बालसखी मॉडल में युवतियां बच्चों को पढ़ाती हुईं

क्या है बालसखी मॉडल जिसकी वर्ल्ड बैंक ने की प्रशंसा, अमेरिका ने भी इसे अपनाया

“बालसखी मॉडल प्रथम संस्था द्वारा विकसित एक शिक्षा सुधार कार्यक्रम है, जिसमें समुदाय की युवतियां कमजोर छात्रों को बुनियादी पढ़ाई-लिखाई सिखाती हैं। वर्ल्ड बैंक ने इसकी लागत-प्रभावीता और परिणामों की सराहना की है, जबकि अमेरिका में प्रथम यूएसए के माध्यम से इसका वैश्विक विस्तार और अनुकूलन हो रहा है, जहां यह मैकआर्थर फाउंडेशन जैसे संगठनों द्वारा समर्थित है। यह मॉडल टीचिंग एट द राइट लेवल (TaRL) का आधार है, जो अब 80 मिलियन से अधिक बच्चों तक पहुंच चुका है।”

बालसखी मॉडल भारत की प्रमुख शिक्षा संस्था प्रथम द्वारा 1996 में शुरू किया गया एक अनोखा कार्यक्रम है, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कमजोर छात्रों को बुनियादी साक्षरता और गणित कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है। इस मॉडल में ‘बालसखी’ यानी बच्चे की दोस्त के रूप में समुदाय की युवतियां, जो आमतौर पर 10वीं या 12वीं पास होती हैं, को दो सप्ताह की ट्रेनिंग देकर स्कूलों में तैनात किया जाता है। ये बालसखियां कक्षा 2 से 4 तक के उन बच्चों को अलग से दो घंटे रोजाना पढ़ाती हैं, जो पाठ्यक्रम से पीछे रह जाते हैं। मॉडल का मूल सिद्धांत है कि शिक्षा आयु या ग्रेड के बजाय बच्चे के वर्तमान सीखने के स्तर पर आधारित होनी चाहिए।

इस कार्यक्रम की शुरुआत मुंबई और वडोदरा जैसे शहरों में हुई, जहां प्रथम ने सरकारी शिक्षा विभागों के साथ साझेदारी की। बालसखी मॉडल ने जल्दी ही साबित कर दिया कि कम लागत में बड़े पैमाने पर शिक्षा सुधार संभव है। उदाहरण के लिए, जे-पॉल (Abdul Latif Jameel Poverty Action Lab) द्वारा किए गए रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल्स में पाया गया कि इस मॉडल से छात्रों के गणित स्कोर में 0.15 स्टैंडर्ड डेविएशन और भाषा स्कोर में 0.28 स्टैंडर्ड डेविएशन की वृद्धि हुई। यह प्रभाव उन क्षेत्रों में अधिक था जहां छात्रों की शुरुआती स्तर की कमी ज्यादा थी।

बालसखी मॉडल कैसे काम करता है

बालसखी मॉडल को चार मुख्य चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

मूल्यांकन : हर बच्चे का सरल टेस्ट लिया जाता है, जिसमें पढ़ने के पांच स्तर (अक्षर, शब्द, वाक्य, पैराग्राफ, कहानी) और गणित के पांच स्तर (संख्या पहचान, जोड़-घटाव, गुणा-भाग) शामिल होते हैं। यह ASER (Annual Status of Education Report) जैसे टूल्स पर आधारित है, जो प्रथम द्वारा ही विकसित किया गया।

समूहीकरण : बच्चे अपनी क्षमता के अनुसार समूहों में बांटे जाते हैं, न कि कक्षा के आधार पर। इससे व्यक्तिगत ध्यान संभव होता है।

शिक्षण गतिविधियां : बालसखियां खेल-आधारित, इंटरैक्टिव तरीकों से पढ़ाती हैं, जैसे कार्ड गेम्स, स्टोरीटेलिंग और प्रैक्टिकल एक्सरसाइज। उदाहरण के लिए, गणित सिखाने के लिए पत्थर या छड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है।

निरंतर निगरानी : हर दो सप्ताह में पुनर्मूल्यांकन होता है, और प्रगति के आधार पर बच्चे अगले समूह में जाते हैं।

यह मॉडल पारंपरिक शिक्षा से अलग है क्योंकि इसमें पाठ्यक्रम पर जोर कम और बुनियादी कौशलों पर ज्यादा है। प्रथम के अनुसार, 2025-26 में भारत के 15 राज्यों में यह मॉडल 50 मिलियन से अधिक छात्रों तक पहुंचा है।

वर्ल्ड बैंक की प्रशंसा और वैश्विक मान्यता

वर्ल्ड बैंक ने अपनी कई रिपोर्टों में बालसखी मॉडल को शिक्षा क्षेत्र में एक सफल उदाहरण के रूप में उल्लेख किया है। साउथ एशिया एजुकेशन रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने नोट किया कि यह मॉडल लागत-प्रभावी है, जहां प्रति बच्चा सालाना खर्च मात्र 500 रुपये के आसपास है, फिर भी परिणाम जे-पॉल स्टडीज में साबित हो चुके हैं। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, दक्षिण एशिया में छात्र सीखने की चुनौतियों को हल करने के लिए ऐसे कम्युनिटी-बेस्ड मॉडल जरूरी हैं, और बालसखी ने छात्रों के टेस्ट स्कोर में 20-30% सुधार दिखाया।

इसके अलावा, वर्ल्ड बैंक ने प्रथम के साथ साझेदारी में TaRL (Teaching at the Right Level) को बढ़ावा दिया, जो बालसखी का विस्तारित रूप है। 2026 की वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट में उल्लेख है कि TaRL ने अफ्रीका में 7 मिलियन बच्चों को लाभ पहुंचाया, जहां Zambia और Nigeria जैसे देशों में सरकारी स्तर पर अपनाया गया। वर्ल्ड बैंक ने इसे ‘स्मार्ट बाय’ इनिशिएटिव में शामिल किया, जहां यह शिक्षा निवेश की सर्वोत्तम रणनीतियों में से एक है।

अमेरिका में बालसखी मॉडल का अपनाना

मुख्य प्रभावभारत मेंवैश्विक स्तर पर
छात्रों की संख्या76 मिलियन80 मिलियन+ (भारत+अफ्रीका)
स्कोर सुधारगणित: 0.15 SD, भाषा: 0.28 SD1.85 वर्ष की सीखने की वृद्धि (30 घंटे में)
लागत प्रति बच्चा₹500/वर्ष$10/वर्ष
अपनाने वाले देश15 राज्य20+ देश (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका)

अमेरिका में बालसखी मॉडल को प्रथम यूएसए के माध्यम से अपनाया गया है, जो 1999 में स्थापित हुआ। प्रथम यूएसए मुख्य रूप से फंडरेजिंग करता है, लेकिन TaRL को अमेरिकी शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन किया गया है। मैकआर्थर फाउंडेशन की 100&Change प्रतियोगिता में प्रथम को टॉप 5 फाइनलिस्ट चुना गया, जहां TaRL को वैश्विक शिक्षा संकट का समाधान माना गया। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा समर्थित Mandela Washington Fellowship ने TaRL को चैलेंज के रूप में अपनाया, जहां अफ्रीकी लीडर्स को अमेरिका में ट्रेनिंग देकर इसे लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

अमेरिका में Glasswing जैसे संगठन TaRL को लैटिन अमेरिकी संदर्भ में पायलट कर रहे हैं, और Pratham International के साथ साझेदारी में इसे अनुकूलित किया जा रहा है। 2026 में प्रथम यूएसए ने रिपोर्ट किया कि TaRL-प्रेरित कार्यक्रम अमेरिकी कम्युनिटी सेंटर्स में परीक्षण हो रहे हैं, जहां प्रवासी बच्चों के लिए बुनियादी कौशल विकास पर फोकस है। J-PAL North America ने TaRL को अमेरिकी शिक्षा नीतियों में एकीकृत करने की सिफारिश की है, खासकर COVID-19 के बाद सीखने की कमी को भरने के लिए।

बालसखी मॉडल के प्रमुख लाभ और चुनौतियां

लाभ :

समावेशी : महिलाओं को रोजगार देता है, जहां 1 लाख से अधिक बालसखियां प्रशिक्षित हो चुकी हैं।

स्केलेबल : कम संसाधनों में बड़े पैमाने पर लागू, जैसे उत्तर प्रदेश में 20,000 स्कूलों में।

डेटा-आधारित : ASER सर्वे से सालाना 6 लाख बच्चों का डेटा इकट्ठा, जो नीति निर्माण में मदद करता है।

दीर्घकालिक प्रभाव : स्टडीज दिखाती हैं कि लाभ 2-3 साल तक बने रहते हैं, ड्रॉपआउट रेट 15% कम होता है।

चुनौतियां :

ट्रेनिंग : बालसखियों को निरंतर सपोर्ट की जरूरत, जो ग्रामीण क्षेत्रों में मुश्किल।

सरकारी एकीकरण : कुछ राज्यों में शिक्षक यूनियनों का विरोध।

डिजिटल अनुकूलन : हाल में Baalsakhi चैटबॉट लॉन्च, जो WhatsApp पर 12 भाषाओं में उपलब्ध, लेकिन कनेक्टिविटी मुद्दे।

TaRL का विकास और वैश्विक प्रभाव

बालसखी मॉडल से विकसित TaRL अब प्रथम की मुख्य रणनीति है। 2026 में TaRL अफ्रीका में 10 देशों मेंスケल हो चुका है, जहां Youth Impact और JICA जैसे भागीदार हैं। भारत में हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में सरकारी शिक्षक TaRL लागू कर रहे हैं। GEEAP (Global Education Evidence Advisory Panel) ने TaRL को ‘बेस्ट बाय’ घोषित किया, जहां यह शिक्षा अनुसंधान में सबसे बड़े प्रभाव आकार दिखाता है।

उदाहरण के लिए, बॉट्सवाना में TaRL से छात्रों के पढ़ने के स्तर में 50% सुधार हुआ, जबकि कोट डी’आइवर में Programme d’Enseignement Ciblé के तहत 5 लाख बच्चे लाभान्वित। अमेरिका में Pratham USA के माध्यम से TaRL को लैटिन अमेरिका में फैलाया जा रहा है, जहां Glasswing ने दिल्ली विजिट के बाद इसे अपनाया।

TaRL की प्रमुख स्टडीजवर्षस्थानप्रमुख निष्कर्ष
Balsakhi RCT2001मुंबई/वडोदरा0.28 SD भाषा सुधार
उत्तर प्रदेश कैंप2016उत्तर प्रदेशपढ़ने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी
Zambia Catch Up2023Zambia1.85 वर्ष सीखने की वृद्धि
Mandela Fellowship Challenge2024US/अफ्रीकाविकासशील क्षेत्रों में नया एंटरप्राइज

यह मॉडल साबित करता है कि शिक्षा सुधार में स्थानीय भागीदारी और स्तर-आधारित शिक्षण कितना महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: This news report is based on various sources and provides educational tips.

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