जबकि बजट के बाद कीमतें दबाव में आ सकती हैं, हालांकि लॉन्ग-टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। निवेशकों को प्रॉफिट बुकिंग पर विचार करना चाहिए, लेकिन पोर्टफोलियो में 10% तक अलोकेशन रखना फायदेमंद हो सकता है।”
चांदी की रिकॉर्ड तेजी: क्या है वजह?
चांदी की कीमतों में हालिया उछाल ने निवेशकों को आकर्षित किया है, जहां MCX पर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स ने 3.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छुआ है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ग्लोबल सप्लाई की कमी से आई है, जहां 2021 से 2025 तक कुल 800 मिलियन औंस का डेफिसिट दर्ज किया गया। चीन की एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग पॉलिसी ने सप्लाई को और सीमित कर दिया है, जबकि माइनिंग ग्रोथ में कमी आई है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, जैसे यूएस-ईयू संबंधों में तनाव और ट्रंप की ग्रीनलैंड बिड, ने सेफ-हेवन डिमांड को बढ़ावा दिया।
इंडस्ट्रियल सेक्टर में चांदी की मांग AI, क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स से मजबूत हुई है। सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुमानों के मुताबिक, 2026 में ग्लोबल डेफिसिट 230 मिलियन औंस तक पहुंच सकता है। COMEX पर चांदी 93 डॉलर प्रति औंस से ऊपर ट्रेड कर रही है, जो पिछले साल के मुकाबले 206% की बढ़ोतरी दर्शाती है। घरेलू बाजार में यह ट्रेंड ETF रैली से सपोर्टेड है, जहां सिल्वर ETF में 30% का उछाल देखा गया। गोल्ड-सिल्वर रेशियो 90:1 से घटकर 57:1 पर आ गया है, जो चांदी की रिलेटिव स्ट्रेंथ को हाइलाइट करता है।
ब्रोकरेज हाउस की चेतावनी: बजट का असर कैसे?
HDFC Securities ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि चांदी की तेजी लॉन्ग-टर्म में बुलिश है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में रिस्क मौजूद हैं। मुख्य चिंता यूनियन बजट में गोल्ड और सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती है। वर्तमान में इंपोर्ट ड्यूटी 15% है, जो अगर घटकर 10% या उससे कम हो जाती है, तो घरेलू कीमतों पर तत्काल दबाव पड़ेगा। इससे इंपोर्ट बढ़ सकता है, जो सप्लाई को बैलेंस कर देगा और कीमतों को नीचे खींचेगा।
ब्रोकरेज का मानना है कि सरकार इंडस्ट्री को सपोर्ट करने के लिए यह कदम उठा सकती है, खासकर ज्वेलरी और इंडस्ट्रियल यूजर्स को राहत देने के लिए। पिछले बजटों में इसी तरह के बदलाव देखे गए हैं, जहां ड्यूटी रिडक्शन ने कमोडिटी प्राइस को प्रभावित किया। अगर ड्यूटी कट होती है, तो चांदी की कीमतें 2.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर सकती हैं, जो 86.5 डॉलर प्रति औंस के ग्लोबल सपोर्ट लेवल से मेल खाती है। इसके अलावा, CME ने सिल्वर फ्यूचर्स के लिए मार्जिन को 45% तक बढ़ा दिया है, जो वोलैटिलिटी को कंट्रोल करने का प्रयास है।
तकनीकी इंडिकेटर्स: क्या कहते हैं चार्ट्स?
आरएसआई पर डेली चार्ट्स में बेयरिश डाइवर्जेंस दिख रहा है, जो रैली के टॉप-आउट का संकेत देता है। ओपन इंटरेस्ट में गिरावट से लॉन्ग अनवाइंडिंग का पता चलता है। फिबोनाची एक्सटेंशन पर चांदी ने 61.8% रेसिस्टेंस को छुआ है, जहां से नेक्स्ट टारगेट 78.6% पर 99.2-100 डॉलर (करीब 3.20 लाख रुपये) और 100% पर 107 डॉलर (करीब 3.40 लाख रुपये) है। लेकिन अगर ब्रेकडाउन होता है, तो सपोर्ट 86.5 डॉलर पर मजबूत है।
| तारीख | MCX सिल्वर प्राइस (रुपये प्रति किलोग्राम) | चेंज (%) | ग्लोबल प्राइस (डॉलर प्रति औंस) |
|---|---|---|---|
| 1 जनवरी | 2,48,000 | – | 75 |
| 7 जनवरी | 2,63,000 | +6 | 80 |
| 14 जनवरी | 2,90,000 | +10 | 85 |
| 19 जनवरी | 3,05,000 | +5 | 90 |
| 20 जनवरी | 3,15,000 | +3 | 93 |
यह टेबल हालिया ट्रेंड को दिखाती है, जहां कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं, लेकिन वोलैटिलिटी बढ़ रही है।
निवेशकों के लिए सलाह: क्या करें?
प्रॉफिट बुकिंग: हाई लेवल पर कुछ हिस्सा बेचें, क्योंकि बजट के पहले वोलैटिलिटी बढ़ सकती है। अगर कीमतें 3.20 लाख तक जाती हैं, तो 20-30% पोजीशन क्लोज करें।
पोर्टफोलियो अलोकेशन: ब्रोकरेज सलाह देते हैं कि कुल पोर्टफोलियो का 10% तक सिल्वर में रखें, क्योंकि लॉन्ग-टर्म में जियोपॉलिटिकल रिस्क और इंडस्ट्रियल ग्रोथ से फायदा होगा।
रिस्क मैनेजमेंट: स्टॉप-लॉस 2.85 लाख पर सेट करें, और अगर ड्यूटी कट की खबर आती है, तो शॉर्ट पोजीशन पर विचार करें।
अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट: सिल्वर ETF या फ्यूचर्स के बजाय फिजिकल सिल्वर पर फोकस करें, लेकिन स्टोरेज कॉस्ट को ध्यान में रखें।
ग्लोबल फैक्टर्स: यूएस डॉलर की स्ट्रेंथ, फेड रेट कट और ट्रेड पॉलिसी चांदी को प्रभावित करेंगी। अगर डॉलर मजबूत होता है, तो कीमतें दबाव में आएंगी।
आगे की संभावनाएं: लॉन्ग-टर्म बनाम शॉर्ट-टर्म
लॉन्ग-टर्म में चांदी की डिमांड क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन से बढ़ेगी, जहां सोलर पैनल्स और EV में इसका यूज जरूरी है। लेकिन शॉर्ट-टर्म में बजट पॉलिसी रिस्क बड़ा है। अगर सरकार ड्यूटी नहीं घटाती, तो कीमतें 3.40 लाख तक जा सकती हैं। वहीं, अगर कटौती होती है, तो 10-15% की गिरावट संभव है। निवेशक गोल्ड-सिल्वर रेशियो को मॉनिटर करें, क्योंकि अगर यह 50:1 के नीचे जाता है, तो चांदी ओवरवैल्यूड हो सकती है।
मार्केट डायनामिक्स: सप्लाई और डिमांड का बैलेंस
ग्लोबल सप्लाई में माइनिंग से केवल 5% ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि डिमांड 10% बढ़ सकती है। इंडिया में ज्वेलरी डिमांड 20% ऊपर है, लेकिन इंडस्ट्रियल यूज 30% से ज्यादा। अगर ट्रेड फ्रिक्शन बढ़ते हैं, तो डिमांड प्रभावित हो सकती है। ब्रोकरेज हाउस इस आशंका पर फोकस कर रहे हैं कि बजट के बाद मार्केट सेंटिमेंट शिफ्ट हो सकता है, जो लॉन्ग पोजीशन को अनवाइंड कर देगा।
Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। बाजार की स्थितियां बदल सकती हैं, और कोई भी निर्णय लेने से पहले पेशेवर सलाह लें। सभी डेटा उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।


